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लॉकडाउन: पहले दिन भी जारी रहा श्रमिकों का पलायन

Wed, 21 Apr 2021 12:41 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 21 Apr 2021 12:41 AM IST
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exodus of migrant workers was continue on day one of lockdown
सर्वेश कुमार
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नई दिल्ली। पिछले साल के लॉकडाउन की तरह इस बार भी मुश्किलों का सामना न करना पड़े, इस चिंता में प्रवासी मजदूरों का अपने राज्यों को जाना लगातार जारी है। बस अड्डे और आसपास से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार सहित दूसरे राज्यों को जाने वाली निजी बसों में सैकड़ों की संख्या में प्रवासी श्रमिक का जाना जारी है।
छह दिन के लॉकडाउन के लिए सरकार की अपील के बावजूद घरों को जाने वालों की हर तरफ भीड़ दिखी। आनंद विहार, सराय काले खां और कश्मीरी गेट बस अड्डे के पास सुरक्षा कर्मियों को मुस्तैद किया गया है ताकि भीड़ की वजह से हालात बेकाबू न हो। दिल्ली में एक से दूसरी जगह जाने के लिए डीटीसी और क्लस्टर की बसें सड़कों पर कम यात्रियों के साथ दौड़ रही हैं। पीक आवर्स में 15 मिनट जबकि शेष वक्त में 30 मिनट के अंतराल पर सभी लाइनों पर मेट्रो उपलब्ध रहेगी।
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लॉकडाउन के पहले दिन सुबह से ही बसों और मेट्रो में जरूरी सेवाओं से जुड़े कर्मियों सहित जरूरी कार्यों से आने जाने वाले आईडी कार्ड दिखाने पर सफर कर रहे हैं। मेट्रो में यात्रियों की संख्या पहले से काफी कम हो गई है जबकि बस, ऑटो में अधिकतर यात्री आवागमन कर रहे हैं। ऑटो में यात्रियों की संख्या सीमित करने और बसों में आईडी कार्ड दिखाने की अनिवार्यता की वजह से जो भी सवारी मिल रही है, लोग अपने घरों के लिए जा रहे हैं। इनमें अधिकतर प्रवासी श्रमिक, निजी फैक्टरियों के दैनिक श्रमिक हैं।
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लॉकडाउन बढ़ाए जाने की सता रही है लोगों को चिंता
नेपाल से आई गीता को छह दिनों के लॉकडाउन से पिछले साल की तरह के हालात होने की चिंता सताने लगी है। परेशानी से बचने के लिए कौशाम्बी बस डिपो में अपने परिवार के साथ इंतजार कर रही गीता ने कहा कि अगर लॉकडाउन की अवधि बढ़ाई गई तो उनके लिए यहां रहना मुश्किल हो जाएगा। परिवार में सात सदस्य हैं, जिनमें एक वरिष्ठ नागरिक भी हैं। दैनिक मजदूरी काम करने वाला परिवार चार-पांच महीने नेपाल से लौटा था, लेकिन अब दोबारा चिंता सताने लगी है।
इस बार भी ट्रक से नहीं जाना चाहते हैं अपने घर
जौनपुर निवासी चंदन ने पिछले साल के लॉकडाउन को याद करते हुए कहा कि इस बार ट्रक पर यात्रा नहीं करना चाहते हैं। इसलिए समय रहते ही बस अड्डा पहुंचे हैं। पिछली बार खाने पीने की किल्लत थी, लेकिन इस बार तो जान बचाने के लिए वापस जा रहे हैं। मालिक से भी 500 रुपये मिला और इस बार अधिक आर्थिक मदद के लिए तैयार नहीं हैं।
हालात सुधरे तो फिर लौटेंगे
सुभाष नगर में कारपेंटर का काम करने वाले एक युवक ने बताया कि अगले हफ्ते बहन की शादी है। लॉकडाउन से एक सप्ताह पहले से जाने की योजना बना रहा था, लेकिन अब परिवार के सदस्यों ने पहले घर पहुंचने के लिए कहा है। अगर हालात और न बिगड़े तो फिर काम पर लौटेंगे।
ई रिक्शा की बढ़ी एक बार फिर परेशानी, कमाई हुई कम
ई-रिक्शा चालक दीपक ने कहा कि अपने घर नहीं जा रहे हैं, क्योंकि कोरोना का खतरा तो सभी जगह है। यहां काम कर कुछ रुपये कमा लेंगे। यात्रियों की संख्या कम है, इसलिए कमाई भी कम हो गई है। द्वारका मेट्रो स्टेशन, सेक्टर-11 के बाहर मौजूद मुरारी ने बताया कि सुबह से 60 रुपये की दो बजे तक कमाई हो सकी। मेट्रो में यात्रियों की संख्या काफी कम हो गई है, इसका असर उनकी कमाई पर भी पड़ने लगा है।
रैन बसेरे में भी कम हुए लोग
रैन बसेरे में भी लोगों की संख्या आधे से भी कम हो गई है। सेक्टर-10 द्वारका में रहने वाले रामरतन सुबह के वक्त छतरपुर के लिए रवाना हो गया। वहां मौजूद मिश्रिलाल ने बताया कि ई रिक्शा चलाने वाले दो लोग सुबह अपने घरों के लिए चले गए हैं। बाकि भी अगर रात तक नहीं लौटे तो मान लिया जाएगा कि अपने घर चले गए।
आईडी कार्ड न होने से बढ़ी परेशानी
सेक्टर-6 स्थित एक निजी अस्पताल के बाहर बस स्टॉप पर कर्मी और तीमारदार बस के लिए इंतजार करते दिखे। हालांकि एक बस को छोड़, दूसरी बस में सीट मिलने से राहत मिली। बसों में उन लोगों को अधिक दिक्कत आई, जिनके पास बाहर निकलने के लिए कोई ठोस वजह या आईडी कार्ड नहीं है। श्रमिकों का कहना है कि उनके पास आईडी नहीं है तो क्या उन्हें बस अड्डा तक जाने के लिए सफर की इजाजत भी नहीं है।
नजर रखने के लिए बनाए गए नोडल अधिकारी
कामगारों के लगातार अपने राज्यों को जाने और कोरोना संक्रमण के दौरान बिगड़ते हालात को देखते हुए दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने निर्देश जारी किए हैं। प्रवासी श्रमिकों के लौटने के दौरान संक्रमण का प्रसार न बढ़े इस पर नजर रखने की हिदायत दी गई है। सामाजिक दूरी, मास्क पहनने सहित बसों में सफर के दौरान भी सभी जरूरी हिदायतों का पालन करने को कहा गया है।

हालात पर नजर रखने के लिए दिल्ली सरकार के प्रधान सचिव (गृह) को स्टेट नोडल ऑफिसर बनाया है। दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर (सेंट्रल रेंज) को दिल्ली पुलिस का नोडल ऑफिसर बनाया गया है। पिछले 24 घंटे से दिल्ली के बस अड्डों सहित तमाम परिवहन साधनों से दूसरे राज्यों के लिए जा रहे प्रवासी श्रमिकों के कल्याण और उन्हें बुनियादी सुविधाएं भी मुहैया करवाने के निर्देश दिए गए हैं।
महामारी के दौरान उन्हें बुनियादी दिक्कतों से न जूझना पड़े, इसके लिए नोडल अधिकारियों की देखरेख में पुलिस अधिकारी भी लगातार नजर रख रहे हैं।
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