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पूर्व सांसद कंवर सिंह पर 65.43 करोड़ रुपये के गबन का आरोप

Tue, 07 Sep 2021 07:24 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 07 Sep 2021 07:24 PM IST
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Former MP Kanwar Singh accused of embezzlement of Rs 65.43 crore
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के अमरोहा से भाजपा के पूर्व सांसद कंवर सिंह तंवर पर एक कंपनी ने जमीन अधिग्रहण का वादा कर 65.43 करोड़ रुपये के गबन का आरोप लगाया है। कंपनी की शिकायत पर अदालत के निर्देश के बाद दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है। मामला गुुरुग्राम में टाउनशिप के विकास और उसके लिए जमीन के अधिग्रहण का है।
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ईओडब्ल्यू ने मामला कृष रीयलटेक प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक और अधिकृत प्रतिनिधि अमू्ल्य कुमार मिश्रा की शिकायत पर दर्ज किया है। कंपनी का कार्यालय जसोला में है। अमूल्य ने रिपोर्ट में कहा कि रीयल एस्टेट कंपनी का नाम वर्ष 2010 में बदलकर ब्रह्म कृष बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड और फिर वर्ष 2011 में ब्रह्म सिटी प्राइवेट लिमिटेड किया गया था। कंपनी गुरुग्राम के सेक्टर 60, 61, 62, 63 व 65 में टाउनशिप के लिए जमीन अधिग्रहण का प्रयास कर रही थी। कंपनी ने इसके लिए रंजन गुप्ता को अधिकृत किया था।
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वर्ष 2008-09 में रंजन गुप्ता ने कंवर सिंह तंवर से मुलाकात की। इस दौरान कंवर सिंह तंवर ने कहा कि उनकी कंपनी के पास काफी जमीन है और वे किसानों से भी अधिग्रहण करा सकते हैं। उन्होंने कुल 105 एकड़, जिसमें खुद की 63 एकड़ और एक कंपनी की 42 एकड़ जमीन 3.30 करोड़ प्रति एकड़ की दर से देने का वादा किया। करार पर समझौते के बाद ब्रह्म कंपनी की ओर से 84.35 करोड़ और फिर रंजन गुप्ता के माध्यम से 22.77 करोड़ रुपये दिए गए। कंपनी ने तंवर के कहने पर किसानों को 90.55 करोड़ रुपये भी भुगतान किए। पैसे देने के बाद भी जमीन का पूरा कब्जा नहीं मिला।
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इसी बीच हरियाणा सरकार के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग निदेशालय की ओर से कंपनी को टाउनशिप के लिए लाइसेंस जारी कर दिया गया। इस पर कंपनी ने डीएलएफ के साथ करार कर काम शुरू किया। पुराने समझौते के तहत कंपनी को महज 48 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गई। काम में उलझन देखकर डीएलएफ ने करार निरस्त कर दिया। शिकायतकर्ता को उसे 29 करोड़ रुपये का भुगतान भी करना पड़ा।

अब कंपनी का आरोप है कि 210.18 करोड़ रुपये देने के बाद भी उसे केवल 158.75 करोड़ रुपये कीमत की जमीन मिली। उसका यह भी आरोप है कि पूर्व सांसद की वजह से कंपनी को डीएलएफ को 14 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ा।
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