कोरोना का एक सालः लापरवाही बरती तो फिर मिलेगी चुनौती, टला नहीं है खतरा
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दिल्ली में कोरोना संक्रमण का पहला मामला दो मार्च को आया था। एक साल में 6.39 लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं और इनमें से 98 फीसदी लोगों ने कोरोना को चित भी किया। अफसोस है कि इस महामारी से 10,910 लोग अपनी जिंदगी से हाथ धो बैठे। दिल्ली देश का पहला राज्य रहा, जिसने संक्रमण की तीन लहर का सामना किया। एक साल में कोरोना के कई उतार-चढ़ाव देखती दिल्ली में हालात फिलहाल काबू में हैं, लेकिन लापरवाही बरती तो यह वायरस फिर से चुनौती दे सकता है। पिछले कुछ दिनों में फिर से केस बढ़ रहे हैं। यह आमजन की लापरवाही का ही नतीजा है।
दिल्ली में इटली से लौटे मयूर विहार निवासी एक व्यक्ति को 28 फरवरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां 2 मार्च को उसमें कोरोना की पुष्टि हुई थी। पहले मामले के बाद से ही सरकार अलर्ट मोड में आ गई थी। पिछले साल इस महामारी के कई रूप देखने को मिले, जिसमें सबसे खतरनाक रहा नवंबर का महीना। जब रोजाना औसतन 6 हजार से ज्यादा मामले आ रहे थे और 90 से ज्यादा लोगों की मौत हो रही थी। उस दौरान यह महामारी काफी विकराल रूप ले रही थी ,लेकिन सरकार ने तीन मॉडल (होम आइसोलेशन, रिकॉर्ड जांच, प्लाज्मा थैरेपी) के जरिए इस वायरस पर लगाम लगाई।
औसतन 1000 जांच में 3 संक्रमित
अब जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं के बेहतर तरीके से लागू होने से संक्रमण दम तोड़ता नजर आ रहा है। औसतन रोजाना 1000 टेस्ट करने पर महज 03 संक्रमित मिल रहे हैं। साथ ही मृत्युदर भी 1.6 फीसदी बनी हुई है। सक्रिय मामले भी 1335 ही बचे हैं। सोमवार से आम लोगों का टीकाकरण भी शुरू हो रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि जिस प्रकार देश के कई राज्यों में मामले बढ़ रहे हैं। उससे दिल्ली के निवासियों को भी सतर्क रहना चाहिए और कोरोना से बचाव के नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए।
कोरोना के चलते देखा पलायन
कोरोना के कारण देश में लॉकडाउन लगा। दिल्ली में काम करने वाले कई राज्यों के लोगों ने यहां से पलायन करना शुरू कर दिया था। उस दौरान राजधानी की सड़कों पर सैकड़ों लोगों की भीड़ दिखाई दी थी। इनमें दिहाड़ी मजदूर, कारीगर-मिस्त्री, छोटी-दुकानों पर काम करने वाली लेबर और रिक्शा चालक शामिल थे। ये लोग लॉकडाउन के बाद काम धंधा बंद होने के चलते गांव चले गए थे, लेकिन अब तेजी से जिंदगी पटरी पर लौट रही है।
सरकार ने उठाए ये कदम...
- रोजाना औसतन 80 हजार से ज्यादा जांच
- घर-घर जांच अभियान चलाकर संक्रमितों की पहचान
- होम आईसोलेशन में बेहतर सुविधा
- पांच हजार आईसीयू बेड बढ़ाए
- एंबुलेंस की संख्या दोगुनी की गई
- अस्पतालों के नियमित निरीक्षण के लिए समिति बनाई गई
- निजी अस्पतालों में 80 फीसदी बेड कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित किए गए
- आरटी-पीसीआर जांच बढ़ाकर 50 फीसदी की गई। इससे संक्रमितों की सही पहचान हो सकी
- दिल्ली के लोकनायक, जीटीबी, राजीव गांधी अस्पताल को कोविड विशेष घोषित किया गया
एक साल की यह लड़ाई रही चुनौतीपूर्ण
कुल मरीज 6,39,289
स्वस्थ हुए 6,27,044
मौतें 10919
रिकवरी दर 98
संक्रमण दर 0.34
देश में दिल्ली की स्थिति
- प्रति 10 लाख की आबादी पर देश में सबसे ज्यादा जांच
- सबसे पहले होम आईसोलेशन में क्लज की सुविधा दिल्ली में ही शुरू हुई
- देश का सबसे पहला प्लाज्मा बैंक दिल्ली में बना
संख्या कब से कब तक कुल दिन
एक हजार 2 मार्च से 11 अप्रैल 40
एक लाख 12 अप्रैल से 6 जुलाई 86
दो लाख 07 जुलाई से 9 सिंतबर 65
तीन लाख 10 सिंतबर से 8 अक्तूबर 29
चार लाख 9 अक्तूबर से तीन नवंबर 26
पांच लाख 04 नवंबर से 18 नवंबर 15
छह लाख 19 नवंबर से 10 दिसंबर 22
मौतें
संख्या कब से कब तक कुल दिन
एक हजार 14 मार्च से 11 जून 58
दो हजार 12 से 19 जून 08
तीन हजार 20 जून से 4 जुलाई 15
चार हजार 05 जुलाई से 2 अगस्त 29
पांच हजार 03 अगस्त से 21 सिंतबर 50
छह हजार 22 सिंतबर से 18 अक्तूबर 27
सात हजार 19 अक्तूबर से 9 नवंबर 22
आठ हजार 10 से 19 नवंबर 10
नौ हजार 20 से 29 नवंबर 10
10 हजार 30 से 12 दिसंबर 12
रिकॉर्ड
एक दिन में सबसे ज्यादा मरी 11 नवंबर को 8593
एक दिन में सबसे ज्यादा मरीज स्वस्थ 20 नवंबर को 8775
एक दिन में सबसे ज्यादा मौतें 18 नवंबर को 131
रिकॉर्ड
एक दिन में सबसे ज्यादा मरी 11 नवंबर को 8593
एक दिन में सबसे ज्यादा मरीज स्वस्थ 20 नवंबर को 8775
एक दिन में सबसे ज्यादा मौतें 18 नवंबर को 131
ये थी तीन लहर
पहली लहर : 23 जून को, सबसे ज्यादा 3947 मरीज मिले और 68 लोगों की मौत हुई थी।
दूसरी लहर: 16 सिंतबर को, जब एक दिन में सबसे ज्यादा 4473 मरीज मिले और 33 लोगों की मौत हुई थी।
तीसरी लहर: 11 नवंबर को, 8953 संक्रमित मरीज मिले थे और 79 लोगों की मौत हुई थी।
सबसे ज्यादा मरीज 1,82,010 नवंबर में
सबसे ज्यादा मौतें 2698 नवंबर में
दिल्ली में कोरोना संक्रमण काबू में है। इसका बड़ा कारण है कि आबादी का एक बड़ा हिस्सा संक्रमित होकर स्वस्थ हो चुका है। संक्रमित हुए 98 फीसदी लोग स्वस्थ हो चुके हैं। अस्पतालों में भी अधिकतर वही मरीज भर्ती है, जो पुरानी बीमारियों से पीड़ित हैं। हालांकि, अभी भी सावधानी बरतने की जरूरत हैं।
डॉ. अजीत जैन, कोविड नोडल अधिकारी, राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल