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सरकारी अस्पताल में इलाज नहीं मिल पाने पर मधुमेह रोगी को हाईकोर्ट ने दी अंतरिम जमानत
Mon, 13 Apr 2020 09:33 PM IST
Trainee Trainee
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: Trainee Trainee
Updated Mon, 13 Apr 2020 09:33 PM IST
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दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने लॉकडाउन के बीच सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए नहीं पहुंच पाने पर मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित एक आरोपी को अंतरिम जमानत दी है। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों का फोकस कोरोना संक्रमितों पर होने के कारण पीड़ित को उपचार के लिए नई तारीख नहीं मिल सकी, जिसके आधार पर जमानत की मांग की गई थी।
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वकील की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति ने कहा कि आपात स्थिति में पीड़ित को सरकारी अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सकता, इसलिए आरोपी को 6 सप्ताह की अंतरिम जमानत दी जाती है। न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता के समक्ष पीड़ित के वकील विशाल पाहवा ने दलील दी कि उनका मुवक्किल मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित है।
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तबीयत खराब होने के चलते उनके मुवक्किल को 9 मार्च 2020 को सफदरजंग अस्पताल में डॉक्टर को दिखाया गया था और 18 मार्च को एम्स में इलाज के लिए तारीख दी गई थी। इस बीच कोरोना संक्रमण महामारी के कारण उनका अपोइंटमेंट एम्स ने रद्द कर दिया।
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इस कारण इलाज न मिलने से उनके मुवक्किल तबीयत और खराब हो रही है। सभी सरकारी अस्पतालों में कोरोना के मरीजों के इलाज पर डॉक्टरों का फोकस है और इसलिए वहां उसका इलाज संभव नहीं है। वहीं दूसरे पक्ष ने आरोपी की अंतरित जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी को कोई बीमारी नहीं है और ना ही उसे अस्पताल में भर्ती करवाने की जरूरत है।
इस पर कोर्ट ने आरोपी की मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मेडिकल रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि आरोपी मधुमेह और उच्च रक्तचाप की बीमारी से ग्रसित है और उसे उपचार की जरूरत है।