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न्नाव दुष्कर्म मामला: अतुल सेंगर को कैंसर का उचित उपचार मुहैया कराए जेल प्रशासन: हाईकोर्ट
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने उन्नाव दुष्कर्म मामले में मुख्य दोषी कुलदीप सिंह सेंगर के भाई अतुल सिंह सेंगर के मुंह के कैंसर इलाज करवाने के लिए तिहाड़ जेल अधिकारियों को निर्देश दिया है। अतुल दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में 10 साल की कैद काट रहा है। अतुल ने इलाज के लिए हाईकोर्ट से 8 सप्ताह की पैरोल की मांगी थी। याचिका में कहा गया था कि उसे कानपुर में एक सर्जरी करवानी है।
न्यायमूर्ति विभू बाखरू की एकल पीठ ने अतुल कुमार सेंगर याचिका का निपटारा करते हुए निर्देश दिया कि जेल अधिकारी डॉक्टरों की सलाह पर उसका उचित इलाज सुनिश्चित करेंगे। दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि जेल अधिकारी अतुल को उचित इलाज मुहैया कराएंगे। इसके बाद अतुल के वकील ने पैरोल के लिए जोर नहीं दिया।
हालांकि अदालत ने 13 अगस्त को कहा था कि वह कस्टडी पैरोल दे सकती है। पीठ ने उसके वकील से कहा था कि वह अपने मुवक्किल से पता करें कि वह दिल्ली के किस अस्पताल में इलाज करवाना चाहता है। वहीं, सीबीआई के वकील ने दलील दी थी कि अतुल की सेहत को देखते हुए उसे कस्टडी पैरोल दी जा सकती है, लेकिन उसे रिहा नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि वह एक प्रभावशाली व्यक्ति है।
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दुष्कर्म पीड़िता के पिता की 9 अप्रैल 2018 में हिरासत में मौत हो गई थी। दिल्ली की तीस हजारी जिला अदालत ने 13 मार्च 2020 को कुलदीप सिंह सेंगर, अतुल सेंगर और अन्य पांच लोगों को 10-10 साल की सजा सुनाई थी।
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न्यायमूर्ति विभू बाखरू की एकल पीठ ने अतुल कुमार सेंगर याचिका का निपटारा करते हुए निर्देश दिया कि जेल अधिकारी डॉक्टरों की सलाह पर उसका उचित इलाज सुनिश्चित करेंगे। दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि जेल अधिकारी अतुल को उचित इलाज मुहैया कराएंगे। इसके बाद अतुल के वकील ने पैरोल के लिए जोर नहीं दिया।
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हालांकि अदालत ने 13 अगस्त को कहा था कि वह कस्टडी पैरोल दे सकती है। पीठ ने उसके वकील से कहा था कि वह अपने मुवक्किल से पता करें कि वह दिल्ली के किस अस्पताल में इलाज करवाना चाहता है। वहीं, सीबीआई के वकील ने दलील दी थी कि अतुल की सेहत को देखते हुए उसे कस्टडी पैरोल दी जा सकती है, लेकिन उसे रिहा नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि वह एक प्रभावशाली व्यक्ति है।
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दुष्कर्म पीड़िता के पिता की 9 अप्रैल 2018 में हिरासत में मौत हो गई थी। दिल्ली की तीस हजारी जिला अदालत ने 13 मार्च 2020 को कुलदीप सिंह सेंगर, अतुल सेंगर और अन्य पांच लोगों को 10-10 साल की सजा सुनाई थी।