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सोशल मीडिया के लिए बनाए गए नए नियम को हाईकोर्ट में चुनौती
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया के लिए बनाए गए नए नियम को चुनौती याचिका पर केंद्र सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में नए नियम को आम लोगों के मौलिक अधिकारों, अभिव्यक्ति व भाषण की स्वतंत्रता का हनन बताया गया है। यह जनहित याचिका नोएडा निवासी संजय कुमार सिंह ने दायर की है।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने केंद्र सरकार, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, इलेक्ट्रोनिक्स एवं सूचना टेक्नोलॉजी मंत्रालय और न्याय एवं कानून मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है। अदालत ने मामले की सुनवाई 16 अप्रैल तय की है।
याची ने तर्क रखा कि सोशल मीडिया के लिए तय किए गए नए नियम से आम लोगों के अधिकारों का हनन होगा। इनमें जहां एजेंसियों को असीमित अधिकार दिए गए हैं बल्कि एक तरह से लोगों को धमकाने का अधिकार दिया गया है। नए नियम में सोशल मीडिया जैसे ट्विटर, फेसबुक इत्यादि पर यदि कोई पोस्ट करता है तो एजेंसी उसे आपत्तिजनक मानते हुए हटाने के लिए कह सकती है।
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यदि ऐसा नहीं किया जाता तो सात वर्ष तक की कैद का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं सोशल मीडिया में पोस्ट करने वाले यूजर को ब्लॉक करने का भी अधिकार दिया गया है। उन्होंने कहा हर व्यक्ति को सूचना पाने का अधिकार है। सरकार की नीतियों व फैसले को हर व्यक्ति को विचार करने या उस पर जिरह करने का अधिकार है।
याची ने कहा सरकार के फैसले की निंदा करने को आपत्तिजनक माना जा सकता है और उस पोस्ट को एजेंसी तुरंत हटाने के लिए कह सकती है क्योंकि सरकारी एजेंसी पर राजनीतिक दबाव रहता है। बिना किसी का पक्ष सुने उसे ब्लॉक करना या उसके पोस्ट को हटाना गलत है। हमेशा रिव्यू का प्रावधान होना जरूरी है।
याची ने कहा कि अपमानजनक टिप्पणी के लिए पहले से ही आईपीसी की धारा 499 व 500 के तहत मानहानि का प्रावधान है। उन्होंने कहा नए नियम को धमकाने की दृष्टि से देखा जा सकता है। यह आम लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन है। ऐेसे में तय नए नियम को रद्द किया जाए।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने केंद्र सरकार, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, इलेक्ट्रोनिक्स एवं सूचना टेक्नोलॉजी मंत्रालय और न्याय एवं कानून मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है। अदालत ने मामले की सुनवाई 16 अप्रैल तय की है।
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याची ने तर्क रखा कि सोशल मीडिया के लिए तय किए गए नए नियम से आम लोगों के अधिकारों का हनन होगा। इनमें जहां एजेंसियों को असीमित अधिकार दिए गए हैं बल्कि एक तरह से लोगों को धमकाने का अधिकार दिया गया है। नए नियम में सोशल मीडिया जैसे ट्विटर, फेसबुक इत्यादि पर यदि कोई पोस्ट करता है तो एजेंसी उसे आपत्तिजनक मानते हुए हटाने के लिए कह सकती है।
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यदि ऐसा नहीं किया जाता तो सात वर्ष तक की कैद का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं सोशल मीडिया में पोस्ट करने वाले यूजर को ब्लॉक करने का भी अधिकार दिया गया है। उन्होंने कहा हर व्यक्ति को सूचना पाने का अधिकार है। सरकार की नीतियों व फैसले को हर व्यक्ति को विचार करने या उस पर जिरह करने का अधिकार है।
याची ने कहा सरकार के फैसले की निंदा करने को आपत्तिजनक माना जा सकता है और उस पोस्ट को एजेंसी तुरंत हटाने के लिए कह सकती है क्योंकि सरकारी एजेंसी पर राजनीतिक दबाव रहता है। बिना किसी का पक्ष सुने उसे ब्लॉक करना या उसके पोस्ट को हटाना गलत है। हमेशा रिव्यू का प्रावधान होना जरूरी है।
याची ने कहा कि अपमानजनक टिप्पणी के लिए पहले से ही आईपीसी की धारा 499 व 500 के तहत मानहानि का प्रावधान है। उन्होंने कहा नए नियम को धमकाने की दृष्टि से देखा जा सकता है। यह आम लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन है। ऐेसे में तय नए नियम को रद्द किया जाए।