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अदालत ने किया साफ : नौकरीशुदा पत्नी को कमाऊ गाय के रूप में नहीं कर सकते इस्तेमाल
Sun, 07 Nov 2021 04:28 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 07 Nov 2021 04:28 AM IST
सार
अदालत ने इस व्यवहार को क्रूरता मानते हुए तलाक की दी मंजूरी।
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दिल्ली उच्च न्यायालय
- फोटो : ANI
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विस्तार
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को नौकरीशुदा पत्नी को बिना किसी भावनात्मक संबंधों के एक कमाऊ गाय (कैश काऊ) के रूप में इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। अदालत ने महिला की अपील को स्वीकार करते हुए पति के व्यवहार को क्रूरता मानते हुए उनके बीच तलाक की मंजूरी प्रदान कर दी।
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न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ के समक्ष महिला ने परिवार न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें फैमिली कोर्ट ने इसे क्रूरता या परित्याग का कारण मानने से इनकार करते हुए तलाक मंजूर नहीं किया था। इस जोड़े के बीच वर्ष 2000 में विवाह संपन्न हुआ जब पत्नी नाबालिग थी और 13 वर्ष की थी। वहीं पति की आयु 19 वर्ष थी।
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2005 में वयस्क होने के बाद भी पत्नी नवंबर 2014 तक अपने पैतृक घर में रही। उक्त अवधि के दौरान उसने पढ़ाई पूरी की और अपनी योग्यता से दिल्ली पुलिस में नौकरी पाने में सफल रही। महिला ने तर्क रखा कि उसके परिवार ने उसके पति को उसे ससुराल ले जाने के लिए मनाने की कोशिश की लेकिन वह उसे ससुराल नहीं ले गया। याची ने कहा कि वर्ष 2014 में जब उसे दिल्ली पुलिस में नौकरी मिली तो उसके तुरंत बाद उसका पति उसे ससुराल ले जाने के लिए तैयार हो गया। इसका मुख्य कारण उसे नौकरी से होने वाली स्थायी आय थी।
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पति ने पत्नी को कमाऊ गाय के रूप में देखा
अदालत ने महिला के तर्क को स्वीकार करते हुए कहा ऐसा प्रतीत होता है कि पति ने अपीलकर्ता को एक कमाऊ गाय के रूप में देखा और दिल्ली पुलिस में नौकरी मिलने के बाद ही उसे ससुराल ले जाने को तैयार हो गया। अदालत ने कहा पति के इस तरह के बेशर्मी भरे भौतिकवादी रवैये और बिना भावनात्मक संबंधों से अपीलकर्ता को अपने आप में मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ा होगा। इस तरह का आघात उसके साथ क्रूरता तय करने के लिए पर्याप्त है।
अदालत ने कहा पति के पास इस बात का कोई स्पष्टीकरण नहीं है कि वर्ष 2005 में वयस्क होने के तुरंत बाद वह पत्नी को वैवाहिक घर में क्यों नहीं ले गया और उसे वर्ष 2014 तक अपने माता-पिता के साथ क्यों रहना पड़ा? ऐसे में पति के खिलाफ स्थापित मानसिक क्रूरता के अपराध का एक स्पष्ट मामला बनता है।