सब्जी मंडी हादसा: घटना के वक्त मौजूद लोगों की जुबानी पूरी कहानी, उठा धूल का गुबार, लगा मानो धरती फटी और भूकंप आया
एक मिनट की भी दूरी होती तो बिल्डिंग के पिछले हिस्से में रहने वाला आर्यन मलबे की चपेट में आ जाता। लेकिन सोमवार को भाग्य ने उसका साथ दिया और आर्यन की जान बच गई। आर्यन इसके लिए खुद को खुशकिस्मत मानता है।
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अचानक एक तेज गड़गड़ाहट हुई, लगा मानो भूकंप आ गया। इसके बाद धूल का गुबार उठा। धूल कम हुई तो लोगों को पता चला कि वहां इमारत जमींदोज हो चुकी है। हादसे का पता चलते ही आसपास मौजूद लोग मदद को भागे। वहां खड़े लोगों ने इमारत के नीचे बच्चों और ई-रिक्शा को खड़े देखा था। लोगों को लगा कि बिल्डिंग में काम कर रहे मजदूर भी मलबे की चपेट में आ गए हैं। पुलिस व दमकल विभाग को सूचना देने के बाद पड़ोसी खुद ही मलबा हटाने में जुट गए। कुछ ही देर बाद मलबे से पान की दुकान चलाने वाले रामजी दास को निकाल लिया गया। उनके सिर में गंभीर चोट लगी थी। करीब 15 मिनट बाद पुलिस और धीरे-धीरे करके बचाव दल मौके पर पहुंच गया।
सब्जी मंडी के जिस इलाके में हादसा हुआ वहां हमेशा ही भीड़ रहती है। लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल होती है। ऐसे में राहत व बचाव कार्य के लिए पुलिस को खासी मशक्क्त करनी पड़ी। पहले सड़क पर खड़े वाहनों को हटवाया गया। इसके बाद वहां जेसीबी और एमसीडी के डंपर वहां पहुंचे। आबदा प्रबंधन की टीम भी खोजी कुत्तों व मशीनों के साथ मौके पर पहुंच गई। मशीनों से मलबे में किसी जीवित व्यक्ति का पता लगाने का प्रयास किया गया।
मौके पर भीड़ इतनी ज्यादा थी कि पुलिस के लिए उसको रोक पाना मुश्किल हो रहा था। कई थानों की पुलिस के अलावा सिविल डिफेंस को भी राहत व बचाव कार्य में लगाया गया। भजनपुरा से आए जितेंद्र ने बताया कि वह यहां किसी काम से आया था। अभी वह बिल्डिंग पारकर थोड़ा आगे ही बढ़ा था कि अचानक इमारत गिर गई। वह खुद मदद को भागा। पड़ोसियों का कहना है कि बिजली की दुकान चलाने वाले राजेंद्र अरोड़ा ने 20-25 दिनों पहले ही प्रॉपर्टी को खरीदकर वहां काम शुरू करवाया था।
एक मिनट की भी होती देरी को आर्यन भी बिल्डिंग की चपेट में आ जाता...
एक मिनट की भी दूरी होती तो बिल्डिंग के पिछले हिस्से में रहने वाला आर्यन मलबे की चपेट में आ जाता। लेकिन सोमवार को भाग्य ने उसका साथ दिया और आर्यन की जान बच गई। आर्यन इसके लिए खुद को खुशकिस्मत मानता है। आर्यन ने बताया कि लक्ष्मण प्रसाद के नाम से इस पूरी इमारत को जाना जाता है। इसमें पिछले हिस्से में उसका परिवार रहता है। जबकि आगे का हिस्सा रिश्तेदारों के पास था। कुछ दिनों पूर्व उसके रिश्तेदारों ने अगले हिस्से के ग्राउंड फ्लोर को राजेंद्र अरोड़ा नामक शख्स को बेच दिया था। पिछली इमारत और फ्रंट साइट की इमारत का फर्श का लेवल अलग-अलग था। इस वजह से राजेंद्र का बेटा मोहक अरोड़ा वहां खुदाई करवाकर उसे लेवल में करने का प्रयास किया जा रहा था।
आर्यन ने बताया कि लक्ष्मणा प्रसाद बिल्डिंग के अगले हिस्से में नीचे दुकानें बनी थी जबकि ऊपरी हिस्सा खंडर बना हुआ था। पिछले 40 गज के हिस्से में नीचे भी दुकानें बनी थी। पहली मंजिल पर आर्यन की दादी सत्या देवी रहती हैं। दूसरी मंजिल पर आर्यन के पिता अजय अनेजा, मां दीपिका अनेजा और भाई अभियव अनेजा रहता हैं। सोमवार को अजय का सेंट स्टीफन अस्पताल में ऑपरेशन चल रहा था। दीपिका अभियव वहीं पर थे। आर्यन घर पर था। पहली मंजिल पर रहने वाली उसकी दादी दूध लेने बाहर निकली थी। इस दौरान नीचे उतरकर आर्यैन काम बंद करवाने गया था। जैसे ही वह इमारत के अगले हिस्से से निकला, अचानक बिल्डिंग गिर गई। आर्यन का कहना है कि उसकी इमारत नहीं गिरी, लेकिन उसकी हालत भी जर्जर है।
स्थानीय लोगों का कहना लगातार हो रही बारिश से गिरी इमारत...
स्थानीय लोगों का कहना है कि मकान गिरने में एक बड़ा कारण लगातार हो रही बारिश है। पिछले कई दिनों से इलाके में बारिश हो रही है। ऐसे में कमजोर मकानों के गिरने का खतरा बना रहता है। सोमवार को हुआ हादसा इसका ही नतीजा था। बारिश की वजह से मकान गिर गया। अब लोगों को बाकी जर्जर मकानों की चिंता सता रही है।