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Swadeshi Rakhi : इस बार पहली पसंद बनी स्वदेशी राखी, रक्षा के चीनी बंधन को पछाड़ 7 हजार करोड़ का कारोबार

Fri, 12 Aug 2022 04:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 12 Aug 2022 04:19 AM IST
सार

Swadeshi Rakhi :  लोकल फॉर वोकल अभियान ने इस वर्चस्व को कम किया व लोगों ने स्वदेशी राखी खरीदने में ज्यादा विश्वास दिखाया। इस तरह से चीन को राखी के व्यापार में तगड़ा झटका लगा है। व्यापार जगत का दावा है कि पूरे देश में स्वदेशी राखी का करीब सात हजार करोड़ का कारोबार हुआ। 

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Delhi News : Chinese rakhi beaten, indian rakhi business worth Rs 7 thousand crore
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

चीनी राखी ने इस वर्ष अपना बाजार खो दिया है। लोकल फॉर वोकल अभियान ने इस वर्चस्व को कम किया व लोगों ने स्वदेशी राखी खरीदने में ज्यादा विश्वास दिखाया। इस तरह से चीन को राखी के व्यापार में तगड़ा झटका लगा है। व्यापार जगत का दावा है कि पूरे देश में स्वदेशी राखी का करीब सात हजार करोड़ का कारोबार हुआ। 
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चीन निर्मित सामान का दबदबा इतना ज्यादा हो गया था कि दैनिक जीवन में भी लोग चीनी सामानों का उपयोग कर रहे थे। यहां तक कि पर्व व त्योहारों के मौके पर इसकी बिक्री जमकर होती थी, लेकिन इस साल रक्षा बंधन पर स्थिति उलट रही। इस बार चीनी राखी के बजाय स्वदेश निर्मित राखी की बिक्री ज्यादा हुई। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने दावा किया कि चीन निर्मित सामान से लोगों का विश्वास कम हो रहा है।
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महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने एक अनुमान के आधार पर बताया कि इस बार रक्षाबंधन पर स्वदेशी राखी का 7 हजार करोड़ रुपये का व्यापार हुआ है। वैदिक राखी के उपयोग का भी आह्वान किया गया था। ताकि प्राचीन संस्कृति और राखी त्योहार की पवित्रता को पुनर्जीवित किया जाए। लोगों ने स्वदेशी राखी खरीदने में रुचि दिखाई है। 
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खूब बिकी वैदिक राखी ः इस वर्ष वैदिक राखी की धूम रही। इसमें दूर्वा, अक्षत, केसर, चंदन और सरसों के दाने को रेशम के कपड़े में सिलकर कलावा बनाया गया था। इन पांच चीजों का वैदिक महत्व है, जो परिवार की रक्षा और उपचार से संबंधित है। दूर्वा भगवान गणेश को प्रिय है और यह दर्शाता है कि बहनों के भाई अपने जीवन में बाधाओं को नष्ट कर देंगे और सभी बड़ों की भक्ति कभी भी बर्बाद नहीं होगी। लिहाजा लोगों ने भी इस तरह की राखी को पसंद किया। 

रक्षाबंधन : मेट्रो व बसों में रही बहनों की भीड़
रक्षाबंधन के मौके पर मेट्रो व बसों में बहनों की जबर्दस्त भीड़ रही। अपने भाइयों के घर पहुंचने के लिए बहनें बस स्टॉप एवं मेट्रो स्टेशन पर दिनभर छाई रहीं। पर्व को देखते हुए दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) ने सड़कों पर सभी सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसें उतार दी तो मेट्रो ने भी त्योहार के मौके पर खास इंतजाम किए थे। 

सभी बस स्टॉप पर सुबह से ही महिलाओं की भीड़ दिखी और यह सिलसिला शाम तक चलता रहा। उधर, दूसरे शहरों में आने जाने वालों की बस अड्डों पर भीड़ रही।
रक्षाबंधन के मौके पर दिल्ली मेट्रो ने दो लाइनों को छोड़, शेष सभी लाइनों पर अतिरिक्त मेट्रो, टिकट काउंटर और कर्मियों को मुस्तैद किया गया था। सुबह से ही बस, मेट्रो, ऑटो और कैब में यात्रियेें की खूब भीड़ रही। कुछ स्टॉप पर महिलाओं को बस के लिए थोड़ा इंतजार भी करना पड़ा।

बसों में निशुल्क सफर की सुविधा होने के कारण महिलाओं को और अधिक सहूलियत हुई। शाम के वक्त सड़कों पर भीड़भाड़ और वाहनों की भारी भीड़ से लगने वाले जाम से गंतव्य तक पहुंचने में लोगों को थोड़ी देरी भी हुई। 


सार्वजनिक जगहों पर दिखी लापरवाही
त्योहार पर सड़कों पर भी हर तरफ जाम का माहौल रहा। मार्केट और सड़कों पर हर तरफ लोग ही लोग नजर आ रहे थे। हालांकि इनमें से अधिकतर लोगों ने मास्क नहीं लगाए थे। दिल्ली में सार्वजनिक स्थलों पर मास्क पहनना अनिवार्य किए जाने के बाद कुछ जगहों पर इसका असर दिखा। बसों में अभी तक मास्क पहनना अनिवार्य नहीं किए जाने से कुछ जगहों पर बेफिक्री भी दिखी। 
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