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हाईकोर्ट से किया साफ : सरकारी घर है तो सास-ससुर का मकान महिला का साझा आवास नहीं

Sun, 23 May 2021 05:21 AM IST
दुष्यंत शर्मा विजय सिंघल, नई दिल्ली
विजय सिंघल, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 23 May 2021 05:21 AM IST
सार

  • वैवाहिक विवाद के चलते बहु ने मकान बेचने के सास के निर्णय को दी थी चुनौती
  • अदालत ने उठाया सवाल कि क्या वृद्ध माता-पिता अपनी संपत्ति को अपनी पसंद से बेचने के हकदार हैं या नहीं

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If there is a government house, then the mother-in-law's house is not a woman's shared house
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि यदि कोई महिला अपने पति को मिले सरकारी आवास में रहती है तो वह वैवाहिक विवाद मामले में अपने सास-ससुर के मकान में साझा घर के दावे के साथ रहने का अधिकार नहीं मांग सकती। हाईकोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में सास को मकान बेचने के रोकने संबंधी बहू के तर्क को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। 

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बहू ने तर्क रखा था कि उसे इस मकान में रहने का हक है। वहीं अदालत ने कहा कि याची बहू हमेशा इंडियन एयर फोर्स में कार्यरत्त पति के साथ ही उसे मिले अलग-अलग स्थानों पर र्क्वाटर में रही है। वह अपने सास-ससुर में साथ नियमित रूप से या लंबे अरसे तक उनके इस मकान में रही है। ऐसे में उसका इस मकान को साझा मकान का दावा करते हुए रहने का अधिकार नहीं बनता।
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न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बहू-बेटे के विवाद में बुजुर्ग माता-पिता को शांति से अपने मकान में रहने का हक है। उन्होंने बहू की निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर याचिका खारिज करते हुए कहा कि उन्हें निचली अदालत के 3 मई 21 के फैसले में कोई कोई अवैधता नजर नहीं आ रही। उन्होंने कहा अदालत के समक्ष विचारार्थ प्रासंगिक प्रश्न उत्पन्न होता है कि क्या वृद्ध माता-पिता जो अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर अपनी संपत्ति को अपनी पसंद से बेचने के हकदार है या नहीं। 
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क्या उन्हें ऐसी अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं। ऐसे में उनका तर्क है कि निचली अदालत का फैसला ठीक है। उन्होंने माना कि घरेलु हिंसा के मामलों में महिला को अपने ससुराल के घर में ही रहने का अधिकार मिला हुआ है लेकिन यह मामला अलग है याची कभी भी उनके साथ नहीं रही ऐसे में इसे साझा घर नहीं माना जा सकता।


दरअसल महिला का विवाह 12 दिसंबर 2013 को एयर फोर्स के अधिकारी के साथ हुआ था। दोनों हमेशा सेना की और से मिले र्क्वाटर में ही रहे और इसी औरान उनके बीच घरेलु विवाद हो गया। सास ने अपने पहाड़गंज स्थित फ्लैट का 18 फरवरी 21 में सौदा कर दिया जिसे बहु ने अदालत में चुनौती दी। मजिस्ट्रेट ने 15 मार्च को फ्लैट बेचने पर रोक लगा दी जिसे सैशन कोर्ट ने तीन मई को खारिज कर दिया।

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