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महिला सुरक्षा पर एलजी से मांगा जवाब

Thu, 22 Dec 2016 09:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 22 Dec 2016 09:39 AM IST
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LG seeks answers on safety of women
दिल्ली उच्च न्यायालय - फोटो : Google

हाईकोर्ट ने राजधानी में महिला सुरक्षा को लेकर ठोस कदम न उठाने के मुद्दे पर उपराज्यपाल से कई सवालों का जवाब तलब किया है। अदालत ने कहा कि क्या राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा के लिए स्पेशल टास्क फोर्स है। अगर नहीं तो क्यों नहीं और यह कब तक काम करने लगेगी। इतना ही नहीं दिल्ली पुलिस ने भी वर्तमान परिस्थितियों में अलग से महिला पीसीआर चलाने में असमर्थता जता दी।

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न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने उपराज्यपाल कार्यालय को शपथपत्र सहित उठाए गए सवालों का जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। दरअसल दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाती मालीवाल ने महिला सुरक्षा को लेकर उपराज्यपाल पर कुछ भी न करने का आरोप लगाया है।
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हाईकोर्ट ने हाल ही में महिला आयोग को मामले में पक्ष बनाया था। बुधवार को मालीवाल ने अदालत में कहा कि उपराज्यपाल ने महिला सुरक्षा को लेकर पिछले एक साल से कोई बैठक नहीं की है। उन्होंने आशंका जताई कि राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अब तक कोई टास्क फोर्स काम नहीं कर रही। उन्होंने कहा 16 दिसंबर 2012 वसंत विहार गैंगरेप कांड के बाद 2013 में इसकी स्थापना हुई थी। 
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आयोग ने हस्तक्षेप याचिका दायर कर कहा था कि वह राजधानी की बसों व बस स्टैंड पर सीसीटीवी लगवाने, महिलाओं के असुरक्षित जगहों को चिह्नित करने आदि मुद्दों पर अपना पक्ष रखना चाहते हैं। 
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कहा कि वर्तमान में महिलाओं की सुरक्षा के लिए अलग से महिला पीसीआर नहीं चलाई जा सकती। पुलिस के अधिवक्ता ने कहा उसके पास महिला ड्राइवरों की कमी है और उसके बिना महिला पीसीआर चलाना संभव नहीं है।

अदालत ने केंद्र सरकार से जघन्य अपराधों में महिलाओं को मुआवजा देने के लिए मुआवजा संबंधी योजना दो सप्ताह में अधिसूचित करने को कहा है। वहीं, पुलिसकर्मियों की संख्या अब तक न बढ़ाने पर अदालत ने नाराजगी जाहिर की। अदालत ने गृहमंत्रालय से कहा कि वह मामले की अगली सुनवाई 25 जनवरी 2017 को पुलिस बल बढ़ाने के मुद्दे पर अपनी स्टेटस रिपोर्ट दायर करें। 


पेश मामले में 16 दिसंबर 2012 सामूहिक दुष्कर्म कांड के बाद हाईकोर्ट ने महिला सुरक्षा के मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लिया था। अदालत इसी जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

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