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युवती की संदिग्ध हालात में मौत मामले में पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन
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नई दिल्ली। जंतर मंतर पर मंगलवार को जेएनयू और दिल्ली विश्वविद्यालय के वामपंथी छात्रों व महिला संगठनों ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन किया। विजयनगर गुड़ मंडी में हाल ही में हुई एक युवती की संदिग्ध हालात में मौत मामले में सभी न्याय की मांग कर रहे थे। आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने हाथरस मामले की तरह इस मामले में भी मृतक युवती के परिजनों की एफआईआर दर्ज नहीं की बल्कि मॉडल टाउन स्टेशन की पुलिस ने परिजनों के साथ अभद्रता और मारपीट की।
आइसा के दिल्ली राज्य सचिव प्रसेनजित ने बताया कि 4 अक्तूबर को विजय नगर गुड़ मंडी में एक संभ्रांत परिवार के यहां काम करने वाली दलित समाज की युवती नीतू का शव संदिग्ध हालत में पाया जाता है। नीतू के परिजनों के मुताबिक शव को देखकर उन्हें अपनी बच्ची के साथ किसी अनहोनी की आशंका होती है। इसके बाद परिजन मॉडल टाउन थाने में नीतू की मौत की तहरीर देने जाते हैं। लेकिन पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला बताकर शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद शव को जला दिया।
जेएनयू की छात्रा दोलन ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने भी वही किया जो कि हाथरस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने किया था। इससे पता चलता है कि पूरे देश में पुलिस एक जैसे ही काम करती है। जिसका काम केवल दलितों व वंचितों के खिलाफ काम करना है। इसलिए वामपंथी छात्र संगठन आइसा के अलावा केवाईएस और सीएसडब्ल्यू मृतक युवती के परिजनों के पक्ष में न्याय की मांग करते हुए जंतर मंतर पहुंचे हैं।
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मृतक युवती के परिजन भी जंतर मंतर पर पहुंचे थे। बातचीत के दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा राजवीर कौर ने बताया कि सोमवार को दिल्ली भवन पर भी उन लोगों ने प्रदर्शन किया था। उनकी मांग है कि इस पूरे मामले में दिल्ली पुलिस की संदिग्ध कार्यशैली की जांच होनी चाहिए। केंद्र सरकार से मांग है कि पूरे देश में वर्मा कमेटी की सिफारिशों को मजबूती के साथ लागू किया जाए ताकि महिलाओं को सुरक्षा मिले।
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आइसा के दिल्ली राज्य सचिव प्रसेनजित ने बताया कि 4 अक्तूबर को विजय नगर गुड़ मंडी में एक संभ्रांत परिवार के यहां काम करने वाली दलित समाज की युवती नीतू का शव संदिग्ध हालत में पाया जाता है। नीतू के परिजनों के मुताबिक शव को देखकर उन्हें अपनी बच्ची के साथ किसी अनहोनी की आशंका होती है। इसके बाद परिजन मॉडल टाउन थाने में नीतू की मौत की तहरीर देने जाते हैं। लेकिन पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला बताकर शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद शव को जला दिया।
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जेएनयू की छात्रा दोलन ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने भी वही किया जो कि हाथरस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने किया था। इससे पता चलता है कि पूरे देश में पुलिस एक जैसे ही काम करती है। जिसका काम केवल दलितों व वंचितों के खिलाफ काम करना है। इसलिए वामपंथी छात्र संगठन आइसा के अलावा केवाईएस और सीएसडब्ल्यू मृतक युवती के परिजनों के पक्ष में न्याय की मांग करते हुए जंतर मंतर पहुंचे हैं।
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मृतक युवती के परिजन भी जंतर मंतर पर पहुंचे थे। बातचीत के दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा राजवीर कौर ने बताया कि सोमवार को दिल्ली भवन पर भी उन लोगों ने प्रदर्शन किया था। उनकी मांग है कि इस पूरे मामले में दिल्ली पुलिस की संदिग्ध कार्यशैली की जांच होनी चाहिए। केंद्र सरकार से मांग है कि पूरे देश में वर्मा कमेटी की सिफारिशों को मजबूती के साथ लागू किया जाए ताकि महिलाओं को सुरक्षा मिले।