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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi High Court says There should be full disclosure of whether the food item is veg or non-veg

Delhi High Court : खाद्य पदार्थ के वेज या नॉनवेज होने का पूरा खुलासा होना चाहिए

Thu, 03 Mar 2022 04:11 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 03 Mar 2022 04:11 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने कहा कि थाली में दी जाने वाली चीजों से प्रत्येक व्यक्ति के मौलिक अधिकार प्रभावित होते हैं।

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Delhi High Court says There should be full disclosure of whether the food item is veg or non-veg
delhi high court - फोटो : ANI

विस्तार

उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि किसी खाद्य पदार्थ के शाकाहारी या मांसाहारी होने के संबंध में पूर्ण खुलासा होना चाहिए क्योंकि थाली में दी जाने वाली चीजों से प्रत्येक व्यक्ति के मौलिक अधिकार प्रभावित होते हैं।

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न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति डीके शर्मा की पीठ ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई ) को निर्देश दिया कि वह सभी संबंधित अथारिटी के अधिकारियों को एक नया आदेश जारी करे जिसमें स्पष्ट रूप से खुलासा करने की बाध्यता बताई गई है कि खाद्य पदार्थ शाकाहारी है या मांसाहारी।पीठ ने घरेलू उपकरणों और परिधानों सहित जनता द्वारा उपयोग की जाने वाली सभी वस्तुओं के उत्पादन प्रक्रिया में उनके अवयवों के आधार पर शाकाहारी या मांसाहारी के रूप में लेबल करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है।
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अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील द्वारा की गई इस दलील से सहमति जताई कि अधिकारियों को इस तरह के दिशा निर्देश जारी करना जरूरी है न कि आम जनता को जिनके मौलिक अधिकार प्रभावित होते हैं।पीठ ने कहा इस संबंध में सभी राष्ट्रीय दैनिक में नए आदेश का व्यापक प्रचार किया जाए।अदालत ने कहा चूंकि संविधान के तहत अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा) और अनुच्छेद 25  के तहत विवेक की स्वतंत्रता और धर्म की स्वतंत्रता प्रभावित होती है।
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हमारे विचार में यह मौलिक है कि खाद्य वस्तु के शाकाहारी या मांसाहारी होने के संबंध में एक पूर्ण और पूर्ण प्रकटीकरण को उपभोक्ता जागरूकता का एक हिस्सा बनाया जाए।पीठ ने कहा कि उसका विचार है कि यह सुनिश्चित करने में अधिकारियों की ओर से विफलता कि कोई भी पैकेज्ड खाद्य पदार्थ शाकाहारी या मांसाहारी है या नहीं यह सुनिश्चित करने में विफलता भी उस उद्देश्य को खत्म कर देती है जिसके लिए खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम बनाया गया था।अदालत ने एफएसएसएआई और केंद्र को इस मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 21 मई तय की है।

याचिकाकर्ता गायों के कल्याण के लिए काम करने वाली गौ रक्षा दल की ओर से पेश अधिवक्ता रजत अनेजा ने कहा कि एफएसएसएआई द्वारा 22 दिसंबर 2021को जारी संचार में अभी भी बहुत अस्पष्टता है और स्पष्ट रूप से खाद्य व्यवसाय संचालकों को इस बारे में खुलासा करने की आवश्यकता नहीं है। खाने की चीज वेज है या नॉनवेज, इस आधार पर कि अगर उसका इस्तेमाल बहुत कम होता है तो वह चीज नॉनवेज बन जाती है।


उच्च न्यायालय ने पहले कहा था कि मांसाहारी सामग्री का उपयोग और उन्हें शाकाहारी लेबल करना सख्त शाकाहारियों की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं को ठेस पहुंचाएगा और उनके धर्म को स्वतंत्र रूप से मानने के उनके अधिकार में हस्तक्षेप होगा।अदालत ने कहा था कि हर किसी को यह जानने का अधिकार है कि वे क्या खा रहे हैं और छल और छलावरण का सहारा लेकर उन्हें थाली में कुछ भी नहीं दिया जा सकता है।याचिकाकर्ता ने कहा कि ऐसी कई वस्तुएं और वस्तुएं हैं जिनका उपयोग रोजमर्रा की जिंदगी में किया जाता है बिना शाकाहार को यह महसूस किए कि वे या तो जानवरों से प्राप्त होते हैं या पशु-आधारित उत्पादों का उपयोग करके संसाधित होते हैं।

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