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Delhi : भाषा विश्वविद्यालय के डॉ. फलाही ने कहा- देवबंद, नदवा ने की कुरान की गलत व्याख्या
Sun, 18 Jun 2023 06:04 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 18 Jun 2023 06:04 AM IST
सार
डॉ. फलाही शनिवार को दलित पसमांदा सामूहिक न्याय परियोजना की ओर से आयोजित इस्लामी सेमिनरी नदवा और देवबंद में भेदभाव विषय पर आयोजित वेबिनार में बोल रहे थे। मुख्य वक्ता डॉ. फलाही ने कहा कि देवबंद मदरसा की स्थापना के पीछे मुख्य विचार अशरफ का उत्थान था, जो उच्च जाति के मुसलमान थे।
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देवबंद, मदरसा file pic
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
लखनऊ स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. मसूद फलाही ने कहा कि इस्लामी मदरसा देवबंद व नदवा ने कुरान की गलत व्याख्या की है। दोनों ने इस्लाम में जातिवाद को मजबूत किया है।
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डॉ. फलाही शनिवार को दलित पसमांदा सामूहिक न्याय परियोजना की ओर से आयोजित इस्लामी सेमिनरी नदवा और देवबंद में भेदभाव विषय पर आयोजित वेबिनार में बोल रहे थे। मुख्य वक्ता डॉ. फलाही ने कहा कि देवबंद मदरसा की स्थापना के पीछे मुख्य विचार अशरफ का उत्थान था, जो उच्च जाति के मुसलमान थे। देवबंद मदरसा के संस्थापक और मुहम्मद कासिम नानौतवी, रफीउद्दीन देवबंदी, सैयद मुहम्मद आबिद, जुल्फिकार अली देवबंदी जैसे इस्लामी विद्वानों ने जाति के आधार पर भेदभावपूर्ण फतवे दिए।
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पसमांदा मुस्लिम जातियों पर रखते हैं वर्चस्व
डॉ. फलाही ने कहा, कुरान कहता है कि सभी व्यक्ति समान हैं और केवल अल्लाह ही सर्वोच्च है। लेकिन देवबंद मदरसा के विद्वानों ने कुरान की व्याख्या की और सैयद, शेख और पठानों को उच्च दर्जा दिया, जो अंसारी, जुलाहा, रईन जैसे पसमांदा मुस्लिम जातियों पर वर्चस्व रखते हैं। मुस्लिमों में जातिगत भेदभाव की जड़ें बेहद गहरी हैं। इसके चलते अंतर-जातीय निकाह अमान्य हो जाते हैं।
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