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शहर बढ़ा, सुविधाएं नहीं: 20 साल में दिल्ली की आबादी बढ़ी 60 लाख, अस्पताल मिले सिर्फ दो, प्राथमिक स्वास्थ्य में बड़ा बदलाव
Sun, 05 Dec 2021 01:12 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Sun, 05 Dec 2021 01:12 AM IST
सार
दिल्ली में साल 2001 से 2021 के बीच सात नए अस्पतालों का हुआ शिलान्यास। लेकिन सुविधा शुरू केवल दो में ही हो सकी। मोहल्ला क्लिनिक से लाखों की आबादी को फायदा हुआ है। लोगों को छोटी छोटी बीमारियों का इलाज अपने घर के पास ही मिल जाता है।
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बेड के अभाव में स्ट्रेचर पर लेटा मरीज
- फोटो : amar ujala
विस्तार
समय के साथ विकास की रफ्तार ले रही दिल्ली में पिछले 20 साल के दौरान करीब 50 फीसदी आबादी बढ़ी है लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता अभी भी आम आदमी के लिए चुनौतियों से कम भी नहीं। साल 2001 से 2021 के बीच दिल्ली वालों को दो सरकारी अस्पताल मिले हैं जिनमें से एक राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल है और दूसरा बुराड़ी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल। वहीं छह से अधिक अस्पताल साल 2010 के बाद से अब तक निर्माणाधीन चल रहे हैं। इन सब के बीच पहले से मौजूद अस्पतालों के विस्तार पर काम भी तीन साल पहले से ही शुरू हुआ है।
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2001 की जनगणना के मुताबिक, दिल्ली की आबादी 1.38 करोड़ थी। 2011 में यह आंकड़ा 1.67 करोड़ पार हुई। बीते दस सालों की जनसंख्या वृद्धि के हिसाब से दिल्ली में करीब अभी करीब दो करोड़ लोग रहते हैं। सीधा मतलब है कि बीते बीस सालों में दिल्ली की जनसंख्या में करीब 62 लाख की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।
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इसी अवधि में अस्पतालों की संख्या भी 34 से बढ़कर 36 तक पहुंची है। जबकि बिस्तरों की संख्या 12,000 से बढ़कर 18,000 पहुंच गई है। कोविड के दौर विकसित बेड इसमें शामिल हैं। दिल्ली में केंद्र और नगर निगम की भूमिका भी अहम है। इनके भी कोई नए अस्पताल शुरू नहीं हुए हैं। हालांकि, प्राथमिक उपचार को लेकर बात की जाए तो मोहल्ला क्लिनिक के जरिए प्राथमिक स्तर पर इलाज की सुविधाएं बेहतर हुई हैं। लोगों को अपने घर के पास छोटी-छोटी बीमारियों का इलाज मिल जाता है। वहीं, अपने अस्पतालों में दिल्ली सरकार ने चिकित्सा सुविधा भी मुफ्त कर रखी है। दूसरी तरफ कोविडजनित चुनौती ने दिल्ली को क्षमता विस्तार का मौका दिया। बीते करीब दो सालों में डायग्नोस्टिक व अस्पतालों में बेड के साथ गंभीर चिकित्सा देखभाल (आईसीयू) सेवा की क्षमता में विस्तार हुआ है।
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विशेषज्ञों की राय
बीते 20 साल में दिल्ली की सूरत बदलते हुए देखी है। अगर आबादी के लिहाज से बात करें तो स्वास्थ्य सेवाओं में अधिक विस्तार नहीं हुआ है लेकिन जितनी संख्या मरीजों की बढ़ी है वह आबादी से भी अधिक आश्चर्य करती है। पहले की तुलना में अब मरीज करीब 60 से 70 गुना अधिक बढ़े हैं और स्वास्थ्य को लेकर जागरुकता भी काफी तेजी से आई है। -डॉ. कीर्तिभूषण, पूर्व स्वास्थ्य महानिदेशक, दिल्ली सरकार
आबादी की तुलना में स्वास्थ्य सेवाओं को कम हुआ है। कई अस्पताल तो ऐसे हैं, जो 40 सालों में भी बदले नहीं है। हम बचपन से उन्हें देखते आ रहे हैं और इसमें लोकनायक या फिर लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज जैसे अस्पताल शामिल हैं। सरकारी अस्पतालों में भी प्राइवेट की भांति बिलिंग की सुविधा होनी चाहिए। एक सर्वे के अनुसार जीबी पंत अस्पताल में प्रतिदिन एक मरीज पर 20 से 22 हजार रुपये का खर्च सरकार करती है। चूंकि यह निशुल्क सेवा है इसलिए लोगों को इसके बारे में पता नहीं होता। लोगों को सरकारी व्यवस्था के बारे में बताने के लिए बिलिंग होनी चाहिए। फिर चाहें तो बिल पर सबसे नीचे नि:शुल्क लिख दिया जाए। -डॉ. गिरधर ज्ञानी, महानिदेशक, एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स
इन अस्पतालों में हो रहा विस्तार
. दीप चंद बंधु अस्पताल, अशोक विहार
. भगवान महावीर अस्पताल, पीतमपुरा
. अरुणा आसफ अली अस्पताल, नई दिल्ली
. राव तुलाराम अस्पताल, जाफरापुर
. आचार्य श्रीभिक्षु अस्पताल, मोती नगर
. संजय गांधी अस्पताल, मंगोलपुरी
यह अस्पताल भी मिलेंगे जल्द
. इंदिरा गांधी सुपर स्पेशलिटी, द्वारका
. अंबेडकर नगर अस्पताल
यहां बन रहे है 275 करोड़ में नए अस्पताल
. सुल्तानपुरी, किराड़ी, संगम विहार, रघुबीर नगर और शालीमार बाग में नए अस्पतालों का निर्माण चल रहा है।
. दिल्ली में सरकारों के दावे चाहे कुछ भी हो लेकिन आम आदमी को अस्पताल में इलाज इतनी आसानी से नहीं मिलता है। पहले आधार कार्ड दिखाकर थोड़ी बहुत सुनवाई हो जाती थी अब तो जिस भी अस्पताल में जाएं वहां बिस्तर न होने का हवाला देते हैं। डॉक्टरों से ज्यादा नर्स और अन्य स्टाफ ऐसे बर्ताव करता है जैसे आम व्यक्ति वहां इलाज लेने नहीं उन्हें परेशान करने जा रहा हो। दिल्ली में इतने अस्पताल होने के बाद भी समय पर वेंटिलेटर, आईसीयू तक नहीं मिल पाता है। मैं खुद इन परिस्थितियों का सामना कर चुका हैं। राजीव गांधी अस्पताल में कई दिन से डायलिसिस भी बंद है। अब जांच के लिए भी डॉक्टर प्राइवेट लैब तक नहीं भेजते हैं। -पंकज वत्स, निवासी, रोहिणी सेक्टर 21