सोनिया से मिले रावत: पंजाब के बाद उत्तराखंड को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष से मिले पूर्व मुख्यमंत्री
मुलाकात के बाद रावत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वह यहां (सोनिया गांधी के घर) उत्तराखंड से जुड़े मामलों को लेकर चर्चा करने आए थे।
विस्तार
पंजाब कांग्रेस के प्रभारी और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दिल्ली में गुरुवार को अंतरिम कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। मुलाकात के बाद रावत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वह यहां (सोनिया गांधी के घर) उत्तराखंड से जुड़े मामलों को लेकर चर्चा करने आए थे। बैठक के दौरान पंजाब से संबंधित किसी भी बात पर चर्चा नहीं हुई।
Delhi: Congress General Secretary in-charge of Punjab, Harish Rawat is meeting party's interim president Sonia Gandhi; was called by her for discussion
— ANI (@ANI) July 15, 2021विज्ञापन
I met (Interim Congress President Sonia Gandhi) over matters related to Uttarakhand. Hence, nothing related to Punjab was discussed during the meeting: Congress General Secretary in-charge of Punjab, Harish Rawat pic.twitter.com/XdZAISw9hg
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) July 15, 2021
इससे पहले हरीश रावत ने पंजाब कांग्रेस में चल रही कलह पर विराम लगाते हुए साफ किया कि पार्टी अगला चुनाव मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में ही लड़ेगी। जिसके बाद ये साफ हो गया है कि नवजोत सिद्धू चाहे जो भी कर लें, काम उन्हें कैप्टन अमरिंदर सिंह के नीचे ही करना होगा।
वहीं नवजोत सिंह सिद्धू के एक ट्वीट ने पंजाब की सियासत में हलचल तेज कर दी थी। पहले नवजोत सिंह सिद्धू सीधे पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के विरुद्ध मोर्चा खोले बैठे थे। उन्होंने राज्य के बिजली संकट को कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ अपना हथियार बनाया। पहले वह कोटकपूरा गोलीकांड को लेकर सरकार पर हमलावर थे। बिजली संकट थमते ही सिद्धू ने आम आदमी पार्टी की शान में खूब कसीदे पढ़े तो इसके राजनीतिक मायने निकाले जाने लगे। कांग्रेस हाईकमान भी इस मामले में सक्रिय हो गया है।
पंजाब के कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत ने इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। रावत ने कहा कि सोशल मीडिया पर जो कहा जा रहा है, उस पर मैं टिप्पणी नहीं कर सकता... सिद्धू जी का अपना अंदाज है। कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू दोनों ने कहा है कि वे पार्टी नेतृत्व के निर्णय को स्वीकार करने को तैयार हैं।