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दिल्ली: आय से अधिक संपत्ति मामले में केनरा बैंक की पूर्व अधिकारी के खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट पर सीबीआई को कड़ी फटकार, दोबारा जांच के आदेश

Tue, 04 Jan 2022 06:44 PM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुराग सक्सेना Updated Tue, 04 Jan 2022 06:44 PM IST
सार

यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की पूर्व अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक और केनरा बैंक के कार्यकारी निदेशक अर्चना भार्गव पर उनके लिए और उनके पति व बेटे के स्वामित्व वाली कंपनी रैंक मर्केंटाइल प्राइवेट लिमिटेड के लिए पद का दुरुपयोग करने का आरोप है।

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Delhi: Strong reprimand for CBI on closure report against former officer of Canara Bank and Union Bank in disproportionate assets case, orders for re-investigation
सीबीआई - फोटो : पीटीआई

विस्तार

अदालत ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में जांच के तहत केनरा बैंक और यूनियन बैंक के एक पूर्व अधिकारी के खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने पर सीबीआई को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि आरोपी ने 1.15 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रथम दृष्टया कानूनी नहीं बल्कि केवल अवैध धन को छिपाने का प्रयास था ऐसे में गहन जांच जरूरी है। अदालत ने सीबीआई को मामले में पुन: जांच के आदेश दिए है।

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यह मामला इस आरोप पर दर्ज किया गया था कि यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की पूर्व अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक और केनरा बैंक के कार्यकारी निदेशक अर्चना भार्गव ने अपने लिए और अपने पति और बेटे के स्वामित्व वाली कंपनी रैंक मर्केंटाइल प्राइवेट लिमिटेड के लिए अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया। आरोपी ने उनकी कंपनियों को गलत तरीके से बैंकों से ऋण प्रदान किया गया।

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क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करने से इंकार

विशेष न्यायाधीश हरीश कुमार ने क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि एजेंसी को आरएमपीएल के बढ़ते कारोबार और बैंकों द्वारा दिए गए विभिन्न ऋणों के लाभार्थियों के बीच कोई संबंध नहीं मिला है, जिसमें अर्चना भार्गव ईडी (कार्यकारी निदेशक) या सीएमडी थीं।

अदालत ने स्पष्ट किया कि साक्ष्यों से स्पष्ट है कि 1.15 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रथम दृष्टया कानूनी नहीं है बल्कि केवल अवैध धन को छिपाने का प्रयास था। अदालत ने कहा यह अजीब है कि सीबीआई जैसी जांच एजेंसी ने जांच के दौरान लेनदेन में किसी भी अवैधता पर ध्यान नहीं दिया जबकि गहन जांच के लिए पर्याप्त सामग्री है।

अदालत ने कहा- केवल भार्गव की संलिप्तता खोजने के प्रयास हुए

अदालत ने कहा प्रतीत होता है कि सीबीआई ने केवल भार्गव की संलिप्तता के लिए सबूत खोजने का प्रयास किया, न कि लेनदेन की आगे की जांच करने के लिए। उन्होंने कहा कि फर्जी कंपनियों, धोखाधड़ी, गलत बयानी, हवाला लेनदेन, हवाला लेनदेन को कानूनी लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग आदि में बदलने के लिए दस्तावेजों को बनाने के पूर्ण साक्ष्य है।

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