दिल्ली हाईकोर्ट: निजामुद्दीन मरकज में पूरी मस्जिद को फिर से खोलने की अनुमति मिली, शब-ए-बारात के मद्देनजर लिया निर्णय
न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने अपने फैसले में कहा है कि मस्जिद को शब-ए-बारात से एक दिन पहले दोपहर 12 बजे खोला जाएगा और अगले दिन शाम चार बजे स्थानीय थाना प्रभारी की अनुमति के अनुसार बंद कर दिया जाएगा।
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को शब-ए-बारात के आगामी त्योहार के मद्देनजर निजामुद्दीन मरकज में मस्जिद को फिर से खोलने की अनुमति प्रदान कर दी। अदालत ने इसके लिए मस्जिद प्रशासन को कई शर्तो का पालन करने का निर्देश दिया है। अदालत ने मस्जिद की चारों मंजिलों को खोलने का निर्देश देते हुए मस्जिद में लोगों की संख्या 100 निर्धारित करने संबंधी पुलिस की शर्त कोखारिज कर दिया।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने अपने फैसले में कहा है कि मस्जिद को शब-ए-बारात से एक दिन पहले दोपहर 12 बजे खोला जाएगा और अगले दिन शाम चार बजे स्थानीय थाना प्रभारी की अनुमति के अनुसार बंद कर दिया जाएगा। साथ ही अदालत ने क्षेत्रीय थानाध्यक्ष द्वारा लगाई गईं कई सख्त शर्तों में बदलाव किया। इसके अलावा अदालत ने याचिकाकर्ता को रमजान के लिए भी मस्जिद खोलने के लिए थानाध्यक्ष के समक्ष नए सिरे से आवेदन करने को कहा गया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 31 मार्च तय की है।
थानाध्यक्ष ने प्रत्येक मंजिल पर 100 लोगों की संख्या को सीमित करते हुए कहा कि किसी भी विदेशी को मस्जिद में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड कर उन्हें सौंपी जाएगी।
अदालत ने इन शर्तो में संशोधन करते हुए पूरी मस्जिद परिसर यानि भूतल और मरकज भवन की तीन अन्य मंजिलें में नमाज अदा करने की अनुमित प्रदान की है। अदालत ने प्रत्येक मंजिल पर लोगों की संख्या की सीमा को इस शर्त पर हटा दिया कि कोविड के उचित व्यवहार का पालन किया जाएगा।
अदालत ने इसके अलावा कहा कि मस्जिद में कोई भी नया कैमरा नहीं लगाया जाएगा और इसकी मांग होने पर ही फुटेज पुलिस को सौंपी जाएंगी। अदालत ने प्रबंधन समिति को मस्जिद के बाहर लगाए गए प्रतिबंधों को लागू करने और हाथ से पकड़े गए थर्मामीटर का उपयोग करके नमाजियों की स्क्रीनिंग करने का भी निर्देश दिया गया है।
मस्जिद मार्च 2020 में कर दी गई थी बंद
निजामुद्दीन मस्जिद को मार्च 2020 में जनता के लिए बंद कर दिया गया था। आरोप है कि तब्लीगी जमात के सदस्य कोविड -19 मानदंडों का उल्लंघन करते हुए वहां रह रहे थे।
उच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद अधिकारियों ने पिछले साल 50 लोगों को मस्जिद परिसर के अंदर दिन में पांच बार नमाज अदा करने की अनुमति दी थी। यह व्यवस्था आज तक जारी है।
दिल्ली वक्फ बोर्ड ने शब-ए-बारात और रमजान के आगामी त्योहारों के मद्देनजर मस्जिद को पूरी तरह से फिर से खोलने की मांग करते हुए अदालत के समक्ष याचिका दायर की थी। उन्होंने तर्क रखा कि दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने सभी पूजा स्थलों पर कोविड -19 प्रतिबंध हटा दिए हैं। ऐसे में मस्जिद पर भी प्रतिबंध हटाने का निर्देश दिया जाए। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता को थानाध्यक्ष के समक्ष आवेदन दायर करने का निर्देश दिया था।
मस्जिद प्रबंधन समिति ने कहा- पुलिस की शर्तें बेहद अनुचित
सुनवाई के दौरान प्रबंधन समिति की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने अदालत को बताया कि पुलिस द्वारा लगाई गई कई शर्तें बेहद अनुचित हैं। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज एसएचओ के सामने पेश करने पर आपत्ति जताई। वक्फ बोर्ड की ओर से पेश अधिवक्ता संजय घोष ने कहा ये शर्तें अनुचित हैं। उन्हें केवल डीडीएमए के दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए निर्देशित किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि संख्या निर्धारित न की जाए, हम डीडीएमए के सभी दिशानिर्देशों का पालन करेंगे। अगर वे धार्मिक स्थलों पर लोगों की संख्या को सीमित करना चाहते हैं तो यह केवल इस विशेष मस्जिद के लिए ही क्यों। केंद्र सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता रजत नायर ने हालांकि इस आधार पर शर्तों का बचाव किया कि उन्हें केवल भीड़-भाड़ को रोकने और यह सुनिश्चित करने के लिए रखा गया है।