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जेएनयू : केंद्रीय पुस्तकालय में जबरन घुसकर की पढ़ाई

Thu, 11 Mar 2021 01:50 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 11 Mar 2021 01:50 AM IST
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JNU: Forced entry into the Central Library
नई दिल्ली। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) कैंपस में बुधवार को एक साल बाद फिर माहौल गरमा गया। वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े विद्यार्थी जबरन केंद्रीय पुस्तकालय में घुस गए। पिछले साल 6 जनवरी को छात्रों द्वारा सर्वर रूम में तोड़फोड़ के बाद से यह केंद्रीय पुस्तकालय बंद था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे दोबारा खोलने की कोई अनुमति नहीं दी है। सुरक्षाकर्मियों से तकरार के बाद शाम तक छात्रों ने पुस्तकालय खाली कर दिया।
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जेएनयू छात्रसंघ महासचिव सतीश चंद्र यादव के मुताबिक, वैश्विक महामारी कोरोना के चलते पिछले एक साल से जेएनयू बंद होने के कारण कैंपस में प्रशासन और छात्रों के बीच कोई विवाद नहीं हुआ था। कोरोना से बचाव के तहत विवि प्रशासन ने फरवरी में अपनी अधिसूचना में पुस्तकालय की चुनिंदा सुविधाएं ही शुरू करने की घोषणा की। इसमें छात्रों को किताब आवंटित कराने और जमा कराने की सुविधा देना शामिल था। इसके बाद भी छात्रों को कोई सुविधा नहीं मिल रही है।
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उन्होंने कहा कि छात्रों ने केंद्रीय पुस्तकालय में जबरन प्रवेश नहीं किया है। छात्रों को कैंपस में रहने के बाद भी पुस्तकालय का लाभ नहीं मिल रहा है। वे लंबे समय से पुस्तकालय खोलने की मांग कर थे। छात्रों ने केंद्रीय पुस्तकालय में दाखिल होने से पहले उसे खोलने की मांग रखी थी, पर कोई सुनवाई नहीं हुई। इसी कारण छात्रों ने पुस्तकालय में प्रवेश कर पढ़ाई शुरू कर दी। पुस्तकालय प्रशासन छात्रों से विवि पहचान पत्र के पीछे एक स्टीकर की मांग कर रहा था, जो गलत है। दरअसल कोविड- 19 के चलते पिछले एक साल से शैक्षणिक बंदी के बीच सारा काम ऑनलाइन ही हुआ है।
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उधर, जेएनयू के एबीवीपी अध्यक्ष शिवम चौरसिया का कहना है कि एबीवीपी ने विश्वविद्यालय प्रशासन और केंद्रीय पुस्तकालय प्रमुख से पुस्तकालय खोलने की मांग रखी थी। इसके बाद उन्होंने आश्वासन दिया था कि 15 मार्च तक केंद्रीय पुस्तकालय कोविड-19 बचाव के दिशा-निर्देशों के तहत खोल दिया जाएगा। इसमें 100 छात्रों के बैठकर पढ़ाई करने की सुविधा होगी तो अब 50 ही जा पाएंगे। इनमें भी एमफिल और पीएचडी छात्रों को पहले मौका दिया जाएगा। इसके बाद अंतिम वर्ष वाले छात्रों को प्राथमिकता मिलेगी।
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