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राजद सांसद अमरेंद्र धारी सिंह की घर में नजरबंदी के आग्रह पर विचार का निर्देश
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नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने राजद सांसद अमरेंद्र धारी सिंह की उस याचिका पर सुनवाई करने का निर्णय किया है जिसमें उनकी सेहत के आधार पर जेल की अपेक्षा घर पर नजरबंदी की मांग की गई है। अदालत ने सर गंगा राम अस्पताल को मेडिकल बोर्ड गठित कर याची की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति पर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट के आधार पर ही कोई निर्णय किया जाएगा।
राजद सांसद अमरेंद्र धारी सिंह को इस महीने की शुरुआत में प्रवर्तन निदेशालय ने विदेशों से उर्वरकों के आयात में भ्रष्टाचार के आरोपों से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया था। 23 जून को निचली अदालत ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था। वहीं, घर में नजरबंदी संबंधी उनके आवेदन को खारिज कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था।
न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वह विशेषज्ञ डॉक्टरों को मिलाकर मेडिकल बोर्ड गठित करने के अनुरोध के साथ सर गंगा राम अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक से संपर्क करें। अदालत ने मेडिकल बोर्ड से कहा है कि वह याचिकाकर्ता सिंह की जांच और समीक्षा करे। अदालत ने कहा कि बोर्ड याची के सभी प्रकार की जांच कर वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति पर स्वतंत्र रिपोर्ट दे।
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याची की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल ने अदालत को बताया कि उनके 62 वर्षीय मुवक्किल बिहार से राज्यसभा के मौजूदा सदस्य हैं और स्वास्थ्य की अपनी अनिश्चित स्थिति के कारण कोरोना वायरस से बेहद असुरक्षित हैं। उन्होंने कहा सिंह को 2002 से लिम्फेटिक कैंसर हुआ था और वे न्यूयॉर्क से इलाज करा रहे हैं।
इसके अलावा उनके मेडिकल रिकॉर्ड के मुताबिक वह उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी अन्य बीमारियों से भी ग्रस्त हैं। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के ‘गौतम नवलखा बनाम राष्ट्रीय जांच एजेंसी’ फैसले का हवाला देते हुए आग्रह किया कि उनके मुवक्किल को जेल की अपेक्षा घर में नजरबंद करने का आदेश दिया जाए। सर्वोच्च न्यायालय ने फैसले में कहा है कि उचित मामलों में घर में नजरबंदी का आदेश दिया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि घर में नजरबंद होने के बाद भी सिंह अदालत की हिरासत में होंगे और इसलिए उनकी चिकित्सा देखभाल के लिए राज्य जिम्मेदार होगा। उन्होंने कहा कि यदि याचिकाकर्ता घर में नजरबंद रहता है तो आपात स्थिति में उन्हें 60 मिनट के भीतर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में लाया जा सकता है लेकिन जेल से ऐसा करना संभव नहीं होगा।
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राजद सांसद अमरेंद्र धारी सिंह को इस महीने की शुरुआत में प्रवर्तन निदेशालय ने विदेशों से उर्वरकों के आयात में भ्रष्टाचार के आरोपों से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया था। 23 जून को निचली अदालत ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था। वहीं, घर में नजरबंदी संबंधी उनके आवेदन को खारिज कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था।
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न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वह विशेषज्ञ डॉक्टरों को मिलाकर मेडिकल बोर्ड गठित करने के अनुरोध के साथ सर गंगा राम अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक से संपर्क करें। अदालत ने मेडिकल बोर्ड से कहा है कि वह याचिकाकर्ता सिंह की जांच और समीक्षा करे। अदालत ने कहा कि बोर्ड याची के सभी प्रकार की जांच कर वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति पर स्वतंत्र रिपोर्ट दे।
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याची की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल ने अदालत को बताया कि उनके 62 वर्षीय मुवक्किल बिहार से राज्यसभा के मौजूदा सदस्य हैं और स्वास्थ्य की अपनी अनिश्चित स्थिति के कारण कोरोना वायरस से बेहद असुरक्षित हैं। उन्होंने कहा सिंह को 2002 से लिम्फेटिक कैंसर हुआ था और वे न्यूयॉर्क से इलाज करा रहे हैं।
इसके अलावा उनके मेडिकल रिकॉर्ड के मुताबिक वह उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी अन्य बीमारियों से भी ग्रस्त हैं। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के ‘गौतम नवलखा बनाम राष्ट्रीय जांच एजेंसी’ फैसले का हवाला देते हुए आग्रह किया कि उनके मुवक्किल को जेल की अपेक्षा घर में नजरबंद करने का आदेश दिया जाए। सर्वोच्च न्यायालय ने फैसले में कहा है कि उचित मामलों में घर में नजरबंदी का आदेश दिया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि घर में नजरबंद होने के बाद भी सिंह अदालत की हिरासत में होंगे और इसलिए उनकी चिकित्सा देखभाल के लिए राज्य जिम्मेदार होगा। उन्होंने कहा कि यदि याचिकाकर्ता घर में नजरबंद रहता है तो आपात स्थिति में उन्हें 60 मिनट के भीतर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में लाया जा सकता है लेकिन जेल से ऐसा करना संभव नहीं होगा।