दिल्ली: सीजेपी नेता आशुतोष रांका और सौरव दास को बड़ी राहत, कोर्ट ने दी जमानत; सात दिन बाद जेल से आएंगे बाहर
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को आज एसईएम कोर्ट से बड़ी राहत मिली। सीजेपी के दोनों नेताओं को कोर्ट ने जमानत दे दी है।
विस्तार
दिल्ली एसईएम कोर्ट ने सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत पर अपना आदेश सुरक्षित रखा। जिसके बाद कोर्ट ने दोनों नेताओं को जमानत दे दी है। दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका की न्यायिक हिरासत तीन दिन बढ़ाने की मांग की थी। दोनों को बुधवार को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) के समक्ष पेश किया गया था।
Delhi: The SEM Court has ordered the release of CJP leaders Saurav Das and Ashutosh Ranka. They were produced before the SEM Court after 2 days of judicial custody. https://t.co/jEakL8FlOe
— ANI (@ANI) October 21, 2026विज्ञापन
दो दिन पहले सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई थी। सोमवार को दोनों को मंदिर मार्ग थाने में नवनियुक्त विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। पुलिस ने उनकी हिरासत बढ़ाने की मांग की, जिस पर मजिस्ट्रेट ने दोनों को दो दिन और जेल में रखने का आदेश दिया।
जंतर-मंतर पर अवैध प्रवेश पर पुलिस ने गिरफ्तार किया
दोनों नेता जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के मामले में हिरासत में हैं। आरोप है कि प्रतिबंध लागू होने के बावजूद वे बंद गेट पार कर जंतर-मंतर परिसर में दाखिल हुए थे। वहां सीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ उन्होंने तिरंगा लहराया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया था। 13 अक्तूबर को उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
पांच दिन की न्यायिक हिरासत में कोर्ट ने भेजा
जानकारी के अनुसार, सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (एसईएम) अदालत ने पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजते हुए तिहाड़ जेल भेजने के आदेश दिए हैं। इन दोनों नेताओं पर पहले से तय बेल बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। वहीं दूसरी ओर, इसी मामले में शामिल तीसरे नेता अजिंक्य शिंदे को राहत देते हुए अदालत ने उनसे नया बेल बॉन्ड भरवाकर प्रक्रिया पूरी की है।
तिरंगा लेकर जंतर-मंतर पहुंचे थे प्रदर्शनकारी
जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद भी सीजेपी के नेताओं ने वहां विरोध प्रदर्शन किया। रांका, दास और पार्टी के अन्य कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पार कर अंदर पहुंचे और तिरंगा लहराते हुए नारेबाजी की। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। पुलिस की कार्रवाई ऐसे समय हुई, जब सीजेपी और विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग का विरोध कर रहे हैं।
अभिजीत दिपके ने पुलिस के एक्शन पर उठाए थे सवाल
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपने नेताओं के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या अब राष्ट्रीय ध्वज फहराना भी गैरकानूनी हो गया है? उन्होंने कहा कि आशु और सौरव को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। उनकी गलती? जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना। थोड़ी हिम्मत दिखाइए, नरेंद्र मोदी। अगर आप विरोध की आवाज को दबाने के लिए इतने ही पक्के इरादे वाले हैं, तो इन कायरतापूर्ण तरीकों की आड़ लेने के बजाय आधिकारिक तौर पर आपातकाल घोषित करने की हिम्मत दिखाइए।
तिरंगा लहराने पर जेल भेजा: अजिंक्य शिंदे
सीजेपी नेता अजिंक्य शिंदे ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराने और 'भारत माता की जय' के नारे लगाने के कारण अशुतोष रांका और सौरव दास को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि आज अशुतोष का जन्मदिन है और इसी दिन उन्हें जेल भेजा गया। शिंदे ने मोदी-शाह सरकार पर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जेल भेजकर नेताओं को डराने की कोशिश सफल नहीं होगी और वे सिर ऊंचा करके जेल जा रहे हैं।
क्यों हो रहा है विरोध?
सीजेपी और विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इसी को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। चुनाव आयोग ने पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि जिन मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटे हैं, वे दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। सीजेपी की मांग है कि एसआईआर से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय हो और मुख्य चुनाव आयुक्त अपने पद से इस्तीफा दें।
पहले भी हिरासत में लिए गए थे सीजेपी नेता
इससे पहले 10 अक्तूबर को भी सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को पुलिस ने हिरासत में लिया था। बाद में 11 अक्तूबर को उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर रिहा किया गया। हालांकि, अभिजीत दिपके ने दावा किया था कि उन्होंने ऐसा कोई बांड नहीं भरा, जो उन्हें आगे प्रदर्शन करने से रोकता हो। इसके बाद पार्टी ने विरोध जारी रखने का फैसला किया।