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पूर्व कानून मंत्री लगाई उनके केस की सुनवाई सामान्य अदालत में करने की गुहार
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नई दिल्ली। फर्जी डिग्री मामले में फंसे पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर ने उनके मामले की सुनवाई विशेष अदालत की बजाय सामान्य अदालत में करने की हाईकोर्ट से गुहार लगाई। तोमर ने दलील में कहा कि चूंकि 2015 में त्रिनगर सीट से हुए उनके चुनाव को खारिज कर दिया गया। इसलिए अब मामले की सुनवाई का अधिकार सामान्य अदालत के पास है।
न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की पीठ के समक्ष तोमर ने कहा कि हाईकोर्ट ने 17 जनवरी को उनके निर्वाचन को अमान्य करार दिया था, इसलिए उनके मामले की सुनवाई का क्षेत्राधिकार सामान्य अदालत के पास है। लिहाजा, हौज खास थाना क्षेत्र की अदालत यानी साकेत कोर्ट में मामले की सुनवाई करने का निर्देश दिया जाए। पीठ ने इस मामले में अगली सुनवाई 2 नवंबर के लिए सूचीबद्ध की है।
तोमर की ओर से वकील कुश शर्मा ने कहा कि सांसदों-विधायकों के मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत के समक्ष मामले को नहीं रखा जा सकता, क्योंकि उनके निर्वाचन को खारिज कर दिया गया और वह विधायक नहीं है। तोमर के निर्वाचन के खिलाफ भाजपा नेता नंद किशोर गर्ग की ओर से याचिका दायर की गई थी। इसी याचिका के आधार पर पीठ ने निर्वाचन अमान्य होने का फैसला सुनाया था। तोमर ने 2015 में विधानसभा चुनाव नामांकन पत्र में शैक्षिक योग्यता के बारे में गलत जानकारी दी थी।
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न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की पीठ के समक्ष तोमर ने कहा कि हाईकोर्ट ने 17 जनवरी को उनके निर्वाचन को अमान्य करार दिया था, इसलिए उनके मामले की सुनवाई का क्षेत्राधिकार सामान्य अदालत के पास है। लिहाजा, हौज खास थाना क्षेत्र की अदालत यानी साकेत कोर्ट में मामले की सुनवाई करने का निर्देश दिया जाए। पीठ ने इस मामले में अगली सुनवाई 2 नवंबर के लिए सूचीबद्ध की है।
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तोमर की ओर से वकील कुश शर्मा ने कहा कि सांसदों-विधायकों के मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत के समक्ष मामले को नहीं रखा जा सकता, क्योंकि उनके निर्वाचन को खारिज कर दिया गया और वह विधायक नहीं है। तोमर के निर्वाचन के खिलाफ भाजपा नेता नंद किशोर गर्ग की ओर से याचिका दायर की गई थी। इसी याचिका के आधार पर पीठ ने निर्वाचन अमान्य होने का फैसला सुनाया था। तोमर ने 2015 में विधानसभा चुनाव नामांकन पत्र में शैक्षिक योग्यता के बारे में गलत जानकारी दी थी।
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