{"_id":"634681aa1fb625645b471518","slug":"delhi-high-court-gives-film-producer-bhushan-kumar-a-chance-to-present-his-case","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi: फिल्म निर्माता भूषण कुमार को अपना पक्ष रखने का मौका, 'आदिपुरुष' के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर है याचिका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi: फिल्म निर्माता भूषण कुमार को अपना पक्ष रखने का मौका, 'आदिपुरुष' के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर है याचिका
Wed, 12 Oct 2022 03:21 PM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Wed, 12 Oct 2022 03:21 PM IST
सार
एडवोकेट राज गौरव द्वारा दायर मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि इसके निर्माताओं द्वारा जारी किए गए प्रोमो ने हिंदू देवताओं, भगवान राम और हनुमान को गलत तरीके से चित्रित करके हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है। तीस हजारी अदालत के दीवानी न्यायाधीश अभिषेक कुमार ने अब मामले की सुनवाई 5 नवंबर तय की है।
विज्ञापन
आदिपुरुष
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अदालत ने फिल्म निर्माता भूषण कुमार को उनकी आगामी फिल्म आदिपुरुष की मौजूदा रूप में रिलीज पर रोक लगाने की मांग याचिका पर जिरह की इजाजत प्रदान कर दी। उन्होंने तर्क रखा है कि याचिका विचारयोग्य नहीं है। यह याचिका एक वकील ने दायर की है।
विज्ञापन
एडवोकेट राज गौरव द्वारा दायर मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि इसके निर्माताओं द्वारा जारी किए गए प्रोमो ने हिंदू देवताओं, भगवान राम और हनुमान को गलत तरीके से चित्रित करके हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है। तीस हजारी अदालत के दीवानी न्यायाधीश अभिषेक कुमार ने अब मामले की सुनवाई 5 नवंबर तय की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिका विचार योग्य है या नहीं इस मुद्दे पर जिरह की जाएगी। सुनवाई के दौरान फिल्म निर्माता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव सिंधवानी ने कहा कि उन्हें प्रिंट मीडिया के माध्यम से कार्यवाही के बारे में पता चला है। इस प्रकार उन्होंने अनुरोध किया कि कुमार को सम्मन पूर्व चरण में उपस्थित होने की अनुमति दी जाए और मुकदमे की स्थिरता पर बहस की जाए।
विज्ञापन
अदालत ने आदेश में कहा कि यदि कोई प्रतिवादी समन पूर्व चरण में पेश हुआ है और मुकदमे की स्थिरता के संबंध में सहायता के लिए अनुमति मांग रहा है तो वह प्रतिवादी की ओर आंखें नहीं मूंद सकते। अदालत ने कहा उक्त प्रेक्टिस न्याय का उपहास होगा। इसके अलावा इस अदालत द्वारा पारित कोई भी आदेश प्रतिवादी के अधिकारों को प्रभावित करेगा और इसलिए, प्रतिवादी सम्मन जारी होने से पहले ही अपने अधिकारों की रक्षा करने का हकदार है। यह देखते हुए कि कुमार ने प्रिंट मीडिया के माध्यम से कार्यवाही के बारे में ज्ञान प्राप्त किया था और कानून के अनुसार प्रस्तुतियां देने के लिए पेश हुए है। अदालत ने कहा कि फिल्म निर्माता को याचिका की स्थिरता पर अदालत से संपर्क करने और सहायता करने का अधिकार है।
विज्ञापन
वकील द्वारा दायर याचिका में फिल्म के निर्माता और निर्देशक को फिल्म से कथित आपत्तिजनक हिस्से को यूट्यूब और फेसबुक समेत सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में प्रतिवादियों को भगवान राम और भगवान हनुमान और रावण के चित्रित करने से रोकने के लिए स्थायी निषेधाज्ञा के लिए एक डिक्री की भी मांग की गई है। फिल्म 12 जनवरी 2023 को रिलीज होने वाली है। याचिका में कहा गया है कि जहां भगवान राम की पारंपरिक छवि एक शांत और शांत व्यक्ति की है वहीं उन्हें फिल्म के टीजर में एक अत्याचारी, प्रतिशोधी और गुस्सैल व्यक्ति के रूप में दिखाया गया है।
इसके अलावा दलील में तर्क दिया गया है कि प्रोमो में भगवान हनुमान को पवित्र धागे (जनेऊ) के बजाय चमड़े की पोशाक पहने हुए एक अलग तरीके से दिखाया गया है। यह आरोप लगाते हुए कि अभिनेता सैफ अली खान द्वारा निभाए गए रावण के चरित्र को बेहद सस्ता और भयावह दिखाया गया है। प्रतिवादी को यदि भगवान राम और भगवान हनुमान के आपत्तिजनक चित्रण के साथ हिंदुओं के प्रति घृणा फैलाने से नहीं रोका गया तो बड़े पैमाने पर जनता में बहुत आक्रोश और विद्रोह हो सकता है और देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति भी पैदा हो सकती है।