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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi-NCR air get Poisoned Stubble burning contributes to 36 percent of PM 2.5 pollution AQI in severe category due to crackers

जहरीली हुई दिल्ली-एनसीआर की हवा: पीएम 2.5 प्रदूषण में 36 प्रतिशत पराली जलने का योगदान, पटाखे से गंभीर श्रेणी में एक्यूआई

Fri, 05 Nov 2021 05:37 PM IST
सुशील कुमार कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Fri, 05 Nov 2021 05:37 PM IST
सार

सफर के अनुसार, शुक्रवार को दिल्ली के पीएम 2.5 प्रदूषण में पराली जलाने से 36 प्रतिशत का योगदान रहा, जो इस मौसम में अब तक का सबसे अधिक प्रदूषण है।

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Delhi-NCR air get Poisoned Stubble burning contributes to 36 percent of PM 2.5 pollution AQI in severe category due to crackers
दिल्ली में धुंध की चादर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली-एनसीआर में दिवाली के बाद शुक्रवार सुबह हवा का स्तर गंभीर श्रेणी में पहुंच गया। दिल्ली सरकार और एनजीटी द्वारा पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद दिवाली पर जमकर आतिशबाजी हुई। सरकारी वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान एजेंसी सफर के मुताबिक, दिल्ली की समग्र वायु गुणवत्ता शाम 03:07 बजे 531 एक्यूआई के साथ गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई।

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सफर के अनुसार, शुक्रवार को दिल्ली के पीएम 2.5 प्रदूषण में पराली जलाने से 36 प्रतिशत का योगदान रहा, जो इस मौसम में अब तक का सबसे अधिक प्रदूषण है। सफर के संस्थापक-परियोजना निदेशक गुफरान बेग ने कहा कि दिल्ली की समग्र वायु गुणवत्ता अतिरिक्त आतिशबाजी उत्सर्जन के साथ गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है। 
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स्थानीय हवाएं तेज हो गई हैं और अब तेजी से फैलाव होने की उम्मीद है। अगर अब कोई पटाखे नहीं चले तो एक्यूआई आज रात तक 'बहुत खराब' श्रेणी में पहुंच जाएगा। हालांकि, शनिवार को पराली का योगदान लगभग समान रहने की उम्मीद है। गुरुवार को पीएम 2.5 प्रदूषण में 25 प्रतिशत पराली जलने का सहयोग था। पिछले साल दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी 5 नवंबर को 42 प्रतिशत पर पहुंच गई थी। 2019 में फसल अवशेष जलाने से 1 नवंबर को दिल्ली के पीएम 2.5 प्रदूषण का 44 प्रतिशत हिस्सा था।
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) 2015 से वायु की गुणवत्ता को माप रहा है। हर घंटे की वायु गुणवत्ता का आंकड़ा देने के साथ सीपीसीबी 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक हर दिन शाम चार बजे जारी करता है। बीते सात सालों में पहली बार ऐसा हुआ है, जब दिल्ली समेत एनसीआर के सभी शहरों का सूचकांक 450 से ऊपर चला गया। दिवाली की पटाखेबाजी इसकी अहम वजह बताई जा रही है। वहीं, पराली के धुएं ने भी इसमें भूमिका अदा की है।

सफर के परियोजना निदेशक डॉ. गुरफान बेग के मुताबिक, इस बार अधिक प्रदूषण के तीन प्रमुख कारण रहे हैं। इसमें पहला कारण उत्तर-पश्चिम दिशा से आने वाली हवाएं जो कि अपने साथ पराली का धुआं भी साथ लेकर आ रही हैं व पटाखों का प्रदूषण और स्थानीय स्तर पर होने वाला प्रदूषण जिम्मेदार है। यही वजह है कि हवा खतरनाक श्रेणी में दर्ज हुई है। 


उन्होंने बताया कि वातावरण के साथ-साथ मनुष्यों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक पीएम 2.5 का स्तर 2018 के बाद से इस वर्ष सबसे अधिक रहा है। पिछले वर्ष पीएम 2.5 का स्तर 298 रहा था। क्योंकि, दिवाली से पहले ही यह अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। अगले 24 घंटे के भीतर हवा में पीएम 2.5 के स्तर में कमी हो सकती है, लेकिन यह बहुत खराब से लेकर गंभीर श्रेणी के आसपास बना रहेगा।

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