{"_id":"6a8ee23cebbe19c4ce0dd72e","slug":"dr-raj-is-free-to-travel-anywhere-court-ashram-news-c-340-1-del1011-152189-2026-08-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"कहीं भी आने-जाने के लिए आजाद हैं डॉ. राज शेखावत : हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कहीं भी आने-जाने के लिए आजाद हैं डॉ. राज शेखावत : हाईकोर्ट
विज्ञापन
कानून के दायरे में रहकर ही किसी विरोध प्रदर्शन में शामिल होना होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि क्षत्रिय करणी सेना और अखंड करणी पार्टी के अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत कहीं भी आने-जाने के लिए पूरी तरह आजाद हैं। हालांकि, अगर वह किसी विरोध प्रदर्शन में शामिल होना चाहते हैं तो उन्हें कानून के दायरे में रहकर ऐसा करना होगा। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी डॉ. राज शेखावत को पेश करने की मांग वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका पर सुनवाई के दौरान की।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि डॉ. राज शेखावत को गैर-कानूनी तरीके से नजरबंद कर रखा गया है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि डॉ राज शेखावत यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) के साल 2026 के नए नियमों को लेकर देशभर में जागरूकता अभियान चला रहे थे। आरोप लगाया गया कि उन्हें उनके एक दोस्त के घर पर रोककर रखा गया और वहां से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि डॉ. राज शेखावत को किसी भी मामले में गिरफ्तार नहीं किया गया है। पुलिस ने यह भी आशंका जताई कि वह विरोध प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर जा सकते हैं। पुलिस के इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने साफ कहा कि याचिकाकर्ता कहीं भी आने जाने के लिए स्वतंत्र हैं। अदालत ने साथ ही कहा कि अगर वह किसी विरोध प्रदर्शन में शामिल होना चाहते हैं तो ऐसा प्रदर्शन कानून के अनुसार और तय नियमों के दायरे में होना चाहिए।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि क्षत्रिय करणी सेना और अखंड करणी पार्टी के अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत कहीं भी आने-जाने के लिए पूरी तरह आजाद हैं। हालांकि, अगर वह किसी विरोध प्रदर्शन में शामिल होना चाहते हैं तो उन्हें कानून के दायरे में रहकर ऐसा करना होगा। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी डॉ. राज शेखावत को पेश करने की मांग वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका पर सुनवाई के दौरान की।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि डॉ. राज शेखावत को गैर-कानूनी तरीके से नजरबंद कर रखा गया है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि डॉ राज शेखावत यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) के साल 2026 के नए नियमों को लेकर देशभर में जागरूकता अभियान चला रहे थे। आरोप लगाया गया कि उन्हें उनके एक दोस्त के घर पर रोककर रखा गया और वहां से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि डॉ. राज शेखावत को किसी भी मामले में गिरफ्तार नहीं किया गया है। पुलिस ने यह भी आशंका जताई कि वह विरोध प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर जा सकते हैं। पुलिस के इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने साफ कहा कि याचिकाकर्ता कहीं भी आने जाने के लिए स्वतंत्र हैं। अदालत ने साथ ही कहा कि अगर वह किसी विरोध प्रदर्शन में शामिल होना चाहते हैं तो ऐसा प्रदर्शन कानून के अनुसार और तय नियमों के दायरे में होना चाहिए।
विज्ञापन