दिल्ली हिंसा: नताशा नरवाल, देवांगना कलिता और आसिफ इकबाल तन्हा तिहाड़ जेल से हुए रिहा, बोले- जारी रहेगी कानूनी लड़ाई
तिहाड़ जेल के महानिदेशक संदीप गोयल ने तीनों आरोपियों की जेल से रिहाई की पुष्टि की। जेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कलिता और नरवाल को शाम सात बजे और तन्हा को शाम साढ़े सात बजे जेल से रिहा किया गया।
विस्तार
अदालती आदेश के कुछ घंटों के भीतर ही दिल्ली दंगा मामले में आरोपी नताश नरवाल, देवांगना कलिता और आसिफ इकबाल तन्हा की तिहाड़ जेल से गुरुवार को रिहाई हो गई। हाईकोर्ट के दखल के बाद निचली अदालत ने उनकी तुरंत रिहाई का आदेश दिया। तीनों की रिहाई का आदेश हाईकोर्ट से जमानत मिलने के दो दिन बाद आया। पुलिस ने इन आरोपियों को यूएपीए के तहत मई 2020 में गिरफ्तार किया था।
तिहाड़ जेल के महानिदेशक संदीप गोयल ने तीनों आरोपियों की जेल से रिहाई की पुष्टि की। जेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कलिता और नरवाल को शाम सात बजे और तन्हा को शाम साढ़े सात बजे जेल से रिहा किया गया। इन आरोपियों को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद भी पुलिस वेरीफिकेशन में देरी के कारण जेल से रिहा नहीं किया जा सका था। तीनों की तुरंत रिहाई का आदेश देते हुए निचली अदालत ने कहा कि वेरीफिकेशन में देरी आरोपियों को जेल में रोके रखने का उचित कारण नहीं हो सकता।
हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद अपनी तुरंत रिहाई के लिए आरोपियों ने निचली अदालत में आवेदन दायर किया था। जब निचली अदालत ने आवेदन पर फैसला गुरुवार के लिए स्थगित कर दिया तो इन आरोपियों ने हाईकोर्ट को दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने इस मुद्दे का मुस्तैदी व तत्परता से निपटारा करने का आदेश निचली अदालत को दिया था।
वहीं, दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट से जमानत के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है। दिल्ली पुलिस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को सुनवाई करेगी। अवकाशकालीन न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता एवं न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमण्यम दिल्ली पुलिस की ओर से दायर तीनों अपीलों पर सुनवाई करेगी। पुलिस ने कहा है कि हाईकोर्ट ने गलत फैसला दिया है, जो सोशल मीडिया में चल रहे वृतांत पर आधारित लगता है।
रिहाई के बाद आरोपी बोले जेल में मिला भारी समर्थन
दूसरी ओर से जेल से छूटने के बाद जेएनयू की छात्रा नताशा नरवाल ने कहा कि उन्हें जेल में भारी समर्थन मिला और वे अपना संघर्ष जारी रखेंगे। जेएनयू छात्रा नताशा नरवाल और देवांगना कलिता ने अपने मित्रों और समर्थनों का धन्यवाद, जो उनकी एक साल बाद रिहाई के मौके पर काफी संख्या में जेल के बाहर इकट्ठा हुए थे।
पिंजरा तोड़ महिला समूह की कार्यकर्ता नताशा नरवाल ने हाईकोर्ट को जमानत देने के लिए धन्यवाद करते हुए कहा कि जब उन्हें गिरफ्तार किया गया तो उन्हें कई माह ये विश्वास करने में लगे कि उन्हें इतने संगीन आरोपों में गिरफ्तार किया गया है।
वहीं देवांगना कलिता ने कहा कि अपनी आवाज उठाने के लिए लोगों को जेलों में बंद कर देते हैं। वे लोगों की आवाज और विरोध को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। हमें जेल में लोगों का भारी समर्थन मिला जिससे हमें वहां बचे रहने में मदद मिली। जेल से रिहाई में देरी पर कलिता ने कहा कि इस पर विश्वास नहीं होता, क्योंकि उन्हें दो-तीन पहले ही जमानत मिल गई थी। तब भी हम जेल में थे। हमें उम्मीद थी कि कोई पुलिस अधिकारी आएगा और हमें गिरफ्तार कर लेगा।