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भाई-बहन की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड बनाने का निर्देश
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने मस्कुलर डिस्ट्रॉफी बीमारी से जूझ रहे दो भाई-बहनों की जांच के लिए दिल्ली सरकार को मेडिकल बोर्ड बनाने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति प्रतिभा मनिंदर सिंह ने दोनों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को निर्देश दिया कि मेडिकल बोर्ड की टीम को गंभीर बीमारी से जूझ रहे याचिकाकर्ता के घर पर भेजें और उसकी जांच रिपोर्ट 28 जनवरी तक पेश करें।
अधिवक्ता अशोक अग्रवाल के जरिये दायर याचिका में उन्होंने अपने इलाज व देखभाल करने के साथ साथ चलने फिरने में सहयोग करने वाले उपकरण, सहयोगी एवं रहने के लिए मकान दिलवाने का आग्रह किया है। बचपन में ही उनके पिता का देहांत हो गया था और उनकी मां घरों में काम करके उन दोनों को पाल रही है। वे अपना काम भी नहीं कर पाते और उनकी सहायता मां करती है।
ऐसे में केंद्र व दिल्ली सरकार को निर्देश दिया जाए कि उन दोनों भाई बहनों को उपयुक्त सहायता मुहैया कराए। उन्होंने कहा कि भाई बहन रोजालिनी परोदा एवं राकेश कुमार परोदा ग्रेजुएट हैं। बहन बायोलॉजी में ग्रेजुएट है, जबकि भाई फिजिक्स में ग्रेजुएट है, लेकिन वह इस लायक नहीं है कि चल फिर सकें और नौकरी करके अपनी आजीविका चला सकें।
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उन्होंने कहा हर काम में मां की सहायता की जरूरत है और वर्तमान में वह भी बुजुर्ग हो चुकी है। इसलिए सरकार को निर्देश दिया जाए कि उन लोगों की जीन थेरेपी या जो भी उपयुक्त इलाज हो, कराएं। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्हें केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री कोटे से 50 हजार रुपये और दिल्ली सरकार ने एक-एक लाख रुपये दिए गए थे जो अपर्याप्त है।
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अधिवक्ता अशोक अग्रवाल के जरिये दायर याचिका में उन्होंने अपने इलाज व देखभाल करने के साथ साथ चलने फिरने में सहयोग करने वाले उपकरण, सहयोगी एवं रहने के लिए मकान दिलवाने का आग्रह किया है। बचपन में ही उनके पिता का देहांत हो गया था और उनकी मां घरों में काम करके उन दोनों को पाल रही है। वे अपना काम भी नहीं कर पाते और उनकी सहायता मां करती है।
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ऐसे में केंद्र व दिल्ली सरकार को निर्देश दिया जाए कि उन दोनों भाई बहनों को उपयुक्त सहायता मुहैया कराए। उन्होंने कहा कि भाई बहन रोजालिनी परोदा एवं राकेश कुमार परोदा ग्रेजुएट हैं। बहन बायोलॉजी में ग्रेजुएट है, जबकि भाई फिजिक्स में ग्रेजुएट है, लेकिन वह इस लायक नहीं है कि चल फिर सकें और नौकरी करके अपनी आजीविका चला सकें।
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उन्होंने कहा हर काम में मां की सहायता की जरूरत है और वर्तमान में वह भी बुजुर्ग हो चुकी है। इसलिए सरकार को निर्देश दिया जाए कि उन लोगों की जीन थेरेपी या जो भी उपयुक्त इलाज हो, कराएं। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्हें केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री कोटे से 50 हजार रुपये और दिल्ली सरकार ने एक-एक लाख रुपये दिए गए थे जो अपर्याप्त है।