दिल्ली: सुकेश चंद्रशेखर मामले पर ईओडब्ल्यू के एसीपी ने कहा- हमने मामले में संलिप्त सभी लोगों को गिरफ्तार किया
सुकेश चंद्रशेखर ने तिहाड़ जेल से रेलिगेयर इंटरप्राइजेज के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह की पत्नी अदिति सिंह से दो सौ करोड़ की ठगी की थी। आरोपी ने वित्तीय अनियमितताओं के मामले में जेल में बंद शिविंदर सिंह को जमानत दिलाने की बात कही थी। आरोपियों की पहचान रोहिणी जेल अधीक्षक सुनील कुमार व सुरिंदर चंद्र बोरा, उपाधीक्षक महेंद्र प्रसाद व लक्ष्मी दत्त और सहायक अधीक्षक प्रकाशचंद के रूप में हुई है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जालसाज सुकेश चंद्रशेखर के रोहिणी जेल से दो सौ करोड़ की ठगी करने के मामले में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (एसीपी) आरके सिंह ने कहा है कि हमने इस मामले में संलिप्त सभी लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।
उन्होंने बताया कि इस केस को पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल देख रही थी। उन्होंने रोहिणी जेल में छापा मारा जिसके बाद सुकेश और एक अन्य आरोपी गिरफ्तार किए गए। इसके बाद यह मामला ईओडब्ल्यू को भेजा गया। फिर हमने इस मामले में संलिप्त सभी लोगों को गिरफ्तार किया। उन्होंने बताया कि हमने दो नवंबर को कोर्ट में 14 लोगों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर दी है। आगे जांच चल रही है।
ये है मामला
सुकेश चंद्रशेखर ने तिहाड़ जेल से रेलिगेयर इंटरप्राइजेज के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह की पत्नी अदिति सिंह से दो सौ करोड़ की ठगी की थी। आरोपी ने वित्तीय अनियमितताओं के मामले में जेल में बंद शिविंदर सिंह को जमानत दिलाने की बात कही थी। आरोपियों की पहचान रोहिणी जेल अधीक्षक सुनील कुमार व सुरिंदर चंद्र बोरा, उपाधीक्षक महेंद्र प्रसाद व लक्ष्मी दत्त और सहायक अधीक्षक प्रकाशचंद के रूप में हुई है।
शाखा के अधिकारियों के अनुसार अदिति सिंह की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच के बाद पुलिस ने रोहिणी जेल में बंद सुकेश चंद्रशेखर को गिरफ्तार कर लिया था। बाद में पुलिस ने उसकी पाटर्नर लीना समेत चार अन्य आरोपियों मैथ्यूज, कमलेश कोठारी, अरुण मुथु और बी मोहन राज को भी गिरफ्तार कर लिया। जालसाजी के मामले में गिरफ्तार सुकेश रोहिणी जेल से ही मोबाइल फोन के जरिए ठगी को अंजाम दे रहा था।
जांच में पता चला कि आरोपी जेल में तैनात अधिकारियों की मिलीभगत से ठगी कर रहा था। जेल प्रशासन ने अपने स्तर पर जेल अधिकारियों की मिलीभगत की जांच की, जिसमें पांच अधिकारियों की संलिप्तता सामने आने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया था। उधर, आर्थिक अपराध शाखा ने गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की, जिसमें भी जेल के पांचों अधिकारियों की संलिप्तता की बात सामने आई।