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नई आबकारी नीति जनहित में, मकसद भ्रष्टाचार कम करना: दिल्ली सरकार

Fri, 16 Jul 2021 01:42 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 16 Jul 2021 01:42 AM IST
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new excise policy in public interest, says Delhi Government
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने बृहस्पतिवार को उच्च न्यायालय के समक्ष नई आबकारी नीति का बचाव करते हुए इसे जनहित में बताया। सरकार ने कहा नई आबकारी नीति 2021-22 का मकसद भ्रष्टाचार कम करना और शराब व्यापार में उचित प्रतिस्पर्धा उपलब्ध कराना है।
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मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने आबकारी नीति को चुनौती देने वाली नई याचिका पर केंद्र सरकार तथा दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने नीति पर रोक लगाने से इनकार करते हुए निविदा के लिए आवेदन की 20 जुलाई की अंतिम तारीख को भी आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया।
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वहीं सरकार ने नीति के खिलाफ दायर याचिका में लगाए गए आरोपों पर कहा कि यह आशंकाएं केवल काल्पनिक हैं। सरकार ने यह भी कहा कि इस मुद्दे को लेकर जारी विरोध पर अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए लिखित जवाब दाखिल करेगी। नई आबकारी नीति को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं। अदालत ने पहले भी किसी तरह का रोक आदेश पारित करने से इनकार कर दिया था।
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बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान नीति का विरोध कर रहे एक वकील ने तर्क रखा कि नई नीति दिल्ली को 32 क्षेत्रों में विभाजित करती है। इसके तहत बाजार में केवल 16 लोगों को ही अनुमति दी जा रही है और यह एकाधिकार को बढ़ावा देगी। पीठ ने उनके तर्क पर असहमति जताते हुए टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा नियंत्रण लोक कल्याण के लिए है और न कि उनके लिए जो शराब के व्यापार में हैं।
पीठ ने कहा नियंत्रण लोक कल्याण के लिए है न कि आपके कारोबार को चलाने के लिए। यह बड़े पैमाने पर जनता के लिए है। यह आपके व्यवसाय चलाने के लिए या आपको मुश्किल में डालने के लिए नहीं है।
दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि कुछ लोग नीति का लगातार विरोध कर रहे हैं और वे जल्द ही सरकार का पक्ष रखेंगे। नीति भ्रष्टाचार को कम करने व निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के लिए बनाई गई है।

पीठ नई आबकारी नीति को आशियान टावर्स एंड प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड और राजीव मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से दी गई चुनौती याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में आरोप लगाया है कि यह नीति अवैध, अनुचित, मनमानी और दिल्ली आबकारी कानून 2009 का उल्लंघन करती है।
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