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सुदूर क्षेत्रों के लोग हमारे नागरिक हैं जिनकी बात सुनी जानी चाहिए : हाईकोर्ट

Thu, 25 Feb 2021 11:45 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 25 Feb 2021 11:45 PM IST
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high court says people from remote areas are our citizen they should be heard
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने कहा कि सुदूर क्षेत्रों के लोग हमारे नागरिक हैं जिनकी बात सुनी जानी चाहिए और यदि पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) के मसौदे को केवल अंग्रेजी एवं हिंदी में प्रकाशित किया जाता है तो वे इसे नहीं समझ पाएंगे। ऐसे में संविधान की आठवीं अनुसूची में वर्णित सभी 22 भाषाओं में अनुवाद कराने के उसके विचार को केंद्र सरकार को गलत तरीके से नहीं लेना चाहिए।
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मुख्य न्यायाधीश डी. एन. पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की विशेष पीठ ने पर्यावरण मंत्रालय से कहा अदालत के विचार को केंद्र सरकार द्वारा इतने आक्रामक रूप से नहीं लिया जाना चाहिए। पीठ ने मंत्रालय से कहा आप इसका इतना कड़ा विरोध क्यों कर रहे हैं। पीठ ने पूछा कि अगर अपने ही नागरिकों से सुझाव आमंत्रित किए जाते हैं तो सरकार को क्या समस्या है। इसमें हर किसी को शामिल किया जाना चाहिए।
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पीठ ने कहा कि सरकार के लिए मसौदा ईआईए को सभी भाषाओं में प्रकाशित कराना आसान होगा। अदालत ने अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा से कहा कि सुनवाई की अगली तारीख 26 मार्च पर आप संबंधित मंत्रालय से इस मुद्दे पर निर्देश लें कि मसौदा ईआईए बेहतर विचार-विमर्श प्रक्रिया के लिए क्या सभी 22 भाषाओं में अनुवाद किया जा सकता है या नहीं।
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सुनवाई के दौरान एएसजी शर्मा ने पीठ से कहा कि सभी 22 भाषाओं में अनुवाद करने में कई प्रशासनिक दिक्कतें होंगी और अनुवाद में मसौदा ईआईए की सभी वास्तविक विषय-वस्तु ठीक से नहीं आ पाएंगी। उन्होंने पीठ को आश्वस्त किया कि सरकार अदालत के विचार पर आक्रामक नहीं हो रही है।
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