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Delhi Jahangirpuri Violence: कांच की बोतलों का पत्थरों से दिया जा रहा था जवाब, हिंसा के अगले दिन घरों में कैद रहे लोग

Mon, 18 Apr 2022 01:44 AM IST
अनुराग सक्सेना किशन कुमार, नई दिल्ली
किशन कुमार, नई दिल्ली Published by: अनुराग सक्सेना Updated Mon, 18 Apr 2022 01:44 AM IST
सार

इलाके में शाम को जहांगीरपुरी के कुशल रोड पर शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान पत्थरबाजी होने पर शोभायात्रा में मौजूद आधी भीड़ महेंद्र पार्क व आधी भीड़ डी- ब्लॉक की तरफ दौड़ पड़ी। चश्मदीदों ने बताया कि हिंसा के उग्र रूप लेने से पहले कुशल चौक पर जमकर नारेबाजी की जा रही थी।

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Delhi Jahangirpuri Violence: Glass bottles were being answered with stones people imprisoned in homes the next day of violence
जहांगीरपुरी हिंसा के बाद इलाके में पुलिस बल तैनात। - फोटो : ANI

विस्तार

जहांगीरपुरी हिंसा की आग कुछ पलो में ही इतनी उग्र हो गई थी कि कांच की बोतलों का जवाब पत्थरों से दिया जा रहा था। रोड के पार एक तरफ से एक समदुय की ओर की ओर से कांच की बोतलों को फेंका जा रहा था। वहीं, दूसरी तरफ के लोग बचाव के लिए पत्थरों का इस्तेमाल कर रहे थे। पत्थरों व टूटें हुई बोतलों के निशान हिंसा के अगले दिन भी घटनास्थल पर खौफनाक मंजर को बयां कर रहे थे।

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इलाके में शाम को जहांगीरपुरी के कुशल रोड पर शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान पत्थरबाजी होने पर शोभायात्रा में मौजूद आधी भीड़ महेंद्र पार्क व आधी भीड़ डी- ब्लॉक की तरफ दौड़ पड़ी। चश्मदीदों ने बताया कि हिंसा के उग्र रूप लेने से पहले कुशल चौक पर जमकर नारेबाजी की जा रही थी। इस बीच दुकानदारों ने माहौल खराब होता देख दुकानों को बंद करना शुरू कर दिया था। दोनों पक्षों की ओर से कुछ ही मिनटों पर सड़कों पर बच्चे से लेकर व्यस्क हाथों में डंडे व पत्थर लेकर पहुंच गए थे।

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इस बीच किसी एक पक्ष की ओर से पत्थरबाजी शुरू हुई, जिससे माहौल और बिगड़ गया। कुछ ही देर में सी-ब्लॉक की ओर से एक पक्ष के लोगों ने कांच की बोतलों को फेंकना शुरू कर दिया गया था, जिसके जवाब में जी-ब्लॉक से लोगों ने पत्थर फेंकने शुरू कर दिए थे। इस दौरान कुछ ही देर में चौराहों पर कांच और पत्थरों का ढेर लगा गया था। हिंसा के उग्र होने के साथ सी-ब्लॉक की ओर से भीड़ ने दौड़ते हुए जी-ब्लॉक में प्रवेश कर लिया था, जिसके बाद हिंसा और उग्र रूप ले चुकी थी। इस दौरान भीड़ ने सड़कों पर खड़ी गाड़ियों को अपना निशाना बनाया और तोड़फोड़ करते हुए कुछ वाहनों को आग के हवाले कर दिया था। 

सी-ब्लॉक में होता है कबाड़ का काम, आसानी से मिल गई थी कांच की बोतलें

कुशल सीनेमा के सामने सी-ब्लॉक में झुग्गी बस्ती इलाका है। ऐसे में यहां रहने वाले लोग कबाड़ बीनकर अपना गुजारा करते हैं। यही वजह है कि इलाके में कबाड़ के रूप में कांच की बोतलों की अच्छी खासी खेप मौजूद थी। चश्मदीदों ने बताया कि हिंसा के भड़कते ही कुशल चौक पर रेहड़ी और कट्टों में भर कांच की बोतलों को लाकर फेंकना शुरू कर दिया गया था।

गोलियों और लाठी-डंडे की आवाज से सहम गए थे घर में मौजूद लोग

स्थानीय लोगों ने बताया कि शाम के समय हिंसा भड़कने पर लोगों के शोर के साथ लाठी- डंडे व तोड़फोड़ की आवाज लगातार आ रही थी। इस बीच कई बार लोगों ने गोलियां चलाने की भी आवाजें सुनी गईं। ऐसे में घर में मौजूद बुजुर्ग, महिलाएं व बच्चे रात भर तक सहमे रहे। स्थानीय लोगों में खौफ इस कदर है कि हल्की सी भी आहट पर लोग डर रहे हैं। लोगों ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि पुलिस के आने के बाद मामला शांत  हो जाएगा, लेकिन पुलिस के पहुंचने के काफी देर बाद तक तोड़-फोड़ व गोलियां की आवाजें सुनी गईं।

दोनों समुदाय की ओर से लग रहे थे धार्मिक नारे

हिंसा के उग्र रूप लेने से पहले दोनों समुदाय के लोग कुशल चौक पर जमा हो गए थे। इस दौरान दोनों समुदाय के लोगों ने धार्मिक नारे लगाना शुरू कर दिए थे। नारे लगाने वालों में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे। नारों की आवाज सुनकर इलाके में रहने वाले अन्य लोग भी भीड़ का हिस्सा बन गए थे। यही वजह रही कि हिंसा के दौरान घटनास्थल पर काफी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए थे।

हिंसा के अगले दिन घरों में कैद रहे लोग, सहमे रहे बच्चे व महिलाएं

हिंसा के अगले दिन जहांगीरपुरी इलाके में पुलिस का कड़ा पहरा रहा। इस दौरान पुलिस ने सी-ब्लॉक, जी-ब्लॉक, बी और डी ब्लॉक में बैरिकेडिंग कर वाहनों की आवाजाही को बंद रखा। हालांकि, पैदल जाने वाले लोगों को निकलने की अनुमति दी गई। इस दौरान सी-ब्लॉक में मौजूद आठ से 10 गलियों के दरवाजों पर दिल्ली पुलिस और अर्द्धसैनिक बल के जवान मौजूद रहे। वहीं, कॉलोनियों में बच्चे व महिलाएं भी अपने घरों में मौजूद रहीं। केवल पुरुष ही बार-बार कॉलोनियों के दरवाजों के पास आकर पल-पल का हाल ले रहे थे, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस बल की ओर से उन्हें वापस भेजा जा रहा था।

हिंसा के अगले दिन खुली सिर्फ किराना और सब्जी की दुकानें

इलाके में हिंसा के अगले दिन सिर्फ किराना स्टोर और सब्जी की दुकानें खुली रही। इस दौरान किराना स्टोर से लेकर सब्जी की दुकानों पर लोगों की भीड़ रही। हिंसा के डर से कुछ लोगों ने सप्ताह भर का राशन भी खरीद लिया है। स्थानीय लोगों को डर है कि इलाके में तनावपूर्ण सर्थति की वजह से कभी भी दुकानों को बंद कराया जा सकता है। वहीं, लोग बार-बार घरों से बाहर निकलने में भी कतरा रहे हैं। इस वजह से अधिकांश लोग एक बार में ही अपनी जरूरतों का सामान खरीद रहे हैं। 

मस्जिद और मंदिर के पास आम आदमी का प्रवेश नहीं

पुलिस ने घटनास्थल पर मस्जिद और मंदिर के पास विशेष सुरक्षा के इतंजाम किए हैं। इसके तहत सड़क के दोनों ओर से बैरिकेडिंग कर रास्ता बंद कर दिया गया है। साथ ही रोड पर  एक भी दुकान को खुलने की इजाजत नहीं है। पूरे इलाके में धारा 144 जैसा माहौल है। मंदिर व मस्जिद के पास किसी भी आम व्यक्ति को जाने नहीं दिया जा रहा है। केवल विशेष मामले में ही लोगों को पहचान पत्र दिखाकर जाने की छूट है। उधर, हिंसा के अगले दिन भी मस्जिद परिसर में पत्थर व झंडे देखे गए।

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