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दिल्ली: हॉर्न-डीजे और फैक्टरियों से निकलने वाली आवाज कानों को कर रही खराब, डॉक्टरों ने शुरू किया चिकित्सीय अध्ययन
Thu, 03 Mar 2022 09:21 PM IST
सुशील कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: सुशील कुमार
Updated Thu, 03 Mar 2022 09:21 PM IST
सार
मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के डॉ. रवि मेहर का कहना है कि वह दिल्ली के गली-मोहल्लों, सड़कों, घरों आदि में हो रहा शोर-शराबा कैसे सुनने की क्षमता को प्रभावित या कम करता है, इस पर स्टडी चल रही है।
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विस्तार
शायद सुनकर थोड़ा यकीन न हो लेकिन यह सच है कि हॉर्न, डीजे और फैक्टरियों से निकलने वाली आवाज कानों को खराब कर रही है। जब भी कोई व्यक्ति अपने घर से बाहर निकलता है तो उसके कानों में तेज आवाजें आती हैं। शुरुआत में इसे लेकर कोई दिक्कत नहीं होती है, लेकिन एक लंबे समय बाद उन्हीं लोगों में श्रवण शक्ति कम होने लगती है। वैज्ञानिक तौर पर इसके सबूत जुटाने के लिए देश में पहली बार मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने चिकित्सीय अध्ययन भी शुरू कर दिया है।
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जानकारी के अनुसार, डॉक्टरों की एक टीम बीते काफी समय से हॉर्न, फैक्टरियों में मशीनों की आवाज, लाउड म्यूजिक, कंस्ट्रक्शन का शोर आदि को लेकर अध्ययन कर रही है। इसी साल पूरा होने वाले इस अध्ययन में अब तक के परिणाम काफी चिंताजनक भी मिले हैं। दिल्ली में हॉर्न और ईयरफोन की वजह से लोगों को सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव देखने को मिल रहा है।
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मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के डॉ. रवि मेहर का कहना है कि वह दिल्ली के गली-मोहल्लों, सड़कों, घरों आदि में हो रहा शोर-शराबा कैसे सुनने की क्षमता को प्रभावित या कम करता है, इस पर स्टडी चल रही है। मई तक इसके नतीजे आ जाएंगे। इस स्टडी में हॉर्न, डीजे, कंस्ट्रक्शन साइट पर शोर, अनाउंसमेंट आदि के शोर पर जांच की जा रही है कि यह कितने डेसिबल का है। इसके आसपास मौजूद व्यक्ति के कानों पर इसका कितना असर पड़ सकता है, कितनी देर व्यक्ति इसके आसपास रहे, तो क्या असर हो सकता है। इसमें बच्चों से लेकर बड़ों तक को शामिल किया जा रहा है।
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डॉ. रवि का कहना है कि सड़कों पर तो इतना शोर है ही, साथ ही जब आजकल यूथ बाहर निकलता है, तो उनके कान में ईयरफोन लगे रहते हैं। चूंकि बाहर इतना ज्यादा शोर है इसलिए गाने सुनने के लिए उन्हें आवाज और ज्यादा बढ़ानी पड़ती है जिसके वजह से लाजिमी है कि सुनने की क्षमता प्रभावित होती है। यदि कोई व्यक्ति 100 डेसिबल पर रोजाना दो घंटे गाने सुनता है और ऐसा लगातार एक महीने तक जारी रहता है, तो उसके सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। मेट्रो में अनाउंसमेंट वगैरह की वजह से शोर 70 से 80 डेसिबल तक पहुंच जाता है। ऐसे में जब ईयरफोन में गाने सुनने के लिए आवाज बढ़ाई जाती है, तो वह 100 से 110 डेसिबल तक पहुंच जाती है।