दिल्ली: हाईकोर्ट का आदेश, नियोक्ता कर्मचारी की ग्रेच्युटी से कर सकता है नुकसान की भरपाई
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह ने कहा कि ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम की धारा 4 में प्रावधान है कि प्रत्येक कर्मचारी को उसके रोजगार की समाप्ति पर नियोक्ता ग्रेच्युटी का भुगतान करेगी यदि कर्मचारी ने कम से कम पांच साल तक निरंतर सेवा की है।
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उच्च न्यायालय ने कहा कि कोई भी नियोक्ता अपने किसी बर्खास्त कर्मचारी की ग्रेच्युटी को जब्त कर सकता है यदि उसके किसी काम या चूक या लापरवाही की वजह से नियोक्ता को कोई नुकसान या संपत्ति को क्षति पहुंची हो। अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इस तरह की जब्ती सिर्फ नियोक्ता को हुए नुकसान की सीमा तक हो सकती है और इससे आगे नहीं।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह ने अपने फैसले में कहा है कि ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम की धारा 4 में प्रावधान है कि प्रत्येक कर्मचारी को उसके रोजगार की समाप्ति पर नियोक्ता ग्रेच्युटी का भुगतान करेगी। ऐसा तभी संभव है यदि कर्मचारी ने कम से कम पांच साल तक निरंतर सेवा की है।
हाईकोर्ट ने दो याचिकाओं की सुनवाई करते हुए सुनाया फैसला
उच्च न्यायालय ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और उसके कर्मचारियों के बीच विवादों से जुड़ी दो याचिकाओं का निपटारा करते हुए यह फैसला दिया है। न्यायालय में पेश एक मामले में बैंक ने कर्मचारी के खिलाफ आरोप लगाया था कि उसके द्वारा कुछ पार्टियों को समायोजित करने के लिए ऋण जारी किए गए, जिससे बैंक को नुकसान हुआ।
वहीं दूसरे मामले में बैंक ने कर्मचारी के खिलाफ आरोप लगाया था कि उसने आवश्यक औपचारिकताओं और लोन देने के लिए तय मानदंडों का उल्लंघन करके ऐसे लोगों/संस्थानों को ऋण दिया जिनके पहले ऋण या तो एनपीए थे या अतिदेय (ओवरड्यू) थे, जिससे कथित तौर पर बैंक को बड़ा वित्तीय नुकसान हुआ था।