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विश्वविद्यालय समाचार : हरियाली के लिए डीयू की अनूठी पहल, हर छात्र को लगाना होगा पेड़

Sun, 08 Aug 2021 04:46 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 08 Aug 2021 04:46 AM IST
सार

  • आगामी सत्र से स्नातक, स्नातकोत्तर एमफिल-पीएचडी स्तर के विद्यार्थियों के लिए पेड़ लगाना अनिवार्य किया गया
  • वृक्षारोपण डीयू में पढ़ाई का हिस्सा होगा

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 DU unique initiative for greenery as every student will have to plant a trees
Delhi University

विस्तार

दिल्ली विश्वविद्यालय के हर विद्यार्थी को अपनी पढ़ाई के दौरान देश में कहीं भी एक पेड़ लगाना होगा। आगामी सत्र से इसे स्नातक, स्नातकोत्तर और एमफिल-पीएचडी स्तर के विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य बनाया गया है। इस तरह से वृक्षरोपण डीयू में पढ़ाई का हिस्सा होगा।

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कॉलेजों और विभागों द्वारा वैज्ञानिक रूप से इसकी निगरानी होगी और मूल्यांकन किया जाएगा। विद्यार्थियों को पेड़ की छ: माह की मॉनिटरिंग रिपोर्ट फोटोग्राफ के साथ देनी होगी। विद्यार्थियों को सहूलियत रहे इसलिए वह कहीं भी पेड़ लगा सकते हैं।  
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डीयू कार्यवाहक कुलपति प्रो पीसी जोशी ने प्रेस वार्ता में कहा कि विवि ने एक नया कदम उठाया है। इससे हम जमीनी स्तर पर पर्यावरण शिक्षा से पर्यावरणीय कार्रवाई की ओर बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि हर वर्ष देश के विभिन्न राज्यों से लाखों विद्यार्थी यहां दाखिला लेते हैं। अब इन विद्यार्थियों को पौधा लगाना अनिवार्य होगा। ये छात्र हमारे जलवायु योद्धा होंगे।
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इस बात को ध्यान रखना चाहिए कि पौधे कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर आक्सीजन प्रदान करते हैं। कैंसर पैदा करने वाले रसायनों सहित कई हानिकारक प्रदूषकों को अवशोषित करते हैं, मिट्टी के कटाव, भूस्खलन को रोकने में मदद करते हैं। 

वृक्षारोपण और उसके बाद के रखरखाव से न केवल एक विविध स्तर पर रोजगार पैदा करने में मदद मिलेगी बल्कि कई उत्पाद भी मिलेंगे जो आय प्रदान करने में मदद करेंगे। पहली बार कोरोना महामारी के दौरान ऑक्सीजन की कमी का सामना करना पड़ा महामारी ने हमें काफी कुछ सिखाया। लिहाजा हमें भविष्य की समस्याओं से निपटने के लिए स्वयं को तैयार करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि लाखों पेड़ लगाना और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र बनाना सबसे अच्छा तरीका है। इस लक्ष्य को विद्यार्थियों की भागीदारी के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। इस प्रयास से विद्यार्थी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में योगदान दे सकेंगे। 

हिमालयी अध्ययन केंद्र के निदेशक और यह प्रस्ताव देने वाले वनस्पतिशास्त्री प्रोफेसर दीनबंधु साहू ने कहा कि भारत में प्रति व्यक्ति केवल 28 पेड़ उपलब्ध हैं। जबकि वैश्विक औसत  प्रति व्यक्ति 422 पेड़ हैं। 

पेड़ लगाना स्नातक विद्यार्थियों के लिए पर्यावरणीय अध्ययन के अनिवार्य कोर्स का हिस्सा होगा। जबकि स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए पहले सेमेस्ट का हिस्सा होगा जिसे संबंधित विभाग द्वारा प्रमाणित किया जाएगा। पीएचडी विद्यार्थियों के लिए यह कोर्स वर्क का हिस्सा होगा

फतेहपुर बेरी में खुलेगा डीयू का कॉलेज

दिल्ली विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष(2022) में विद्यार्थियों को एक नया कॉलेज मिलने जा रहा है। महरौली स्थित फतेहपुर बेरी के भाटी कलां गांव में यह कॉलेज खोलने की तैयारी की जा रही है। रविवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान को इस कॉलेज का शिलान्यास करना था। किन्हीं कारणों से इस शिलान्यास कार्यक्रम को रद कर दिया गया है। 

40 बीघा जमीन पर खुलने वाले इस कॉलेज का नाम तय होना बाकी है। डीयू की एकेडेमिक व एग्जिक्यूटिव काउंसिल में कॉलेज के नाम को फाइनल किया जाएगा। कॉलेज खोलने जल्द ही गाइडलाइंस तैयार हो जाएंगी । 

डीयू रजिस्ट्ररार डॉ विकास गुप्ता ने कहा कि डीयू अगले साल अपने सौ वर्ष पूरे करने जा रहा है। इस मौके पर इमारत तैयार कर पहले वर्ष केविद्यार्थियों का प्रवेश लिया जाएग। दक्षिण पश्चिम दिल्ली में बनने वाले इस कॉलेज केलिए जमीन का आवंटन जुलाई 2019 में हो चुका है।

उपराज्यपाल अनिल बैजल के अनुमोदन एवं अनुशंसा पर कॉलेज की स्थापना केलिए जिला प्रशासन द्वारा जमीन उपलब्ध कराई गई है। इस कॉलेज के खुलने से दिल्ली-एनसीआर के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को लाभ होगा। इसकेसाथ ही यहां एक सुविधा केंद्र भी होगा जो कि विद्यार्थियों के दाखिला, परीक्षा व अन्य कार्यों केलिए सुविधा प्रदान करेगा। इसके खुलने से एक जगह से दूसरी जगह चक्कर नहीं लगाने होंगे। 

 

डीयू में नौ साल पहले की डुप्लीकेट माक्र्सशीट ऑनलाइन ले सकेंगे

दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को अब छ: माह पहले की माक्र्सशीट खोने या खराब होने पर उन्हें ङ्क्षचंता नहीं करनी पड़ेगी। विद्यार्थियों को अब नौ साल पहले की डुप्लीकेट माक्र्सशीट ऑनलाइन ही मिल जाएगी। डीयू विद्यार्थियों को वर्ष 2012 के बाद की माक्र्सशीट डाउनलोड करने की सुविधा प्रदान करने जा रहा है। अब तक छ: माह पुरानी माक्र्सशीट ही प्राप्त की जा सकती थी। इसकेलिए उन्हें परीक्षा शाखा के चक्कर लगाने पड़ते थे। इस सुविधा के मिलने से विद्यार्थियों को काफी आसानी हो जाएगी। 

डीयू परीक्षा शाखा डीन प्रो डी.एस रावत ने बताया कि हम विद्यार्थियों को 2012 के बाद की डुप्लीकेट माक्र्सशीट ऑनलाइन देने की सुविधा देने जा रहे हैं। अभी तक की व्यवस्था के अनुसार यदि विद्यार्थी की माक्र्सशीट खो गई, प्रिंट आउट खराब हो गया या फिर पीडीएफफ सेव नहीं किया तो वह केवल छ: माह पहले तक की डुप्लीकेट माक्र्सशीट प्राप्त कर सकते थे। जबकि इससे पहले की डुप््लीकेट माक्र्सशीट लेने के लिए उन्हें परीक्षा शाखा आना पड़ता है। उन्हें इसकेलिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। यहां आने से समय और ऊर्जा की बर्बादी होती थी। हम चाहते हैं कि विद्यार्थियों को सब कुछ घर बैठे ऑनलाइन ही मिल जाए। 

पहले की तरह विद्यार्थियों को डुप्लीकेट माक्र्सशीट प्राप्त करने के लिए 500 रुपये शुल्क का भुगतान करना होगा। यह प्राप्त करने के लिए उन्हें रोल नंबर, कॉलेज का नाम, जन्म तिथि को डालना होगा। उसकेबाद उनसे किस वर्ष व किस सेमेस्टर की माक्र्सशीट चाहिए यह पूछा जाएगा।नई व्यवस्था के तहत वर्ष 2012 के बाद की किसी भी सेमेस्टर की माक्र्सशीट को डाउनलोड किया जा सकता है। वर्ष 2012 से पहले मैनुअल रिजल्ट मिलता था इसलिए उस दौरान के लिए सुविधा प्रदान करना मुश्किल है।

डीयू में यूजी कोर्सेज में पंजीकरण का आंकड़ा करीब डेढ़ लाख पहुंचा
दिल्ली विश्वविद्यालय में यूजी कोर्सेज में दाखिले के लिए दो अगस्त से शुरू हुई आवेदन प्रक्रिया में रिकॉर्ड पंजीकरण हो रहे हैं। सात दिनों की आवेदन प्रक्रिया में पंजीकरण का आंकड़ा करीब डेढ़ लाख पहुंच गया है। जबकि आवेदन प्रक्रिया समाप्त होने में अभी 24 दिन बाकी हैं। जिस रफ्तार से पंजीकरण हो रहा है उससे एक-एक सीट पर दावेदारी बढ़ती जा रही है। शनिवार शाम छ: बजे तक 1, 45, 712 पंजीकरण हो गए। वहीं 26 जुलाई से शुरू हुई पीजी आवेदन की रेस केतहत शनिवार शाम तक 96, 264 पंजीकरण हो गए। जबकि एमफिल-पीएचडी के लिए 13, 490 पंजीकरण हो गए। पीजी, एमफिल-पीएचडी के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 21 अगस्त है। 

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