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बच्चों से आपराधिक वारदात कराने वाले गैंग का खुलासा, 7 गिरफ्तार
Tue, 09 Feb 2021 02:04 AM IST
नोएडा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 09 Feb 2021 02:04 AM IST
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गिरफ्तार आरोपी
- फोटो : amar ujala
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द्वारका साउथ थाना पुलिस ने झारखंड व छत्तीसगढ़ से बच्चों को लाकर राजधानी में आपराधिक वारदात कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से चार बच्चों को मुक्त कराया गया, जिनकी उम्र सात से ग्यारह साल के बीच है। आरोपी बच्चों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाते थे और जेबतराशी व मोबाइल फोन चोरी करवाते थे।
आरोपियों के कब्जे से 14 मोबाइल फोन, दो ऑटो और एक एलइडी टीवी बरामद किया है। जांच में पता चला है कि आरोपी चुराए गए मोबाइल फोन को पश्चिम बंगाल के मालदा निवासी सारेकुल को बेचकर हर महीने पांच से छह लाख रुपये कमाते थे।
जिला पुलिस उपायुक्त संतोष कुमार मीणा ने सोमवार को बताया कि आरोपियों की पहचान झारखंड निवासी महेंद्र महतो, विशाल महतो, चंदु महतो, शेख दिलवर, बिहारी चौधरी, कन्हैया यादव और अमर सिंह के रूप में हुई है। 15 जनवरी को द्वारका साउथ इलाके में साप्ताहिक बाजार में गश्त के दौरान पुलिसकर्मियों ने एक बच्चे को संदिग्ध हालात में घूमते देखा। बच्चे को भरोसे में लेकर उससे पूछताछ की तो पता चला कि कुछ लोग बच्चों से जबरदस्ती मोबाइल फोन चोरी करा रहे हैं।
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उस बच्चे को बाल सुधार गृह भेज कर काउंसलिंग कराई। उसने बताया कि झारखंड के साहिबगंज निवासी विशाल महतो उसे नौकरी दिलाने का झांसा देकर दिल्ली लाया था और यहां जेबतराशी करवाने लगा। कुछ और बच्चों से भी यही काम करवाया जाता था। पुलिस ने जांच के बाद एक और बच्चे को ख्याला इलाके से सकुशल मुक्त कराया और वहीं से दो आरोपियों शेख दिलबर और बिहारी चौधरी को गिरफ्तार कर लिया।
बच्चों को दी जाती थी ट्रेनिंग
शेख दिलबर और बिहारी चौधरी ने बताया कि झारखंड और छत्तीसगढ़ के गरीब परिवारों के बच्चों को नौकरी का झांसा देकर दिल्ली लाया जाता था। पेशे से ऑटो चालक अमर सिंह और कन्हैया पर इन बच्चों को जेबतराशी और मोबाइल फोन चुराने की ट्रेनिंग देते थे। इसके बाद पुलिस ने अमर सिंह और कन्हैया को भी दबोच लिया। आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि गिरोह का सरगना विशाल महतो है। इस काम में उसका दोस्त सुनील व परिवार वाले साथ देते हैं। पुलिस ने विशाल की तलाश शुरू की और उसे उसके गांव महाराजगंज, झारखंड से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने विशाल के निशानदेही पर दो अन्य बच्चों को सकुशल मुक्त करा लिया साथ ही उसके जीजा महेंद्र महतो और भाई चंदू महतो को भी दबोच लिया।
बच्चों की देखरेख करने वालों देते थे 15 हजार
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि झारखंड और छत्तीसगढ़ से लाए बच्चों की देखरेख करने के लिए कई लोगों को रखा जाता था। उन्हें गैंग की तरफ से 15 हजार रुपये महीना दिया जाता था। देखरेख करने वाले की निगरानी में ही बच्चे भीड़भाड़ वाले साप्ताहिक बाजार में वारदात को अंजाम देने के लिए जाते थे। बाद में बच्चों के घर पर 25 से 30 हजार रुपये भेज दिए जाते थे। आरोपी नांगलोई, ख्याला, भजनपुरा, खजूरी, लोनी आदि इलाकों में अपना ठिकाना बदलते रहते थे।
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आरोपियों के कब्जे से 14 मोबाइल फोन, दो ऑटो और एक एलइडी टीवी बरामद किया है। जांच में पता चला है कि आरोपी चुराए गए मोबाइल फोन को पश्चिम बंगाल के मालदा निवासी सारेकुल को बेचकर हर महीने पांच से छह लाख रुपये कमाते थे।
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जिला पुलिस उपायुक्त संतोष कुमार मीणा ने सोमवार को बताया कि आरोपियों की पहचान झारखंड निवासी महेंद्र महतो, विशाल महतो, चंदु महतो, शेख दिलवर, बिहारी चौधरी, कन्हैया यादव और अमर सिंह के रूप में हुई है। 15 जनवरी को द्वारका साउथ इलाके में साप्ताहिक बाजार में गश्त के दौरान पुलिसकर्मियों ने एक बच्चे को संदिग्ध हालात में घूमते देखा। बच्चे को भरोसे में लेकर उससे पूछताछ की तो पता चला कि कुछ लोग बच्चों से जबरदस्ती मोबाइल फोन चोरी करा रहे हैं।
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उस बच्चे को बाल सुधार गृह भेज कर काउंसलिंग कराई। उसने बताया कि झारखंड के साहिबगंज निवासी विशाल महतो उसे नौकरी दिलाने का झांसा देकर दिल्ली लाया था और यहां जेबतराशी करवाने लगा। कुछ और बच्चों से भी यही काम करवाया जाता था। पुलिस ने जांच के बाद एक और बच्चे को ख्याला इलाके से सकुशल मुक्त कराया और वहीं से दो आरोपियों शेख दिलबर और बिहारी चौधरी को गिरफ्तार कर लिया।
बच्चों को दी जाती थी ट्रेनिंग
शेख दिलबर और बिहारी चौधरी ने बताया कि झारखंड और छत्तीसगढ़ के गरीब परिवारों के बच्चों को नौकरी का झांसा देकर दिल्ली लाया जाता था। पेशे से ऑटो चालक अमर सिंह और कन्हैया पर इन बच्चों को जेबतराशी और मोबाइल फोन चुराने की ट्रेनिंग देते थे। इसके बाद पुलिस ने अमर सिंह और कन्हैया को भी दबोच लिया। आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि गिरोह का सरगना विशाल महतो है। इस काम में उसका दोस्त सुनील व परिवार वाले साथ देते हैं। पुलिस ने विशाल की तलाश शुरू की और उसे उसके गांव महाराजगंज, झारखंड से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने विशाल के निशानदेही पर दो अन्य बच्चों को सकुशल मुक्त करा लिया साथ ही उसके जीजा महेंद्र महतो और भाई चंदू महतो को भी दबोच लिया।
बच्चों की देखरेख करने वालों देते थे 15 हजार
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि झारखंड और छत्तीसगढ़ से लाए बच्चों की देखरेख करने के लिए कई लोगों को रखा जाता था। उन्हें गैंग की तरफ से 15 हजार रुपये महीना दिया जाता था। देखरेख करने वाले की निगरानी में ही बच्चे भीड़भाड़ वाले साप्ताहिक बाजार में वारदात को अंजाम देने के लिए जाते थे। बाद में बच्चों के घर पर 25 से 30 हजार रुपये भेज दिए जाते थे। आरोपी नांगलोई, ख्याला, भजनपुरा, खजूरी, लोनी आदि इलाकों में अपना ठिकाना बदलते रहते थे।