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तनातनी: केंद्र सरकार ने लगाई दिल्ली की केजरीवाल सरकार की महत्वाकांक्षी 'घर-घर राशन योजना' पर रोक
Sat, 05 Jun 2021 09:36 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 05 Jun 2021 09:36 PM IST
सार
इस योजना के तहत दिल्ली में राशन को हर घर तक पहुंचाया जाना था। दिल्ली में केजरीवाल सरकार की इस योजना का 72 लाख लोगों को फायदा मिलता।
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त्रिलोकपुरी में राशन लेने के लिए लाइन में लगे लगो (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
विस्तार
घर-घर राशन पहुंचाने की दिल्ली सरकार की योजना खटाई में पड़ती दिखाई दे रही है। केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार की इस योजना पर ब्रेक लगा दिया है। यह योजना अगले हफ्ते ही शुरू होने वाली थी। दिल्ली सरकार की सभी तैयारियां धरी की धरी रह गई, क्योंकि सरकार इसे बड़े स्तर पर लांच करने वाली थी। इस योजना से दिल्ली सरकार 72 लाख लोगों के घर तक राशन पहुंचाती।
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दिल्ली सरकार की बहुप्रतिक्षित डोर स्टेप राशन डिलेवरी पर ग्रहण लग गया है। मार्च महीने में ही केद्र सरकार ने इस योजना पर आपत्ति दर्ज की थी। अब इसपर दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने पाबंदी लगा दी गई है। सूत्रों के अनुसार इस योजना के लिए दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार से अनुमति नहीं ली थी।
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इस वजह से इस योजना पर पाबंदी लगा दी गई है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस योजना के तहत 72 लाख लोगों के घर-घर राशन पहुंचाने वाले थे। इस योजना का नाम मुख्यमंत्री घर-घर राशन योजना रखा गया था।
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केद्र सरकार को इसी पर आपत्ति थी। तर्क यह था कि राशन वितरण राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत किया जाता है। ऐसे में इसमें किसी तरह का बदलाव कोई राज्य नहीं कर सकता। इस आपत्ति के बाद 25 मार्च को लांच होने वाली योजना टल गई थी।
केंद्र सरकार के मुख्यमंत्री योजना पर आपत्ति जताने पर इस योजना का नाम दिल्ली सरकार ने बदलकर घर-घर राशन योजना भी किया जो अगले सप्ताह लांच होने वाली थी। लेकिन नाम बदलने से भी यह योजना परवान नहीं चढ़ सकी।
निर्णय राजनीति से प्रेरित है- इमरान हुसैन
दिल्ली के खाद्य आपूर्ति मंत्री इमरान हुसैन ने कहा है कि निर्णय राजनीति से प्रेरित है। योजना को खारिज करते हुए उपराज्यपाल ने दो कारण बताए हैं। इसमें केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित नहीं है और कोर्ट में एक मामला चल रहा है। इन दोनों बिंदुओं की वैधता को खारिज करते हुए हुसैन ने कहा कि मौजूदा कानून के अनुसार ऐसी योजना शुरू करने के लिए किसी अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है। फिर भी हर स्तर पर केंद्र को अवगत किया गया। केंद्र से प्राप्त अंतिम पत्र के आधार पर आपत्तियों को भी दिल्ली मंत्रिमंडल ने स्वीकार कर लिया है।
कोर्ट केस के तर्क को खारिज करते हुए इमरान हुसैन ने कहा अदालत में चल रहे मामले के कारण इस क्रांतिकारी योजना के लागू होने से रोकना समझ से परे है। इस मामले पर पहले ही दो सुनवाई हो चुकी है। कोई स्टे आदेश नहीं दिया गया है। हलफनामे में भी केंद्र ने इस योजना को शुरू करने पर आपत्ति नहीं की है। उपराज्यपाल का योजना को रोलआउट करना राजनीति से प्रेरित है।
दिल्ली सरकार का तर्क
- केंद्र सरकार के सुझाव के आधार पर, दिल्ली कैबिनेट ने योजना से ‘मुख्यमंत्री घर-घर राशन योजना’ नाम को हटाने और मौजूदा एनएफएस अधिनियम, 2013 के हिस्से के रूप में राशन की डोरस्टेप डिलीवरी को लागू करने का निर्णय पास किया है, यह केंद्र सरकार की सभी आपत्तियों को दूर करता है।
-एलजी ने दो कारणों का हवाला देते हुए राशन की डोरस्टेप डिलीवरी के कार्यान्वयन की फाइल को खारिज कर दिया। इसमें पहला केंद्र ने अभी तक योजना को मंजूरी नहीं दी है और दूसरा कोर्ट में इसके खिलाफ एक केस चल रहा है
- योजना की जानकारी देने के लिए 2018 से अब तक दिल्ली सरकार द्वारा केंद्र सरकार को छह से अधिक पत्र लिखा गया है
-कोविड के समय में गरीबों के लिए वरदान साबित होती यह योजना।
-24 मई को एलजी को अंतिम स्वीकृति और योजना के तत्काल लागू के लिए फाइल भेजी थी।
कोर्ट केस के तर्क को खारिज करते हुए इमरान हुसैन ने कहा अदालत में चल रहे मामले के कारण इस क्रांतिकारी योजना के लागू होने से रोकना समझ से परे है। इस मामले पर पहले ही दो सुनवाई हो चुकी है। कोई स्टे आदेश नहीं दिया गया है। हलफनामे में भी केंद्र ने इस योजना को शुरू करने पर आपत्ति नहीं की है। उपराज्यपाल का योजना को रोलआउट करना राजनीति से प्रेरित है।
दिल्ली सरकार का तर्क
- केंद्र सरकार के सुझाव के आधार पर, दिल्ली कैबिनेट ने योजना से ‘मुख्यमंत्री घर-घर राशन योजना’ नाम को हटाने और मौजूदा एनएफएस अधिनियम, 2013 के हिस्से के रूप में राशन की डोरस्टेप डिलीवरी को लागू करने का निर्णय पास किया है, यह केंद्र सरकार की सभी आपत्तियों को दूर करता है।
-एलजी ने दो कारणों का हवाला देते हुए राशन की डोरस्टेप डिलीवरी के कार्यान्वयन की फाइल को खारिज कर दिया। इसमें पहला केंद्र ने अभी तक योजना को मंजूरी नहीं दी है और दूसरा कोर्ट में इसके खिलाफ एक केस चल रहा है
- योजना की जानकारी देने के लिए 2018 से अब तक दिल्ली सरकार द्वारा केंद्र सरकार को छह से अधिक पत्र लिखा गया है
-कोविड के समय में गरीबों के लिए वरदान साबित होती यह योजना।
-24 मई को एलजी को अंतिम स्वीकृति और योजना के तत्काल लागू के लिए फाइल भेजी थी।
क्या है घर-घर राशन योजना योजना
इस योजना के तहत प्रत्येक राशन लाभार्थी को 4 किलो गेहूं का आटा, 1 किलो चावल और चीनी घर पर प्राप्त होता। वर्तमान में 4 किलो गेहूं, 1 किलो चावल और चीनी उचित मूल्य की दुकानों से मिलता है। योजना के तहतगेहूं के स्थान पर गेहूं का आटा दिया जाता और चावल को साफ करके पैकेट में दिया जाता। राशन डीलन खराब गुणवत्ता वाला राशन नहीं देता। राशन की दुकानों के चक्कर नहीं लगाना पड़ता। केंद्र सरकार की ‘वन नेशन, वन कार्ड योजना’ को पूरा करती है यह योजना।