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Umar Khalid: हाईकोर्ट ने उमर खालिद के भाषण की भाषा को बताया गलत, आतंकवादी कृत्य की श्रेणी में रखने से किया इनकार
Tue, 31 May 2022 01:52 AM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Tue, 31 May 2022 01:52 AM IST
सार
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा उमर खालिद द्वारा महाराष्ट्र के अमरावती में दिए गए भाषण की सही नहीं थी, लेकिन इसे आतंकवादी कृत्य नहीं ठहराया जा सकता।
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delhi HC
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विस्तार
उच्च न्यायालय ने सोमवार को महाराष्ट्र के अमरावती में फरवरी 2020 में दंगों के पीछे कथित साजिश से संबंधित यूएपीए मामले में गिरफ्तार जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद द्वारा दिए गए भाषण का अवलोकन करते हुए इसे गलत भाषा वाला बताया। वहीं, अदालत ने कहा इसमें कहीं भी आतंकवादी कृत्य नहीं कहा जा सकता।
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न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने यह टिप्पणी खालिद की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की। खालिद ने मामले में उसकी जमानत अर्जी खारिज करने के निचली अदालत के 24 मार्च के आदेश को चुनौती दी है। पीठ ने कहा भाषण भाषा सही नहीं थी, लेकिन यह इसे आतंकवादी कृत्य नहीं बनाता है। हम इसे बहुत अच्छी तरह समझते हैं। यदि अभियोजन का मामला इस बात पर आधारित है कि भाषण कैसा है तो यह अपने आप में एक आक्रामक अपराध नहीं होगा।
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पीठ ने कहा कि भाषण आपत्तिजनक और अरुचिकर है और यह मानहानि पूर्ण हो सकता है लेकिन यह एक आतंकवादी गतिविधि के रूप में नहीं है। अदालत खालिद के वकील की दलीलों पर सुनवाई कर रही है जिसमें उन्होंने खालिद द्वारा 17 फरवरी, 2020 को अमरावती में दिए गए भाषण का जिक्र कर किया है। अदालत ने खालिद के वकील की दलीलों के लिए अब सुनवाई 4 जुलाई तय की है।
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खालिद के वकील ने पहले दलील दी थी कि वह एक संरक्षित गवाह के बयान के आधार पर पिछले दो साल से जेल में है, जिसकी कोई पुष्टि नहीं है। वकील ने तर्क दिया था कि नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ विरोध एक अन्यायपूर्ण कानून के खिलाफ था और यह किसी भी तरह से संप्रभु के खिलाफ नहीं था और पुलिस द्वारा उनके खिलाफ बताए गए कई कथित कृत्य या घटनाएं आतंक के रूप में योग्य भी नहीं थीं।
उच्च न्यायालय ने इससे पहले खालिद से 21 फरवरी, 2020 को अमरावती में अपने भाषण में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कुछ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करने के लिए पूछताछ की थी। खालिद को 13 सितंबर, 2020 को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह हिरासत में है। दिल्ली पुलिस ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा है कि खालिद द्वारा बनाई जाने वाली कहानियों को इस स्तर पर उनके बचाव के रूप में नहीं देखा जा सकता है और निचली अदालत ने उन्हें एक तर्कसंगत आदेश से रिहा करने से इनकार कर दिया, जिसमें कोई अवैधता नहीं है।