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हाईकोर्ट ने अधिवक्ता की शिकायत पर मुकदमे का निर्देश देने से किया इनकार
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने अधिवक्ता एमडी आजम अंसारी की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने दूसरे पक्ष पर अश्लील शब्दों के प्रयोग, गैरकानूनी रूप से रोकने व मानहानि का मुकदमा दर्ज करने का आग्रह किया था। अदालत ने अधिवक्ता के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि वह यह साबित करने में असफल रहे हैं कि दूसरे पक्ष ने कोई अपराध किया है जिससे उनकी प्रतिष्ठा खराब हुई है।
न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने अपने फैसले में निचली अदालत के फैसले को उचित ठहराते हुए कहा कि अधिवक्ता ने अपनी पहली शिकायत में नहीं कहा था कि दूसरे पक्ष ने उनके प्रति आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करने के अलावा 30 मिनट तक गली में रास्ता रोके रखा व घर नहीं जाने दिया। अदालत ने कहा कि यह भी साबित नहीं हुआ कि उनके प्रति अश्लील शब्दों का प्रयोग हुआ।
अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों का हवाला देेते हुए कहा कि ऐसा कोई आधार नहीं है कि दूसरे पक्ष के लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए। ऐसे में वे याचिका खारिज करते हैं।
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याची ने तर्क रखा कि 24 दिसंबर 2020 को साहिल व रेहाना एक अन्य महिला गुलनाज के साथ उनके घर आए। वह हालांकि किसी भी मुवक्किल से घर पर नहीं मिलते लेकिन वे पहली बार आए थे इस कारण वे उनसे मिले। इसके बाद उन्होंने इन लोगों के वकील को पत्र लिखकर कहा कि वे अपने मुवक्किलों को उनके घर आने से रोकें।
इसके बाद 29 दिसंबर को वे पुन: उनके घर आए व उनके प्रति आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया व उसे बेईमान बताया। इस दौरान उनके पड़ोसियों सहित काफी लोग एकत्रित हो गए। पुलिस ने शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की। ऐसे में आरोपियों पर अश्लील शब्दों का प्रयोग करने, उन्हें जबरन रोकने व मानहानि का मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया जाए।
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न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने अपने फैसले में निचली अदालत के फैसले को उचित ठहराते हुए कहा कि अधिवक्ता ने अपनी पहली शिकायत में नहीं कहा था कि दूसरे पक्ष ने उनके प्रति आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करने के अलावा 30 मिनट तक गली में रास्ता रोके रखा व घर नहीं जाने दिया। अदालत ने कहा कि यह भी साबित नहीं हुआ कि उनके प्रति अश्लील शब्दों का प्रयोग हुआ।
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अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों का हवाला देेते हुए कहा कि ऐसा कोई आधार नहीं है कि दूसरे पक्ष के लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए। ऐसे में वे याचिका खारिज करते हैं।
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याची ने तर्क रखा कि 24 दिसंबर 2020 को साहिल व रेहाना एक अन्य महिला गुलनाज के साथ उनके घर आए। वह हालांकि किसी भी मुवक्किल से घर पर नहीं मिलते लेकिन वे पहली बार आए थे इस कारण वे उनसे मिले। इसके बाद उन्होंने इन लोगों के वकील को पत्र लिखकर कहा कि वे अपने मुवक्किलों को उनके घर आने से रोकें।
इसके बाद 29 दिसंबर को वे पुन: उनके घर आए व उनके प्रति आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया व उसे बेईमान बताया। इस दौरान उनके पड़ोसियों सहित काफी लोग एकत्रित हो गए। पुलिस ने शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की। ऐसे में आरोपियों पर अश्लील शब्दों का प्रयोग करने, उन्हें जबरन रोकने व मानहानि का मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया जाए।