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dilli darbar : उपराज्यपाल ने दिल्ली सरकार की कार्यशैली पर उठाए सवाल, मोरे का मंत्री पर आरोप

Sat, 20 May 2023 05:48 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 20 May 2023 05:48 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद के सियासी हालात को उपराज्यपाल ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में अराजक करार दिया है। 

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Delhi : the lieutenant governor raised questions on the working style of the delhi government
एलजी वीके सक्सेना - फोटो : ANI

विस्तार

उपराज्यपाल वीके सक्सेना व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बीच शुक्रवार को किया गया पत्राचार तनाव बढ़ाने वाला रहा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद के सियासी हालात को उपराज्यपाल ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में अराजक करार दिया है। 

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उपराज्यपाल के मुताबिक, संवैधानिक पीठ के फैसले के बाद से दिल्ली सरकार और मंत्री नियमों व प्रक्रियाओं की अनदेखी करते हुए अधिकारियों को डराने व धमकाने के साथ आनन-फानन में फैसले ले रहे हैं। अपने पत्र में उपराज्यपाल ने खासतौर से सेवा विभाग के मंत्री सौरभ भारद्वाज के नाम का भी जिक्र किया है। 
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वहीं, जवाबी पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि उपराज्यपाल के पत्र की भाषा लड़ाई की है। अगर सौरभ ने कोई गलती है तो बुलाकर उपराज्यपाल डाट सकते हैं, लेकिन वे दिल्लीवालों का काम करने की इजाजत चुनी हुई सरकार को दे दें।
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पत्र में उपराज्यपाल ने लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद से दिल्ली सरकार व मंत्री खासतौर से सेवा विभाग के सौरभ भारद्वाज असंवैधानिक, बेशर्म, डराने वाले और नियमों का अनादर करने वाले कार्याें में उलझे हुए हैं। फैसला आने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए उपराज्यपाल ने लिखा है कि वह फैसले का अध्ययन करने के बाद अधिकारियों से पालन करवाएंगे। इसके लिए उन्होंने दो से तीन दिन का वक्त देने की बात कही थी। 

साथ ही, यह भी कहा था कि मुख्यमंत्री फोन पर उनसे बातचीत कर सकते हैं। उपराज्यपाल ने आगे लिखा है कि शक्तियां बढ़ने के साथ ही जिम्मेदारियों भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में सरकार कोे नैतिक और संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए। इसके बावजूद मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने नाटकीय व्यवहार और पेचीदा अंदाज मेंं न्यायालय के आदेश पर जल्दबाजी में हंगामा करना शुरू कर दिया। इसमें नियमों की भी अनदेखी की गई है। लगातार मीडिया का दबाव भी बनाया जा रहा है, ताकि मंत्री (सेवा) की सिफारिशों को सोचे बिना लागू कर दिया जाए। इसके लिए अधिकारियों को धमकी दी गई, ताकि मंत्रियों की मनमानी का साथ दें।

हालिया घटनाक्रम पर एलजी ने उठाए सवाल

  • एक सप्ताह के दौरान जो सामने आया इससे कहा जा सकता है कि शासन को उदासीन, संगठित और राजनीतिक कार्यपालिका की मनमानी का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
  • भारत का संविधान प्रशासन को नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करने करने के लिए प्रावधानों का पालन करने के लिए बाध्य करता है। प्रावधानों के तहत अधिकारियों को कर्तव्य का अधिकतम निर्वहन करना है।
  • दो दशकों से सेवा अधिकारियों के साथ हुए दुर्व्यवहार को विस्तार से बताते हुए पेशेवर अनुभवों की कमी का हवाला दिया है। सेवा मंत्री सौरभ भारद्वाज की ओर से दिए गए डिक्टेशन पर अधिकारियों को हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया। दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को पद से हटाने के लिए सिविल सेवा बोर्ड के दो सदस्यों पर अनुचित प्रभाव डालने के आरोप लगाए गए हैं। यह 16 मई को स्पष्ट हो जाती है। कई बार अनुचित और अनुचित के अनुमोदन के लिए भी दबाव बनाए जाते रहे हैं। 

आशीष मोरे ने मंत्री पर लगाया धमकाने का आरोप
आशीष मोरे ने विभागीय मंत्री सौरभ भारद्वाज के व्यवहार पर सवालिया निशाना लगाया है। मंत्री पर उत्पीड़न और नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए मोरे ने एक शिकायती पत्र मुख्य सचिव के साथ उपराज्यपाल व केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा है। पत्र में मोरे ने यह भी कहा है कि उनके विभाग की एक महिला आईएएस अधिकारी भी मंत्री के व्यवहार से परेशान हैं और शिकायत उच्चाधिकारियों से करेंगी। पत्र में आरोप लगाया गया है कि दोनों अधिकारी अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखते हैं। मंत्री के डिक्टेशन पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव के बावजूद मोरे ने इससे इंकार कर दिया। सचिव ने सुरक्षा की भी मांग की है। 

कुछ भी बोल सकते हैं मोरे : भारद्वाज
सौरभ भारद्वाज ने सर्विसेज सेक्रेटरी आशीष मोरे के उत्पीड़न करने के आरोप पर कहा कि वे कुछ भी कह सकते हैं। इस पर मैं क्या कर सकता हूं। यह ऑन रिकॉर्ड है कि 11 मई को मंत्री ने आदेश दिया और मोरे यह बोलकर गए कि 3 बजे तक आदेश का पालन करूंगा, लेकिन गायब हो गए। उनके पास एक पत्र भिजवाया गया, लेकिन उनकी पत्नी ने कहा कि वे घर के अंदर नहीं हैं, जबकि वे घर के अंदर ही थे। 



मुख्य सचिव ने जान से मारने की दी धमकी : भारद्वाज
नई दिल्ली। उपराज्यपाल से मुलाकात के बाद सौरभ भारद्वाज ने कहा कि उन्होंने उपराज्यपाल ने मुख्य सचिव नरेश कुमार की शिकायत की है। आरोप है कि 16 मई की रात 9ः30 बजे तक वे सिविल सेवा बोर्ड की बैठक के लिए मुख्य सचिव का इंतजार करते रहे। इस दौरान मुख्य सचिव को मोबाइल पर संदेश भी भेजा। रात करीब 9ः30 जब मुख्य सचिव लौटे तो उन्होंने केबिन में आकर जान से मारने की धमकी दी। उपराज्यपाल ने इस पर कार्रवाई करने की बात कही है। ब्यूरो 

दिल्लीवालों को हैं उम्मीदें, काम करने दें उपराज्यपाल : सीएम
केजरीवाल ने उपराज्यपाल वीके सक्सेना को पत्र लिखकर कहा कि दिल्लीवालों ने हमें काम करने के लिए बहुमत दिया है। हमें काम करने दें। आज आपका पत्र मिला, इसे पढ़कर स्तब्ध हूं। इसमें जो भाषा का इस्तेमाल है, उसे देखकर लगता है कि आप लड़ना चाहते हैं। दिल्ली के लोग कई वर्षों से न्याय की राह देख रहे थे। कई वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद दिल्लीवालों को माननीय सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिला है। हम से दिल्लीवालों को बहुत उम्मीदें हैं। हमें दिल्ली को दुनिया का नंबर वन शहर बनाना है। सौरभ ने कुछ गलत कहा तो यह मैं मान ही नहीं सकता। सौरभ इतना शांत और सौम्य स्वभाव का व्यक्ति है, लेकिन अगर उसने किसी को कुछ कहा भी तो वो आपका छोटा भाई है, उसे बुलाकर डांट लीजिए।

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