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किसान छोड़ गए गणतंत्र पर प्रहार के निशां
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नई दिल्ली। राजधानी की सड़कों पर हिंसक प्रदर्शन के बाद उपद्रवी लौट गए, लेकिन अगली सुबह हर तरफ गणतंत्र पर प्रहार के निशां दिखाई दे रहे थे। लाल किला और आईटीओ चौराहा हिंसक परेड के गवाह बने। बुधवार को तिलक ब्रिज से गुजरने वाले लोग क्षतिग्रस्त खड़ी बसों को देखकर दंग रह गए। ये बसें बेकाबू भीड़ की करतूतों की गवाह हैं।
उपद्रवियों ने राष्ट्रीय धरोहर लाल किले को भी चोट पहुंचाई है। यहां जगह-जगह तोड़फोड़ और मनमानी के निशां साफ दिख रहे हैं। लाल किला परिसर में ही पुलिस का वाहन क्षतिग्रस्त पड़ा है, जिसे देखकर पता चलता है कि उपद्रवी हिंसा की रणनीति बनाकर आए थे। लाल किला परिसर में मौजूद दीवारों को तोड़ा गया। कार्यालय में तोड़फोड़ की गई। सीसीटीवी कैमरों को तोड़ दिया गया। पुलिस वालों के लिए रखी कुर्सियों को उखाड़कर फेंक दिया गया। गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल झांकियों को भी इन्होंने नहीं बख्शा। कई झांकियों को उपद्रवियों ने नुकसान पहुंचाया।
26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकाली। तय मार्ग से हटकर यह रैली आईटीओ चौराहे तक पहुंच गई। यहां तिलक ब्रिज के पास दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ उपद्रवियों ने हिंसा की। लाल किला पहुंचकर तिरंगे के साथ धार्मिक झंडा तक फहराया। इसी बीच, मुकरबा चौक, गाजीपुर, टीकरी बॉर्डर, नांगलोई आदि जगहों पर भी हिंसा की घटनाएं दिखीं। देर रात तक पुलिस की सख्ती के बाद सभी उपद्रवी धीरे-धीरे दिल्ली तो छोड़ गए, लेकिन अगली सुबह जब आम लोग घरों से निकले तो सड़कों पर खड़े क्षतिग्रस्त वाहनों, कांच के टुकड़ों, टूटे डिवाइडरों से उन्होंने उपद्रवियों की करतूतों का अंदाजा लगाया।
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उपद्रव को देखते हुए दिल्ली पुलिस बुधवार को काफी सख्त रही। लुटियन जोन में जगह-जगह पहरा दिखाई दिया। सुबह कनॉट प्लेस से मिंटो रोड को कुछ देर के लिए बंद किया गया, लेकिन उसके बाद यातायात बहाल कर दिया। दिनभर अलग-अलग इलाकों में दिल्ली पुलिस, अर्धसैनिक बलों ने खास सतर्कता रखी। लाल किला परिसर में भी जवानों की संख्या बीते मंगलवार की तुलना में काफी ज्यादा थी।
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उपद्रवियों ने राष्ट्रीय धरोहर लाल किले को भी चोट पहुंचाई है। यहां जगह-जगह तोड़फोड़ और मनमानी के निशां साफ दिख रहे हैं। लाल किला परिसर में ही पुलिस का वाहन क्षतिग्रस्त पड़ा है, जिसे देखकर पता चलता है कि उपद्रवी हिंसा की रणनीति बनाकर आए थे। लाल किला परिसर में मौजूद दीवारों को तोड़ा गया। कार्यालय में तोड़फोड़ की गई। सीसीटीवी कैमरों को तोड़ दिया गया। पुलिस वालों के लिए रखी कुर्सियों को उखाड़कर फेंक दिया गया। गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल झांकियों को भी इन्होंने नहीं बख्शा। कई झांकियों को उपद्रवियों ने नुकसान पहुंचाया।
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26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकाली। तय मार्ग से हटकर यह रैली आईटीओ चौराहे तक पहुंच गई। यहां तिलक ब्रिज के पास दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ उपद्रवियों ने हिंसा की। लाल किला पहुंचकर तिरंगे के साथ धार्मिक झंडा तक फहराया। इसी बीच, मुकरबा चौक, गाजीपुर, टीकरी बॉर्डर, नांगलोई आदि जगहों पर भी हिंसा की घटनाएं दिखीं। देर रात तक पुलिस की सख्ती के बाद सभी उपद्रवी धीरे-धीरे दिल्ली तो छोड़ गए, लेकिन अगली सुबह जब आम लोग घरों से निकले तो सड़कों पर खड़े क्षतिग्रस्त वाहनों, कांच के टुकड़ों, टूटे डिवाइडरों से उन्होंने उपद्रवियों की करतूतों का अंदाजा लगाया।
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उपद्रव को देखते हुए दिल्ली पुलिस बुधवार को काफी सख्त रही। लुटियन जोन में जगह-जगह पहरा दिखाई दिया। सुबह कनॉट प्लेस से मिंटो रोड को कुछ देर के लिए बंद किया गया, लेकिन उसके बाद यातायात बहाल कर दिया। दिनभर अलग-अलग इलाकों में दिल्ली पुलिस, अर्धसैनिक बलों ने खास सतर्कता रखी। लाल किला परिसर में भी जवानों की संख्या बीते मंगलवार की तुलना में काफी ज्यादा थी।