{"_id":"5e430b498ebc3ee5947ff88e","slug":"nirbhaya-hearing-today-on-issue-of-new-death-warrant-ashram-news-noi491544078","type":"story","status":"publish","title_hn":"निर्भया : नया डेथ वारंट जारी करने पर सुनवाई आज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निर्भया : नया डेथ वारंट जारी करने पर सुनवाई आज
विज्ञापन
नई दिल्ली। निर्भया के दोषियों की फांसी के लिए नया डेथ वारंट जारी कराने के लिए उसके माता-पिता और तिहाड़ जेल प्रशासन ने एक बार फिर पटियाला हाउस कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने अर्जी देकर कोर्ट से दोषियों के खिलाफ तीसरा डेथ वारंट जारी करने की मांग की है। इस याचिका के आधार पर कोर्ट ने दोषियों को नोटिस भेजकर सुनवाई बुधवार को मुकर्रर की है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने दिल्ली हाईकोर्ट के 5 फरवरी के उस आदेश पर गौर किया, जिसमें चारों दोषियों को एक हफ्ते यानी 11 फरवरी तक कानूनी विकल्पों के प्रयोग का समय दिया गया था। तिहाड़ जेल प्रशासन ने 5 फरवरी को ही पटियाला हाउस कोर्ट का रुख कर डेथ वारंट जारी करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा था कि दोषियों को 7 दिन का समय दिया गया है और इससे पहले उनके खिलाफ डेथ वारंट जारी नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा था कि जब दोषियों को कानून जीवित रहने की इजाजत देता है, तब उन्हें फांसी पर चढ़ाना पाप है। न्यायाधीश ने कहा कि मैं दोषियों के वकील की इस दलील से सहमत हूं कि महज संदेह और अटकलबाजी के आधार पर मौत के वारंट को तामील नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने तिहाड़ जेल की अर्जी खारिज कर करते हुए उसे फिर से अर्जी देने को कहा था। 11 फरवरी को दोषियों को दिया गया एक हफ्ते का समय पूरा हो गया है। इसी के चलते तिहाड़ जेल प्रशासन व निर्भया के माता-पिता ने मंगलवार को फिर पटियाला हाउस कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
इस मामले में चारों दोषियों विनय, मुकेश, अक्षय और पवन के खिलाफ दो बार डेथ वारंट हो चुके हैं, लेकिन उनकी याचिकाएं लंबित होने के कारण वे फांसी से बचते रहे। फिलहाल मुकेश, विनय और अक्षय की क्यूरेटिव और दया दोनों याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। दोषी पवन के पास अब भी क्यूरेटिव और दया याचिका दायर करने का मौका है। हाईकोर्ट के अल्टीमेटम के बाद पवन को क्यूरेटिव या दया याचिका दायर करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दूसरी ओर, दोषी विनय की दया याचिका राष्ट्रपति द्वारा खारिज किए जाने के फैसले को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने दिल्ली हाईकोर्ट के 5 फरवरी के उस आदेश पर गौर किया, जिसमें चारों दोषियों को एक हफ्ते यानी 11 फरवरी तक कानूनी विकल्पों के प्रयोग का समय दिया गया था। तिहाड़ जेल प्रशासन ने 5 फरवरी को ही पटियाला हाउस कोर्ट का रुख कर डेथ वारंट जारी करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा था कि दोषियों को 7 दिन का समय दिया गया है और इससे पहले उनके खिलाफ डेथ वारंट जारी नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा था कि जब दोषियों को कानून जीवित रहने की इजाजत देता है, तब उन्हें फांसी पर चढ़ाना पाप है। न्यायाधीश ने कहा कि मैं दोषियों के वकील की इस दलील से सहमत हूं कि महज संदेह और अटकलबाजी के आधार पर मौत के वारंट को तामील नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने तिहाड़ जेल की अर्जी खारिज कर करते हुए उसे फिर से अर्जी देने को कहा था। 11 फरवरी को दोषियों को दिया गया एक हफ्ते का समय पूरा हो गया है। इसी के चलते तिहाड़ जेल प्रशासन व निर्भया के माता-पिता ने मंगलवार को फिर पटियाला हाउस कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
विज्ञापन
इस मामले में चारों दोषियों विनय, मुकेश, अक्षय और पवन के खिलाफ दो बार डेथ वारंट हो चुके हैं, लेकिन उनकी याचिकाएं लंबित होने के कारण वे फांसी से बचते रहे। फिलहाल मुकेश, विनय और अक्षय की क्यूरेटिव और दया दोनों याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। दोषी पवन के पास अब भी क्यूरेटिव और दया याचिका दायर करने का मौका है। हाईकोर्ट के अल्टीमेटम के बाद पवन को क्यूरेटिव या दया याचिका दायर करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दूसरी ओर, दोषी विनय की दया याचिका राष्ट्रपति द्वारा खारिज किए जाने के फैसले को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।
विज्ञापन