{"_id":"645849e70acc6c8ed50be293","slug":"liquor-policy-case-aap-bjp-tussle-over-bail-order-2023-05-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Liquor Policy Case : जमानत आदेश पर आप-भाजपा में घमासान, भाजपा बोली- आदेश की गलत व्याख्या","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Liquor Policy Case : जमानत आदेश पर आप-भाजपा में घमासान, भाजपा बोली- आदेश की गलत व्याख्या
Mon, 08 May 2023 06:31 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 08 May 2023 06:31 AM IST
सार
आप ने राउज एवेन्यू कोर्ट के आदेश को भाजपा और सीबीआई-ईडी के गठजोड़ के लिए झटका बताया।
विज्ञापन
aap and bjp
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
शराब घोटाले में दो आरोपियों की जमानत आदेश को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं। आप ने राउज एवेन्यू कोर्ट के आदेश को भाजपा और सीबीआई-ईडी के गठजोड़ के लिए झटका बताया। दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी ने कहा, साफ हो गया है कि दिल्ली में कोई शराब घोटाला नहीं हुआ, न सीबीआई-ईडी के पास कोई सबूत है।
विज्ञापन
आतिशी ने मंत्री सौरभ भारद्वाज व प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, राजेश जोशी और गौतम मल्होत्रा को कोर्ट ने जमानत दे दी है। कोर्ट ने घोटाले के आरोप को मनगढ़ंत बताया है। ईडी ने चार्जशीट में सिर्फ 30 करोड़ रुपये की घूस की बात कही है। आदेश से साफ है कि सीबीआई-ईडी के पास एक रुपये के भ्रष्टाचार का सबूत नहीं है।
विज्ञापन
गलत तरह से पेश कर रहे आदेश चले अवमानना का केस : लेखी
आप के दावे पर पलटवार करते हुए भाजपा ने कोर्ट के जमानत आदेश को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया। साथ ही, आप नेताओं के खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला चलाने की मांग की। केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने कहा, दिल्ली की आप सरकार घोटालों से भरी है। आप नेता कोर्ट के जमानत आदेश पर झूठ फैलाकर गुमराह कर रहे हैं।
विज्ञापन
जमानत आदेश को ऐसे पेश कर रहे हैं, जैसे कोर्ट ने फैसला ही सुना दिया है। लेखी ने कहा, दोनों आरोपियों में से किसी को भी आरोपमुक्त या बरी नहीं किया है। आप नेताओं ने कोर्ट के आदेश के एक हिस्से को पढ़ा है। उस हिस्से का जिक्र ही नहीं किया है, जिसमें कोर्ट ने साफ किया है कि उसकी टिप्पणी का मामले की योग्यता से कुछ लेनादेना नहीं है।