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किसानों ने भरी हुंकार, मांग पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन, समर्थकों की संख्या में आई कमी

Wed, 27 Jan 2021 10:22 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Wed, 27 Jan 2021 10:22 PM IST
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Farmer leader said till the three agricultural laws not repealed the movement will continue
किसान संगठन के नेता - फोटो : PTI

ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा के लिए किसान संगठनों ने दीप सिद्धू जैसे अराजक व असामाजिक तत्वों का जिम्मेदार बताया है। किसान संगठनों का कहना है कि इस तरह के लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे आंदोलन को कमजोर करने की साजिश रची है। साथ ही आरोप लगाया कि इस दौरान सरकार ने भी आंदोलन को कमजोर करने के लिए चुप्पी साधे रखी। संयुक्त किसान मोर्चा के मुताबिक, मंगलवार की हिंसा में बहुत से चेहरे बेनकाब हुए हैं। किसान शांति पूर्ण से अपना आंदोलन जारी रखेंगे। बगैर मांगें पूरी हुए वह वापस लौटने वाले नहीं हैं।

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इससे पहले संयुक्त किसान मोर्चा के 32 संगठनों की बैठक सिंघु बॉर्डर पर हुई। इसमें ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा के लिए दीप सिद्धू सहित दूसरे अराजक तत्वों को जिम्मेदार ठहराया है। मोर्चा का आरोप है कि किसान आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश के तहत इस तरह की हिंसा फैलाई गई है। मोर्चा का कहना  है कि बीते करीब दो महीने से आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था। इससे सरकार दबाव में थी। मोर्चा ने आरोप लगाया कि दबाव करने के लिए सरकार ने भी गंदी साजिश रची गई और हिंसा को होने दिया।
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संयुक्त किसान मोर्चा ने अपने सभी संगठनों के किसानों से अपील की है कि आंदोलन मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। शांतिपूर्ण के तरीके से यह अपना मुकाम हासिल करेगा। ऐसे में किसी को वापस लौटने की जरूरत नहीं है। बगैर तीनों कृषि कानूनों के वापस हुए आंदोलन थमने वाला नहीं है। हर तरह की साजिशें किसान आपस में मिलकर शांतिपूर्ण तरीके से नाकाम करेंगे।
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एक फरवरी के मार्च पर असमंजस बरकार, मोर्चे के फैसले का इंतजार

किसान संगठनों के बीच एक फरवरी बजट के दिन संसद की तरफ प्रस्तावित पैदल मार्च में ट्रैक्टर मार्च की हिंसा के बाद असमंजस पैदा हो गया है। संयुक्त मोर्चा से जुड़े कुछ किसान संगठन मार्च को स्थगित करने के हक में हैं। हालांकि, अभी इस मसले पर खुलकर बोलने को तैयार नहीं है।

एक किसान नेता ने बताया कि हिंसा के बाद संभावना इस बात की ज्यादा है कि मार्च को स्थगित कर दिया जाए। लेकिन इस पर अंतिम फैसला संयुक्त किसान मोर्च का होगा। बुधवार की बैठक में इस पर कोई चर्चा नहीं हुई है। इस दौरान सिर्फ हिंसा के बाद उपजे हालात पर ही किसान नेताओं ने आपस में बात की और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है।
 

टीकरी बॉर्डर: समर्थकों की संख्या में 15-20 फीसदी की आई कमी

ट्रैक्टर रैली के दौरान हिंसा और उपद्रव का असर दूसरे दिन बुधवार को टीकरी बॉर्डर पर भी दिखा। सीमा पर आंदोलन समर्थकों की संख्या में कमी आई है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि 15-20 फीसदी किसान अपनी ट्रैक्टर-ट्रालियों के साथ वापस लौट गए हैं। हालांकि, किसान संगठनों का दावा है कि पहले की तरह अपनी मांगों पर डटे रहेंगे। जो भी किसान वापस लौट रहे हैं, वह खास तौर पर रैली के लिए ही दिल्ली पहुंचे हुए थे।

दूसरी तरफ टिकरी बॉर्डर से नांगलोई और पीरागढ़ी के बीच रैली के दौरान हुई तोड़फोड़ को दुरूस्त किया गया है। वहीं, नांगलोई फ्लाईओवर और नजफगढ़ रोड से बैरिकेड्स हटा दिए गए। लेकिन टीकरी बॉर्डर पर एक बार फिर बैरिकेड्स पहले की तरह ही लगा दिए गए हैं। पुलिस की कोशिश है कि प्रदर्शनकारी दुबारा दिल्ली में प्रवेश न कर सकें।

आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश के तहत ऐसी घटनाएं हुईं

रैली के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ की किसान संगठनों ने भी निंदा की है। किसान समर्थकों का आरोप है कि आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश के तहत ऐसी घटनाएं हुई हैं। टीकरी बॉर्डर से ट्रैक्टर रैली में शामिल हुए अधिकतर लोग लौट चुके हैं, इसलिए प्रदर्शन स्थल पर पहले की तुलना में थोड़ी कम भीड़ नजर आ रही है। उपद्रव और हिंसा की हर तरफ हो रही निंदा को देखते हुए कुछ लोग अपने घरों के लिए लौटने लगे हैं। कुछ समर्थकों का कहना है कि लंबे समय तक दिल्ली की सीमा पर रहने के लिए फिलहाल लौट रहे हैं और जल्द ही लौटेंगे। 

नांगलोई के पास से हटाए गए बैरिकेड्स
नांगलोई मेट्रो स्टेशन के पास मंगलवार को पूरे दिन अफरातफरी की स्थिति बनी रही, जिन्हें दुरुस्त किया गया। बुधवार को सड़क पर लगाए बैरिकेड्स और लॉरी को हटा दिया गया। बैरिकेड्स हटाए जाने के बाद वाहनों का सामान्य तौर पूरे दिन आवागमन हुआ। हालांकि पीरागढ़ी तक हर तरफ सुरक्षा बल मुस्तैद हैं और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। 

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