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दिल्ली का बढ़ता तापमान नित बना रहा है रिकॉर्ड, पांच साल में सबसे गर्म रही 18 फरवरी
Fri, 19 Feb 2021 05:18 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 19 Feb 2021 05:18 AM IST
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मौसमी परिस्थितियों में बदलाव के साथ ही तापमान बढ़ने लगा है। बृहस्पतिवार को राजधानी का तापमान 27 डिग्री सेल्सियस पार कर गया। यह आंकड़ा पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक रहा है। शनिवार को भी आसमान साफ रहने के साथ अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।
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प्रादेशिक मौसम विभाग के अनुसार, बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान सामान्य से चार अधिक 27.8 व न्यूनतम तापमान सामान्य से एक कम 9.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अधिकतम तापमान में वृद्धि होने के कारण दोपहर में लोगों को अधिक गर्मी का अहसास हुआ।
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हालांकि, शाम होते-होते लोगों ने हल्की सर्दी महसूस की। बीते 24 घंटों में हवा में नमी का अधिकतम स्तर 100 व न्यूनतम 52 फीसदी रहा। इस वजह से दिल्ली के विभिन्न इलाकों में अलसुबह हल्का कोहरा भी दर्ज किया गया।
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राजधानी की हवा में आंशिक सुधार
बदलते मौसम के साथ राजधानी की हवा में आंशिक सुधार हुआ है। सुधार के बाद हवा बहुत खराब श्रेणी के निचले स्तर पर दर्ज हुई है। वहीं, एनसीआर में गुरुग्राम को छोड़कर सभी शहरों की हवा बहुत खराब श्रेणी में रही। शुक्रवार को भी हवा बहुत खराब श्रेणी के निचले स्तर पर बनी रहेगी।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, बृहस्पतिवार को राजधानी का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 302 दर्ज किया गया। इससे एक दिन पहले यह 324 दर्ज किया गया था। पिछले 24 घंटों में हवा में पीएम 10 का स्तर 274 व पीएम 2.5 का स्तर 130 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया।
खराब हवा ने पिछले साल लीं कई जानें
एक अध्ययन के मुताबिक पिछले साल खतरनाक पीएम 2.5 (पार्टिकुलेट मैटर) के कारण दिल्ली में ही 54000 मौतें हुईं। वायु प्रदूषण का स्तर डब्ल्यूएचओ के तय मानक से तकरीबन छह गुणा ज्यादा था। ग्रीनपीस दक्षिणपूर्व एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में प्रति दस लाख 1800 मौतें पीएम2.5 वायु प्रदूषण के कारण अनुमानित है।
अध्ययन में पीएम 2.5 वायु प्रदूषण की वजह से 2020 में भारत की राष्ट्रीय राजधानी में तकरीबन 54000 मौतों का दावा किया गया है। भारत के अन्य शहरों में भी वायु प्रदूषण से मौतों की यही स्थिति रही। 2020 में मुंबई में 25000 मौतें होने का अनुमान है जबकि बंगल्रूरू, चेन्नई, हैदरबाद और लखनऊ में क्रमश: 12000, 11000, 11000 और 6700 मौतें हुईं। रिपोर्ट के अनुसार जीवाश्म इंधन के जलने से पैदा होने वाले सूक्ष्म पीएम 2.5 के प्रभाव का अध्ययन किया गया है।