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Delhi: MCD ने लावारिश कुत्तों की नसबंदी और पुनर्वास के लिए बढ़ाया फोकस, सात माह में 55 हजार कुत्तों की नसबंदी
Fri, 22 May 2026 04:49 AM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Digvijay Singh
Updated Fri, 22 May 2026 04:49 AM IST
सार
अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट के लावारिश कुत्तों के प्रबंधन, सार्वजनिक सुरक्षा और रेबीज नियंत्रण को लेकर दिए गए निर्देशों के बाद एमसीडी ने बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू की है।
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लावारिश कुत्तों की भरमार
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट के लावारिश कुत्तों के प्रबंधन, सार्वजनिक सुरक्षा और रेबीज नियंत्रण को लेकर दिए गए निर्देशों के बाद एमसीडी ने बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू की है। एमसीडी की वर्ष 2025-26 की उपलब्धियों की रिपोर्ट के अनुसार एक सितंबर 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच 54,954 आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया गया।
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सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्थानीय निकायों को आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या, लोगों पर हमलों और रेबीज के खतरे को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद एमसीडी ने नसबंदी अभियान तेज करने के साथ-साथ फीडिंग प्वाइंट, पुनर्वास केंद्र और माइक्रो-चिपिंग जैसी योजनाओं पर काम शुरू किया। एमसीडी ने 250 वार्डों में 735 निर्धारित फीडिंग प्वाइंट चिन्हित किए हैं। उसका कहना है कि इससे सार्वजनिक स्थानों पर अनियंत्रित तरीके से कुत्तों को भोजन देने की समस्या कम हुई और कुत्तों की निगरानी भी आसान होने की संभावना हो गई है।
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रिपोर्ट के अनुसार, नजफगढ़ जोन के द्वारका सेक्टर-29 में लगभग 2.5 से 3 एकड़ जमीन पर आक्रामक और रेबीज संदिग्ध आवारा कुत्तों के लिए स्थायी पुनर्वास केंद्र विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र में करीब 1500 कुत्तों को रखा जा सकेगा। एमसीडी अधिकारियों के मुताबिक, परियोजना अगले पांच से छह महीनों में पूरी होने की संभावना है।
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एमसीडी के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच 1,20,264 कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया गया था। मार्च से जुलाई 2025 के बीच 42,761 कुत्तों का बंध्याकरण किया गया, जबकि एक सितंबर 2025 से 31 मार्च 2026 तक 54,954 आवारा कुत्तों की नसबंदी और एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन किया गया। अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2022 से 31 मार्च 2026 तक लाखों कुत्तों को एबीसी कार्यक्रम के तहत कवर किया जा चुका है और अब अभियान को तकनीकी निगरानी से जोड़ा जा रहा है।