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सख्ती: दिल्ली उच्च न्यायालय का आदेश, चुनावों में कोविड नियमों के उल्लंघन मामले में चुनाव आयोग दाखिल करे जवाब

Tue, 24 Aug 2021 01:57 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 24 Aug 2021 01:57 AM IST
सार

मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ के समक्ष निर्वाचन आयोग ने कहा कि याचिका अब व्यर्थ है क्योंकि यह असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों में प्रचार के संबंध में थी जो अप्रैल में समाप्त हो गए थे।

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delhi high court order to file a reply to election commission in case of violation of covid rules in elections
delhi high court - फोटो : PTI

विस्तार

उच्च न्यायालय ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर जारी मास्क पहनने सहित अनिवार्य दिशा-निर्देशों का बार-बार उल्लंघन मामले में जवाब दाखिल करने के लिए निर्वाचन आयोग (ईसी) को समय प्रदान कर दिया। याचिका में चुनावों में प्रचारकों और उम्मीदवारों को प्रचार करने से प्रतिबंधित करने का आग्रह करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

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मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ के समक्ष निर्वाचन आयोग ने कहा कि याचिका अब व्यर्थ है क्योंकि यह असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों में प्रचार के संबंध में थी जो अप्रैल में समाप्त हो गए थे।
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पीठ ने आयोग के अधिवक्ता से कहा कि भले ही चुनाव खत्म हो गए है लेकिन इस मुद्दे पर वे अपना पक्ष रखे। अदालत ने मामले की सुनवाई 18 अक्टूबर तय की है।

पीठ उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी और थिंक टैंक सेंटर फॉर एकाउंटेबिलिटी एंड सिस्टमिक चेंज (सीएएससी) के अध्यक्ष विक्रम सिंह की एक याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में कहा गया था कि केंद्र और निर्वाचन आयोग के आदेशों और दिशानिर्देशों के बावजूद, कोविड-19 नियमों की परवाह किए बिना चुनाव प्रचार जोरों पर चल रहा है।
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याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता विराग गुप्ता ने कहा कि निर्वाचन आयोग यह नहीं कह सकता कि याचिका का अब कोई औचित्य नहीं रह गया है और उनका आवेदन भी इस मामले में लंबित है।

निर्वाचन आयोग की ओर से अधिवक्ता सिद्धांत कुमार ने कहा कि याचिकाकर्ता जांच की मांग कर रहे है जबकि दिल्ली में कोई चुनाव नहीं हो रहा था जहां याचिका दाखिल की गई थी। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग राज्य सरकार की जगह नहीं ले सकता और यह केवल स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने से संबंधित है।

गृह मंत्रालय ने याचिका में दायर अपने जवाब में पहले कहा था कि उसने इस साल मार्च में सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) को सभी सभाओं में कोविड -19 के उचित व्यवहार का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कहा था।

केंद्र सरकार के स्थायी वकील अनुराग अहलूवालिया के माध्यम से दायर हलफनामे में, गृह मंत्रालय ने कहा था कि उसने कोविड-19 के उचित व्यवहार और मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के सख्त पालन के लिए आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जारी दिशा-निर्देशों में प्रावधान किए हैं।

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया था कि चुनाव की घोषणा करते समय निर्वाचन आयोग ने अपनी अधिसूचना में कहा था कि हर व्यक्ति को चुनाव से संबंधित हर गतिविधि के दौरान एक फेस मास्क पहनना होगा, लेकिन राजनीतिक दलों, उनके नेताओं तथा प्रचारकों द्वारा महामारी के दौरान आयोजित रैलियों, जनसभाओं और रोड शो में इसका उल्लंघन किया गया।


असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव विभिन्न चरणों में हुए थे। मतदान 27 मार्च को शुरू हुआ था और 29 अप्रैल को संपन्न हुआ था।

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