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#ladengecoronase : दिल्ली को डीआरडीओ की ऑक्सीजन भी मिलेगी, लेकिन फिर भी संकट
Thu, 22 Apr 2021 04:48 AM IST
दुष्यंत शर्मा
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 22 Apr 2021 04:48 AM IST
सार
- केंद्र सरकार ने सैन्य सुरक्षा में इस्तेमाल ऑक्सीजन राष्ट्रीय राजधानी को देने का लिया फैसला
- अगले 72 घंटे तक अस्पतालों में रहेगा ऑक्सीजन का संकट
- ओड़िशा और पश्चिम बंगाल से ऑक्सीजन आने में देरी, दिल्ली सरकार ने भी उठाए सवाल
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
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विस्तार
देश की सुरक्षा में इस्तेमाल ऑक्सीजन जल्द ही राजधानी के अस्पतालों को मिलेगी लेकिन कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए चिंता की खबर है कि अस्पतालों में अभी ऑक्सीजन का संकट कुछ समय और देखने को मिल सकता है। आशंका यहां तक है कि दिल्ली-एनसीआर में अगले तीन दिन तक अस्पतालों को इस मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि बुधवार को किए गए इंतजामों का असर 72 से 75 घंटे बाद ही दिखाई दे सकेगा। तब तक थोड़ी बहुत जरूरत के अनुसार ऑक्सीजन मिलती रहेगी।
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केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने जानकारी दी है कि डीआरडीओ के जरिए सीमावर्ती इलाकों में ऑक्सीजन प्लांट बनाए गए थे जिनका इस्तेमाल सैन्य सुरक्षा में किया जाता था। अभी इस ऑक्सीजन को अस्पतालों में पहुंचाने का फैसला लिया है जिसकी शुरूआत दिल्ली से होगी। यहां के अस्पतालों को अगले कुछ समय में ऑक्सीजन मिलना शुरू हो जाएगा। वहीं दिल्ली में 500 बिस्तर वाले डीआरडीओ के सेंटर और सेना के कोविड अस्पताल को भी यह ऑक्सीजन की आपूर्ति होगी।
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इसके अलावा ओड़िशा और पश्चिम बंगाल से भी ऑक्सीजन रेलमार्ग के जरिए दिल्ली आएगी।हालांकि इस पर दिल्ली सरकार ने प्रतिक्रिया दी है कि राजधानी की वर्तमान स्थिति ऐसी है कि अधिक लंबे समय तक ऑक्सीजन का इंतजार नहीं किया जा सकता है। सरकार ने यहां तक कहा है कि केंद्र ने बड़ी चतुराई दिखाकर बुधवार को 102 मीट्रिक टन अतिरिक्त ऑक्सीजन दिल्ली को देने की घोषणा की है जिनमें से 70 ओड़िशा और 30 मीट्रिक टन ऑक्सीजन पश्चिम बंगाल से आएगी। इन टैंकर को यहां तक आने में 72 घंटे का समय लगेगा जोकि समय के अनुरुप उचित नहीं है।
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आंकड़ों के अनुसार दिल्ली के अस्पतालों में फिलहाल 15 हजार से भी अधिक कोरोना संक्रमित मरीज भर्ती हैं जिनमें से करीब सात से आठ हजार मरीज ऑक्सीजन, आईसीयू या फिर वेंटिलेटर पर हैं। इन मरीजों को कम से कम 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन प्रतिदिन चाहिए लेकिन वर्तमान में 378 मीट्रिक टन ही आपूर्ति हो रही है लेकिन बुधवार को केंद्र सरकार ने इसे बढ़ाकर 480 मीट्रिक टन कर दिया है लेकिन इस 102 मीट्रिक टन के लिए दिल्ली को कम से कम तीन दिन का इंतजार करना होगा क्योंकि यह टैंकर ओड़िशा और पश्चिम बंगाल से आने वाले हैं।
इससे ज्यादा नहीं मिल सकती है ऑक्सीजन
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस वक्त दिल्ली ही नहीं, पूरे देश के हालात गंभीर हैं। देश भर में 7500 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है जिनमें 6700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन राज्यों को मिल रही है। इससे अधिक ऑक्सीजन फिलहाल उपलब्ध नहीं हो स कती है। केंद्र के आगे वह सभी राज्य प्राथमिकता पर हैं जहां कोरोना महामारी की लहर सबसे घातक है। इसमें दिल्ली के अलावा 14 और राज्य भी हैं। उन्होंने कहा कि रेल मंत्रालय की मदद से ऑक्सीजन एक्सप्रेस ओड़िशा और पश्चिम बंगाल से दिल्ली आएगी। कोशिश यही है कि जल्द से जल्द इसे बुलाया जाए लेकिन डीआरडीओ और इन प्रयासों के बाद भी तीन दिन से पहले आपूर्ति नहीं हो सकती।
हर अस्पताल बनाए ऑक्सीजन कमेटी : केंद्र सरकार
स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि हर अस्पताल को एक-एक ऑक्सीजन कमेटी गठित करनी चाहिए। यह कमेटी हर दिन समीक्षा करते हुए यह तय करेगी कि उनके पास कितना ऑक्सीजन का भंडारण है और कितने समय तक वह चल सकता है। इसके अलावा कमेटी यह भी निर्धारित करेगी कि जरूरतमंद मरीज को ही अस्पताल में ऑक्सीजन के लिए भर्ती किया जाए। बिना लक्षण वाले या फिर हल्का असर वाले रोगियों को भर्ती करना उचित नहीं है।
हरियाणा-यूपी की थ्योरी गलत, केंद्र कर रहा मदद
स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिल्ली में ऑक्सीजन की आपूर्ति हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से रोके जाने को लेकर इंकार किया है। इनके मुताबिक यह थ्योरी पूरी तरह से गलत है। स्वास्थ्य मंत्रालय का एक कॉल सेंटर है जहां 24 घंटे काम किया जा रहा है। यहां से ऑक्सीजन टैंकर के आवागमन को लेकर राज्यों के बीच सहयोग स्थापित किया जाता है। मोदी नगर से भी कॉल सेंटर के जरिए टैंकर दिल्ली आया था।
दो दिन पहले दिया था आदेश, फिर भी किल्लत
केंद्र सरकार ने दो दिन पहले दिल्ली को 378 मीट्रिक टन ऑक्सीजन उत्तराखंड, हिमाचल, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड स्थित प्लांट से उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने सोशल मीडिया तक पर इसे साझा किया था जिसमें सात राज्यों को तीन हजार से अधिक मीट्रिक टन ऑक्सीजन की व्यवस्था की थी। इसमें एक दिल्ली भी है लेकिन बुधवार को फिर से आदेश जारी हुआ और गणितीय आकलन दिखाते हुए बताया कि 102 मीट्रिक टन ऑक्सीजन और दे रहे हैं लेकिन इसमें जिन राज्यों का जिक्र किया उसमें ओड़िशा और पश्चिम बंगाल को छोड़ बाकी पुराने आदेश वाले राज्य हैं जहां से अभी तक ऑक्सीजन की आपूर्ति सुचारू नहीं हो पाई है। अब ओड़िशा और पश्चिम बंगाल से आने में भी वक्त लगेगा, इसलिए दिल्ली सरकार इस व्यवहार पर सवाल भी खड़े कर रही है।