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Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- आईआरडीएआई का दायित्व है कि विकलांग व्यक्तियों के साथ अनुचित पूर्वाग्रह न हो
Sat, 02 Sep 2023 04:57 PM IST
अनुज कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: अनुज कुमार
Updated Sat, 02 Sep 2023 04:57 PM IST
सार
दिल्ली हाईकोर्ट ने शनिवार को स्वास्थ्य बीमा कवरेज के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि आईआरडीएआई का दायित्व है कि विकलांग व्यक्तियों के साथ अनुचित पूर्वाग्रह न हो।
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दिल्ली उच्च न्यायालय
- फोटो : Google
विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने शनिवार को स्वास्थ्य बीमा कवरेज के लिए दायर याचिका पर सुनवाई की। विशेष रूप से विकलांग लोगों के लिए एक उच्च स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम और लोडिंग शुल्क का दावा किया गया था। जिसपर कोर्ट ने कहा कि आईआरडीएआई का दायित्व है कि विकलांग व्यक्तियों के साथ अनुचित पूर्वाग्रह न हो।
इस मामले पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट की जज प्रथिबा एम सिंह ने कहा कि प्रिंसिपल ऑफ रिजनेबल अकॉम्मोडेशन का सिंद्धांत करता है कि ऐसे व्यक्तियों को समाज और राज्य द्वारा अतिरिक्त सहायता प्रदान की जाती है। ताकि वे अपना जीवन जीने में सक्षम हो सकें। समान मूल्य और गरिमा, और जीवन के अधिकार में चिकित्सा बीमा सहित स्वास्थ्य देखभाल का लाभ उठाने का अधिकार शामिल है।
कोर्ट ने आगे कहा कि कई न्यायिक आदेशों के बाद चार सरकारी बीमा कंपनियों सहित विभिन्न सामान्य और स्वास्थ्य बीमा कंपनियों ने विकलांग व्यक्तियों के लिए प्रॉडक्ट लॉन्च किए हैं। न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि लॉन्च किए गए उत्पाद विकलांग व्यक्तियों के लिए सबसे आदर्श नहीं हो सकते हैं। लेकिन यह उनके लिए एक समान प्रक्रिया हासिल करने की ओर पहला कदम है। जो अधिकार सहित कानूनों का गंभीर उद्देश्य है।
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इस मामले पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट की जज प्रथिबा एम सिंह ने कहा कि प्रिंसिपल ऑफ रिजनेबल अकॉम्मोडेशन का सिंद्धांत करता है कि ऐसे व्यक्तियों को समाज और राज्य द्वारा अतिरिक्त सहायता प्रदान की जाती है। ताकि वे अपना जीवन जीने में सक्षम हो सकें। समान मूल्य और गरिमा, और जीवन के अधिकार में चिकित्सा बीमा सहित स्वास्थ्य देखभाल का लाभ उठाने का अधिकार शामिल है।
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कोर्ट ने आगे कहा कि कई न्यायिक आदेशों के बाद चार सरकारी बीमा कंपनियों सहित विभिन्न सामान्य और स्वास्थ्य बीमा कंपनियों ने विकलांग व्यक्तियों के लिए प्रॉडक्ट लॉन्च किए हैं। न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि लॉन्च किए गए उत्पाद विकलांग व्यक्तियों के लिए सबसे आदर्श नहीं हो सकते हैं। लेकिन यह उनके लिए एक समान प्रक्रिया हासिल करने की ओर पहला कदम है। जो अधिकार सहित कानूनों का गंभीर उद्देश्य है।
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