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दिल्ली : सर्जरी और जांच के लिए लंबी वेटिंग से स्वास्थ्य मंत्री नाराज, मरीजों को करना पड़ रहा है इंतजार

Thu, 17 Mar 2022 03:33 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Thu, 17 Mar 2022 03:33 AM IST
सार

स्वास्थ्य मंत्री जैन ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सर्जरी के लिए वेटिंग होने पर तीन दिन के भीतर उक्त मरीज को दिल्ली आरोग्य कोष (डाक) के तहत नजदीकी अस्पताल भेजा जाए।

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Health Minister angry due to long waiting for surgery and testing
सत्येंद्र जैन - फोटो : एएनआई

विस्तार

सरकारी अस्पतालों में लंबी वेटिंग के चलते दिल्ली सरकार ने निशुल्क उपचार योजना लागू की ताकि मरीज को समय पर उपचार मिल सके। इसके बावजूद बीते काफी समय से अस्पतालों में मरीज लंबी वेटिंग का सामना कर रहे हैं और डॉक्टर उन्हें सुविधा होने के बाद भी नजदीकी प्राइवेट अस्पतालों में रेफर नहीं कर रहे हैं। इस तरह की शिकायतें मिलने के बाद स्वास्थ्य मंत्री अधिकारियों से काफी नाराज दिखे। उन्होंने कहा कि सुविधा होने के बाद भी मरीजों को क्यों नहीं रेफर किया जा रहा है।

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जैन ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सर्जरी के लिए वेटिंग होने पर तीन दिन के भीतर उक्त मरीज को दिल्ली आरोग्य कोष (डाक) के तहत नजदीकी अस्पताल भेजा जाए। इसी तरह अस्पताल आने वाले मरीजों को जांच के लिए भी इंतजार करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि अगर एक ही दिन में मरीज को ओपीडी और जांच सुविधा नहीं मिलती है तो उसे जांच के लिए नजदीकी जांच केंद्र भेजा जाना चाहिए।
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स्वास्थ्य मंत्री ने यह निर्देश हाल ही में हुई एक बैठक में दिए जिसमें राजधानी के सभी सरकारी अस्पतालों के निदेशक मौजूद थे। बैठक के बाद स्वास्थ्य विभाग ने आधिकारिक तौर पर अस्पतालों के लिए निर्देश भी जारी कर दिए हैं।  
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जानकारी के अनुसार बीते कई वर्षों से दिल्ली सरकार राजधानी में दिल्ली आरोग्य कोष के तहत निशुल्क जांच और सर्जरी की सुविधा उपलब्ध करा रही है।

इस योजना के तहत सभी अस्पतालों के साथ प्राइवेट अस्पताल और क्लिनिक को जोड़ा गया है ताकि मरीज सरकारी अस्पताल से इन जगहों पर रैफर होकर जाए और उसे तत्काल उपचार मिले। मरीज पर होने वाले खर्च का पूरा वहन राज्य सरकार इस योजना के तहत करती है। अब तक इस योजना के तहत करीब एक लाख से भी अधिक मरीजों को लाभ मिल चुका है।

स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बीते चार मार्च को स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में बैठक हुई थी जिसमें इस मुद्दे पर काफी देर तक चर्चा हुई।


स्वास्थ्य मंत्री ने स्वयं कहा कि उन्हें लगातार इस तरह की शिकायतें मिल रही हैं जिनके बारे में सुनकर हैरानी होती है। नियम और सुविधा दोनों होने के बाद भी अगर मरीज को इलाज नहीं मिलता है तो इससे बड़ी लापरवाही और कुछ नहीं।  इसी बैठक का हवाला देते हुए स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव एसएम अली ने निर्देश जारी करते हुए यह भी कहा है कि अस्पतालों में दवाओं का भंडारण किया जाए।

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