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दिल्ली : कोरोना रिपोर्ट आने में चार से पांच दिन का लग रहा है समय, लक्षण दिखते ही हो जाएं आइसोलेट न करें इंतजार
Fri, 23 Apr 2021 09:15 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 23 Apr 2021 09:15 AM IST
सार
रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि होने पर ही लोग कोविड का इलाज करा रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय अगर किसी को कोरोना के सभी लक्षण दिख रहे हैं
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजधानी में कोरोना संक्रमितों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ रही है। पिछले कई दिनों से गंभीर मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि लोग कोरोना जांच कराने के बाद रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि होने पर ही लोग कोविड का इलाज करा रहे हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय अगर किसी को कोरोना के सभी लक्षण दिख रहे हैं तो कोविड रिपोर्ट का इंतजार किए बिना ही सबसे पहले खुद को आइसोलेट करना चाहिए।
दिल्ली के अस्पतालों में कई ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं। जिनमें शुरू में ही कोरोना के लक्षण दिखने लगे थे, लेकिन ये लोग जांच कराने के बाद रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। रिपोर्ट आने में इस समय चार से पांच दिनों तक का समय लग रहा है। इस अवधि में मरीज कोविड प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहा है।
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जब तक जांच का पता चलता है, मरीज की तबीयत खराब होने लगती है और वह गंभीर हालत में अस्पतालों का रुख करतें हैं। उधर, कई मामले ऐसे भी आ रहे हैं जहां कोरोना जांच कराने के बाद लोग बेफिक्र होकर घूम रहे हैं। वह अन्य लोगों से मिल भी रहे हैं। जब रिपोर्ट आती है तो पता चलता है कि व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव हैं और उसके संपर्क में आने वाले भी संक्रमित हो गए हैं।
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हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय अगर किसी को कोरोना के सभी लक्षण दिख रहे हैं तो कोविड रिपोर्ट का इंतजार किए बिना ही सबसे पहले खुद को आइसोलेट करना चाहिए।
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दिल्ली के अस्पतालों में कई ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं। जिनमें शुरू में ही कोरोना के लक्षण दिखने लगे थे, लेकिन ये लोग जांच कराने के बाद रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। रिपोर्ट आने में इस समय चार से पांच दिनों तक का समय लग रहा है। इस अवधि में मरीज कोविड प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहा है।
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जब तक जांच का पता चलता है, मरीज की तबीयत खराब होने लगती है और वह गंभीर हालत में अस्पतालों का रुख करतें हैं। उधर, कई मामले ऐसे भी आ रहे हैं जहां कोरोना जांच कराने के बाद लोग बेफिक्र होकर घूम रहे हैं। वह अन्य लोगों से मिल भी रहे हैं। जब रिपोर्ट आती है तो पता चलता है कि व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव हैं और उसके संपर्क में आने वाले भी संक्रमित हो गए हैं।
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सर गंगाराम अस्पताल के मेडिसन विभाग के डॉक्टर अतुल बताते हैं कि जिन लोगों को कोविड के लक्षण हैं और उनकी रिपोर्ट आने में समय लग रहा है या किसी कारण जांच नहीं हो पा रही है तो ऐसे मरीजों को तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अगर हल्के लक्षण हैं तो उन्हें घर पर ही अलग कमरे में आइसोलेट हो जाना चाहिए।
इस दौरान हर छह घंटे में ऑक्सीप्लस मीटर की सहायता से शरीर का ऑक्सीजन मापना चाहिए। यह 94 के स्तर से नीचे जा रहा है तो तुरंत अस्पताल में भर्ती हो जाना चाहिए। भर्ती होने में कहीं बेड की समस्या आ रही है तो घर पर ही ऑक्सजीन सिलिंडर लाकर इलाज शुरू कर देना चाहिए। अपोलो अस्पताल के डॉक्टर प्रवीण कुमार का कहना है कि इस समय अधिकतर लोग सामान्य खांसी, जुकाम में भी कोविड जांच करा रहे हैं।
इस कारण निजी और सरकारी लैब पर काफी दबाव बढ़ गया है। रिपोर्ट आने के लिए कहीं स्लोट नहीं मिल रहा तो कहीं चार से पांच दिन का समय लग रहा है। इसलिए जरूरी है कि अगर कोविड का कोई भी लक्षण महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर इलाज शुरू कर देना चाहिए। अगर रिपोर्ट निगेटिव आती है और लक्षण फिर भी बने हुए हैं तो भी कुछ समय के लिए आइसोलेशन में रहना जरूरी है।
ये लक्षण दिखने पर तुरंत हो जाए आइसोलेट
-तेज बुखार
-लगातार खांसी,
-मुंह का स्वाद और सूंघने की शक्ति खत्म होना
-सांस लेने में तकलीफ
-थकावट
-सिरदर्द,
-गले में खराश
-उल्टी, दस्त
इस दौरान हर छह घंटे में ऑक्सीप्लस मीटर की सहायता से शरीर का ऑक्सीजन मापना चाहिए। यह 94 के स्तर से नीचे जा रहा है तो तुरंत अस्पताल में भर्ती हो जाना चाहिए। भर्ती होने में कहीं बेड की समस्या आ रही है तो घर पर ही ऑक्सजीन सिलिंडर लाकर इलाज शुरू कर देना चाहिए। अपोलो अस्पताल के डॉक्टर प्रवीण कुमार का कहना है कि इस समय अधिकतर लोग सामान्य खांसी, जुकाम में भी कोविड जांच करा रहे हैं।
इस कारण निजी और सरकारी लैब पर काफी दबाव बढ़ गया है। रिपोर्ट आने के लिए कहीं स्लोट नहीं मिल रहा तो कहीं चार से पांच दिन का समय लग रहा है। इसलिए जरूरी है कि अगर कोविड का कोई भी लक्षण महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर इलाज शुरू कर देना चाहिए। अगर रिपोर्ट निगेटिव आती है और लक्षण फिर भी बने हुए हैं तो भी कुछ समय के लिए आइसोलेशन में रहना जरूरी है।
ये लक्षण दिखने पर तुरंत हो जाए आइसोलेट
-तेज बुखार
-लगातार खांसी,
-मुंह का स्वाद और सूंघने की शक्ति खत्म होना
-सांस लेने में तकलीफ
-थकावट
-सिरदर्द,
-गले में खराश
-उल्टी, दस्त